Tuesday, Jan 23, 2018

ब्लॉग: पाकिस्तान में मरियम की दाल अभी नहीं गलेगी

  • Updated on 12/5/2017

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। त्रुटियों से भरे हुए पाकिस्तानी राजनीतिक परिदृश्य में कभी भी बोरियत के पल नहीं आते। राजनीति के दिग्गजों में एक-दूसरे के विरुद्ध चुटकियां लेने का इतना प्रचलन है कि अब 24&7 टी.वी. चैनलों द्वारा किसी धार्मिक कर्मकांड की तरह इस काम को अंजाम दिया जाता है और हर समय दर्शकों को मनोरंजन उपलब्ध होता है। विभिन्न समाचार चैनलों पर जिस निर्लज्जतापूर्ण ढंग से हर शाम ‘टाक शो’ आयोजित किए जाते हैं उनसे यह अवधारणा सुदृढ़ होती है कि यही मुख्य धारा मनोरंजन है और शेष प्रकार की बातें गौण महत्व रखती हैं। शायद यही कारण है कि दोनों पक्षों के राजनीतिज्ञ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तोहमतबाजी के अपने कौशल को धारदार बनाते रहते हैं।

चाहे पी.टी.आई. (पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ) के फवाद चौधरी हों या पी.एम.एल.-एन. के दानियाल अजीज या फिर सर्वश्री शेख राशिद, तलाल चौधरी अथवा बाबर अवाण जैसा कोई अन्य, सभी के सभी हर शाम नई से नई दिलचस्प चुटकी लेकर हाजिर होते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि मुख्य धारा के संजीदा राजनीतिज्ञ भी मीडिया का ध्यान खींचने और खबरों में बने रहने के लिए लगातार नई से नई सामग्री तैयार करने में लगे रहते हैं। 

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पी.टी.आई. प्रमुख इमरान खान ने इस रुझान पर व्यथित होते हुए दावा किया है कि वह कभी भी व्यक्तिगत तोहमतबाजी में नहीं उलझते और अपनी आलोचना को राजनीति तक ही सीमित रखते हैं। वैसे उनके मुंह से ऐसी बातें सुनना कितना विडम्बनापूर्ण है क्योंकि इस असुखद रुझान के जनक तो वास्तव में वही हैं। वैसे कुछ भी हो, उनका आक्षेप सही है लेकिन सवाल पैदा होता है कि व्यक्तिगत और राजनीतिक के बीच लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? उदाहरण के तौर पर जब पी.टी.आई. प्रमुख अक्सर आयोजित होने वाली अपनी प्रैस कांफ्रैंसों में आरोप लगाते हैं कि जरदारी ने करदाताओं के पैसे में से करोड़ों-अरबों डालर चुराकर विदेशों में जमा करवा रखे हैं तो उनके पास इसका कोई ऐसा प्रमाण होता है जो अदालती समीक्षा पर खरा उतर सके?

इसी प्रकार नवाज शरीफ भी आरोपों के अनुसार गुनहगार हो सकते हैं लेकिन उन पर केवल अभियोग चलाया गया है, हालांकि सत्ता से उन्हें अपनी सम्पत्तियों का खुलासा न करने के आरोप में खदेड़ा नहीं गया था। दूसरी ओर जहांगीर तरीन को तो अभियोग चलने से पहले ही उनके कथित गुनाहों के लिए पी.एम.एल.-एन. के दिग्गज उनके विरुद्ध तलवारें भांज रहे हैं। अभी कुछ दिन पूर्व पी.एम.एल.-एन. का एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ उनके संबंधों को लेकर मीडिया में चर्चा कर रहा था। क्या इसे एक परिपाटी बनाया जा सकता है? तेजी से बढ़ रहा सोशल मीडिया में जाली खबरें लगाने का रुझान फैलता ही जा रहा है और दूसरों पर कीचड़ उछालने के मामले में यह परम्परागत मीडिया को भी बहुत पीछे छोड़ चुका है। फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर हर प्रकार की जाली खबरें और हेरा-फेरी की शिकार वीडियो तथा तस्वीरें बिना अच्छे-बुरे की तमीज किए पोस्ट की जा रही हैं।

पी.एम.एल.-एन. और पी.टी.आई. दोनों ने ही अपने विशेष साइबर विंग स्थापित किए हुए हैं जो भाड़े पर खबरों की जालसाजी करते हैं। यहां तक कि हर प्रकार की प्राइवेट गतिविधियों पर नजर रखने वाले सर्वशक्तिमान सत्तातंत्र पर भी ये आरोप लगते हैं कि इसने दुश्मन के प्रोपेगंडे का मुकाबला करने के बहाने सोशल मीडिया विंग स्थापित किए हुए हैं।
चूंकि सोशल मीडिया पर जारी होने वाली अधिकतर सामग्री के स्रोत की पुष्टि नहीं की जा सकती इसलिए हर प्रकार की चीजों को लोग सत्य मान लेते हैं। इमरान खान के विरोधी उन पर विशेष रूप में निशाना बनाकर यह कह रहे हैं कि वह औरतखोर (प्लेब्वॉय) हैं। खबरों की जालसाजी करने वाले उनकी अतीत की इश्कबाजियों को तोड़-मरोड़कर अपने हितों के मुताबिक समाचार गढ़ रहे हैं। 

