GST में माल की आवाजाही पर ई बिल का विरोध

Navodayatimesनई दिल्ली/सेठी।  जी.एस.टी. के तहत 50,000 रुपए से ज्यादा का माल कहीं भी लाने-ले जाने के लिए ई-वे बिल की अनिवार्यता का ट्रेड-इंडस्ट्री में विरोध शुरू हो गया है। अभी तक इंटरस्टेट गुड्स मूवमेंट पर ई-परमिट आने से आशंकित व्यापारियों ने ई-बिलिंग को उससे भी बड़ी सिरदर्दी करार दिया है। कुछ संगठनों ने 5 लाख रुपए तक के कंसाइनमैंट को ई-बिलिंंग से मुक्त करने की मांग की है।

पीएम मोदी, Paytm संस्थापक ‘टाइम’ के प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल 

कन्फेडरेशन ऑफ  ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रेजीडेंट बी.सी. भरतिया ने इसे जी.एस.टी. की मूल भावना के खिलाफ  बताते हुए कहा, ‘‘राज्य के बाहर या भीतर कहीं भी माल भेजने के लिए थ्री लेवल ऑनलाइन सिस्टम से गुजरना होगा। पहले सप्लायर जी.एस.टी. पोर्टल पर माल की डिटेल्स अपलोड करेगा, फिर थर्ड पार्टी या ट्रांसपोर्टर वैसी ही डिटेल्स भरकर एक ई-वे बिल नंबर (ई.बी.एन.) जैनरेट करेगा। 

बिल की कॉपी या नंबर अपने साथ लेकर चलेगा। फिर रिसीवर 72 घंटे के अंदर ऑनलाइन पुष्टि करेगा कि माल ले लिया।’’ उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि प्रशासन को ट्रेडर्स पर भरोसा नहीं है। इससे फ्लाइंग स्क्वायड की धरपकड़ और रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिलेगा।

व्यापारियों का उत्पीडऩ बढ़ेगा
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नोएडा शाखा प्रमुख सुशील जैन ने कहा, ‘‘इससे व्यापारियों का उत्पीडऩ बढ़ेगा। सर्वर जाम की हालत में वे ट्रेडर बिलिंग में ही फंसकर रह जाएंगे, जिसके पास अतिरिक्त स्टाफ  या संसाधन नहीं हैं। कहां तो हम देश को सिंगल मार्कीट बनाने जा रहे थे और अब राज्य के भीतर माल की आवाजाही पर भी रोड परमिट और एंट्री-बैरियर्स के हालात पैदा होंगे। वहीं 50,000 की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 5 लाख किया जाना चाहिए।’’

FDI के लिए  इम्पोर्टेंट डेस्टीनेशन बन रहा है भारत

ट्रांसपोर्टर्स के लिए भी कई तरह की जवाबदेही
ट्रांसपोर्टर्स के लिए भी कई तरह की जवाबदेही तय की गई है। चूंकि दूरी के हिसाब से ई.बी.एन. की वैलिडिटी तय है, मसलन 100 किलोमीटर के लिए एक दिन, 300 कि.मी. 3 और 500 कि.मी. 5, 1000 किलो के लिए 15 दिन। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वैल्फेयर एसोसिएशन के प्रैजीडैंट प्रदीप सिंघल ने कहा, ‘‘हम दोबारा परमिट राज की तरफ  लौटेंगे। यह ट्रेड बैरियर मुक्त भारत की अवधारणा के खिलाफ  है जिसकी अपेक्षा जी.एस.टी. से की गई थी।’’ 

एक ही ट्रक में अलग-अलग सप्लायर्स या रिसीवर्स का माल होने पर ई.बी.एन. का अलग सीरियल नंबर मिलेगा। रोड एक्सीडैंट के बाद अगर माल दूसरी गाड़ी से भेजा जाता है तो नए सिरे से ई.बी.एन. जैनरेट करवाना होगा। ट्रांसपोर्टर बिना ई.बी.एन. नंबर जैनरेट किए माल लेकर नहीं चल सकता।

वैट से भी कठिन
जी.एस.टी. के जरिए कर प्रणाली को आसान बनाने का दावा किया गया था लेकिन यह नियम तो वैट अधिनियम से भी सख्त और परेशानी बढ़ाने वाला है। मौजूदा वैट नियमों में माल का परिवहन फॉर्म-49 के जरिए होता है। इस फॉर्म की मियाद 30 दिन की होती है। एक और 3 दिन की मियाद तो अव्यावहारिक है। ट्रांसपोर्टेशन और तमाम व्यवस्थाओं के बीच इसका पालन व्यापारी के लिए संभव ही नहीं होगा। ड्राफ्ट के मुताबिक शहर से शहर में ही यानी फैक्टरी से गोडाऊन के बीच भी माल परिवहन करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भी पैनल्टी लगा दी जाएगी।

अब सिर्फ 2862 रुपए में बनवा सकेंगे वसीयत

परेशानी यहां से
सी.ए. व कर सलाहकारों के मुताबिक प्रस्तावित नियम के हिसाब से सिर्फ  ई-वे बिल जारी करना असल समस्या नहीं है बल्कि इसके साथ लागू की जा रही समय सीमा की पाबंदी बड़ी परेशानी बनती नजर आ रही है। दरअसल ई-वे बिल के साथ बिल्कुल अव्यावहारिक अंदाज में मियाद लागू करने का प्रस्ताव है।

इसके मुताबिक ई-वे बिल के साथ माल कितनी दूरी तक भेजना है, यह भी दिखाना होगा। यदि 100 कि.मी. की दूरी तक भेजने का ब्यौरा दर्ज करवाया गया तो ई-वे की वैधता सिर्फ  24 घंटे होगी। यानी 24 घंटे के अंदर माल गंतव्य तक नहीं पहुंचाया गया तो भी चैकिंग के दौरान रोककर पैनल्टी लगा दी जाएगी। इसके बाद 300 कि.मी. तक के परिवहन पर सिर्फ  3 दिन की मोहलत दी जा रही है। ऐसा ही ज्यादा दूरी पर भी है।

15 से 30 दिन हो मियाद
ड्रॉफ्ट अव्यावहारिक है, आपत्ति दर्ज करने के लिए एक ही दिन का समय दिया गया था। व्यापारियों के साथ प्रैक्टीशनर्स और प्रतिनिधि संस्थाओं ने आपत्तियां दर्ज करवा दी हैं। ई-वे की मियाद 15 से 30 दिन की होनी चाहिए।
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

FacebookGoogle+TwitterPinterestredditDigglinkedinAddthisTumblr