बीते दिनों पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पी.पी.पी.) के सह-अध्यक्ष जरदारी ने लाहौर में पार्टी कार्यकत्र्ताओं के समक्ष भाषण करते हुए ‘मी टू मूवमैंट’ का उल्लेख किया। यह मूवमैंट उन सैंकड़ों औरतों का उल्लेख करती है जिनका हॉलीवुड के अब बदनाम हो चुके सैलीब्रिटी फिल्म निर्माता हार्वे वेंन्स्टीन ने यौन शोषण किया था या उनको तंग-परेशान किया था। ऐसा करके जरदारी साहिब ने इमरान खान को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया था। गौरतलब है कि हाल ही में अपनी सिंध यात्रा के दौरान इमरान खान ने पी.पी.पी. प्रमुख को भ्रष्ट एवं बेलिहाज दोस्त के रूप में चित्रित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया था। पी.टी.आई. ने यहां तक दावा किया था कि बेनजीर का वह कथित हस्तलिखित नोट भी जाली है जिसमें उनके पति को उनका राजनीतिक वारिस घोषित किया गया था।

जरदारी ने मेरे साथ यह दस्तावेज तब सांझा किया था जब मैं उनकी पत्नी की मौत के बाद जल्दी ही नौडेरो स्थित उनके आवास पर सांत्वना व्यक्त करने गया था। मैं श्रीमती भुट्टो की लिखाई से भली-भांति परिचित हूं इसलिए मैंने उसी क्षण यह कह दिया था कि यह दस्तावेज प्रमाणिक है और अभी भी मेरा यही दावा है। फिर भी यदि जरदारी ने इमरान खान को उन्हीं की भाषा में न लताड़ा होता तो बेहतर होता। पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी और उनकी राजनीतिक वारिस बनने के लिए मनोनीत मरियम सफदर अपने पिता के विपरीत अपने पति कैप्टन (रिटा.) सफदर को साथ लेकर राष्ट्रीय जवाबदारी ब्यूरो (एन.ए.बी.) की अदालत में पेशी के लिए हाजिर होती हैं। पति-पत्नी दोनों पर आरोप है कि नवाज बंधुओं के साथ वे भी परिवार की लंदन स्थित सम्पत्तियों के स्वामित्व से लाभान्वित हुए हैं।

जेद्दा में अपनी मां से मिलने के बहाने शरीफ ने सऊदी अरब में अपने ठहरने की अवधि में विस्तार करवा लिया। वास्तव में वह सऊदी अरब के कुछ शाही परिवारों के कुछ महत्वपूर्ण सदस्यों से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब वे दिन लद चुके हैं जब विपक्ष में रहते हुए भी शरीफ परिवार के सदस्यों को सऊदी अरब में ‘रैड कार्पेट’ स्वागत नसीब होता था। नया शाही परिवार अब किसी भी बात को पुराने शासकों वाली दृष्टि से नहीं देखता। वास्तव में तो रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा अरब शाही परिवार नवाज शरीफ से काफी व्यथित है कि उन्होंने यमन में से हाऊती बागियों को खदेडऩे के मामले में कथित इस्लामिक आर्मी को बिना शर्त समर्थन देने के मामले में ढुलमुल रवैया क्यों दिखाया। 

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उधर पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदारी ब्यूरो (एन.ए.बी.) की अदालत ने शरीफ की अनुपस्थिति में न केवल उन्हें व्यक्तिगत पेशी से माफी देने से इन्कार कर दिया है बल्कि उनकी गिरफ्तारी के लिए जमानती वारंट भी जारी किया है। ऐसा होने पर चरमपंथी मरियम बेशक अदालत के बाहर काफी शांत नजर आ रही थीं तो भी उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को जवाबदारी की बजाय बदलाखोरी करार दिया। उनके पिता भी अक्सर यही आरोप लगाते हैं। दूसरी ओर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ के माध्यम से नवाज शरीफ को इस बात के लिए राजी करना चाहते हैं कि वह सेना और अदालतों के विरुद्ध कठोर स्टैंड न लें।

यह बहुत सांत्वना की बात है कि अब्बासी ने अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया है। वह न तो शरीफ बंधुओं की रबड़ की मोहर बन रहे हैं और न ही किसी रोबो की तरह घिसे-पिटे ढर्रे पर चल रहे हैं। दूसरी ओर गत दिनों अंदरूनी मामलों के राज्यमंत्री तलाल चौधरी ने नवाज शरीफ का समर्थन करते हुए बयान दिया था कि लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों को शासन नहीं करने दिया जा रहा। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि पी.एम.एल.-एन. विपक्ष में बैठकर सिविलियन वर्चस्व के लिए संघर्ष करने को वरीयता देगी। ये केवल कहने की बातें हैं, वास्तव में पी.एम.एल.-एन. न तो क्रांतिकारी पार्टी है और न ही यथास्थिति का विरोध करने वाली। यह केवल सत्ता में बने रहकर खुद को किसी तरह जीवित रखना चाहती है। 

फिलहाल तो ऐसा लगता है कि शरीफ परिवार की कानूनी अड़चनों के कारण मरियम का रास्ता भी कांटों भरा हो गया है।  वैसे मरियम बहुत तेज-तर्रार करिश्माई तथा दृढ़ इरादों वाली राजनीतिज्ञ हैं। उनका भविष्य तो शानदार है लेकिन वर्तमान में उनकी दाल गलने वाली नहीं। शरीफ परिवार अधिक से अधिक यह कर सकता है कि विपदा की इस घड़ी में अपनी एकजुटता बनाए रखे।

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