पढ़ाई से ज्यादा स्टूडेंट्स को चाहिए जुम्बा और हिप हॉप वाला हॉस्टल, पढ़ें

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत में लाखों स्टूडेंट्स अपने घर से दूर रहकर अलग-अलग शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें कुछ दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहते हैं तो कुछ पुणे और हैदराबाद जैसे एजुकेशन हब्स में। कॉलेज के हॉस्टलों के अलावा कई स्टूडेंट्स प्राइवेट हॉस्टलों में भी रह रहे हैं। वहीं कई नहीं कंपनियां भी अब इस क्षेत्र में आई हैं, जो स्टूडेंट्स को एसी रूम, फ्री वाई फाई, इंडोर गेम्स और योग करने के लिए जगह उपलब्ध करा रही हैं। 

साथ ही कोई रोक-टोक नहीं। कई हॉस्टलों में दोस्तों को लाने और रुकवाने की परमिशन नहीं दी जाती, यहां ऐसा नहीं है। स्टूडेंट्स अपने दोस्तों को भी यहां ला सकते हैं या फिर नाइट आउट के लिए कहीं बाहर भी जा सकते हैं। यहां स्टूडेंट्स की हर छोटी से छोटी जरूरत का ध्यान रखा जा रहा है, जिससे अपने शहर से दूर रहकर भी इन्हें घर जैसा महसूस हो। 

अलग से गेमिंग जोन भी 
भारत में स्टूडेंट्स की एक बड़ी आबादी बड़े शहरों में उच्च शिक्षा के लिए जाती है। कुछ कंपनियां इन्हीं स्टूडेंट्स को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं। स्टूडेंट्स जब चाहें नाइट आउट के लिए जा सकते हैं।  कुछ हॉस्टलों में अलग से गेमिंग जोन भी हैं। एसी कमरों के साथ इन हॉस्टलों में अटैच्ड बाथरूम, फ्री वाई फाई और हाउसकीपिंग सर्विसेज जैसी सुविधाएं भी हैं।

किराया कुछ ज्यादा नहीं
रियलिटी कंसलटेंसी जेएलएल इंडिया के हेड ऑफ स्टै्रटेजिक कंसल्टिंग शुभांकर मित्रा का कहना है कि वैश्विक तौर पर देखें तो स्टूडेंट हाउसिंग बहुत ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर पर भारत में ऐसा नहीं है क्योंकि, यहां इसकी उपेक्षा की जाती है। जबकि इस सेक्टर में विकास की अपार संभावनाएं हैं, डिमांड और सप्लाई दोनों धीरे-धीरे बढ़ रही है। यही वजह है कि कंपनियां अब खुद के प्रोजेक्ट्स लेकर आई हैं।

वह अपने हिसाब से इसका किराया भी तय कर रहें पर स्टूडेंट्स को आकर्षित करने के लिए वो इसे कम ही रख रहे हैं।  कंपनियां लीज पर बिल्डिंगों को लेती हैं और इन्हें री-मॉडल कर इनमें हॉस्टल चला रही हैं। इन हॉस्टलों की शुरुआती फीस 8000 रुपए प्रतिमाह है। जिसमें खाना भी शामिल है। 

यह फीस पुराने हॉस्टलों की फीस से बहुत ज्यादा नहीं है और इसलिए स्टूडेंट्स इन्हें प्रिफर भी कर रहे हैं। फिलहाल हॉस्टलों के अलावा अगर स्टूडेंट्स पेइंग गेस्ट के तौर पर रह रहे हैं तो उन्हें 10,000 प्रतिमाह देना होता जिसमें खाना और हाउसकीपिंग शामिल नहीं है।

कंपनियां जो इस क्षेत्र में आई हैं
इन हॉस्टलों में आने की एक बड़ी वजह ये है कि कॉलेज या यूनिवर्सिटीज के हॉस्टल सिर्फ 20 प्रतिशत स्टूडेंट्स को ही रख पा रहे हैं। इनमें जगह न होने की स्थिति में स्टूडेंट्स को प्राइवेट हॉस्टलों में रहना पड़ता है। इस क्षेत्र में फिलहाल योर स्पेस, कोहो, आरुषा होम्स, कैम्पस स्टूडेंट कम्युनिटीज, ब्राइट यूथ स्टूडेंट हाउसिंग और एमएसआर वेंचर्स जैसी कंपनियां काम कर रही हैं। दिल्ली में कोहो और एनसीआर में योर स्पेस जैसी कंपनियां स्टूडेंट्स को सुविधाओं से लैस ऐसे हॉस्टल उपलब्ध करा रही हैं। दिल्ली के अलावा पुणे,  बंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में भी ऐसे हॉस्टल हैं।

होटल स्टाइल हॉस्टल
दिल्ली के कोहो में स्टूडेंट्स के लिए 8,000 से 25,000 तक के बीच में रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। फीस इस पर निर्भर करती है कि वह रूम दो और लोगों के साथ शेयर करना चाहते हैं या नहीं। कोहो की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। फिलहाल दिल्ली और एनसीआर में कोहो के 25 हॉस्टल हैं।

कोहो के कॉमन किचन में कॉफी मेकर और फ्रीज भी है। साथ ही री-क्रिएशन रूम और वाशिंग मशीन जैसी सुविधा भी है। री-क्रिएशन रूम, योग वगैरह करने के लिए एक जगह होती है। सबसे अच्छी बात है कि यहां आने-जाने को लेकर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। यहां पर रूम एयर कंडीशंड हैं साथ ही इंटीरियर्स का भी खास ख्याल रखा गया है। 

कोहो के मार्केटिंग हेड जॉन जैकब का कहना है कि हॉस्टल सेक्टर में बड़ी डिमांड को देखते हुए ही कोहो की शुरुआत की गई थी। फिलहाल हमारे हॉस्टल 90 से 95 प्रतिशत तक भरे हुए हैं। हालांकि अभी लोगों को ये कॉन्सेप्ट समझाना बड़ी चुनौती है। यहां आप ज्यादा किराया देकर भी रह सकते हैं और किसी के रूम शेयर करके कम किराए में भी। तो ये सोचना गलत है कि ये हॉस्टल महंगे हैं।

 21 वर्षीय स्टूडेंट ऋषभ शर्मा का कहना है कि मैं यहां तीन रूममेट्स के साथ रहता हूं और मुझे कभी महसूस नहीं हुआ कि मैं किसी और के घर में रह रहा हूं। वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में बी.कॉम की पढ़ाई कर रहे शरद मुंधरा का कहना है कि मैं यहां पर कभी भी अपने दोस्तों को बुला सकता हूं, अगर इससे मेरे रूममेट्स को कोई परेशानी न हो। यहां पर सभी कमरों में अटैच्ड बाथरूम और बालकनी है होटल स्टाइल हॉस्टल का ये बड़ा फायदा है। साथ ही रेजीडेंट्स को ये सुविधा भी दी गई है कि वह अपना कमरा अपने मन मुताबिक सजाएं। 

कपड़े धोने और सफाई की टेंशन नहीं
स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा राहत इस बात की है कि उन्हें कमरा साफ करने और कपड़े धोने की कोई टेंशन नहीं होती। वहीं इन सुविधाओं के लिए उन्हें अलग से चार्ज भी नहीं देना पड़ता। गे्रटर नोएडा के योर स्पेस में जिम और री-क्रिएशन एरिया भी है। साथ ही यहां स्टूडेंट्स को कॉलेज आने-जाने के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी दी जाती है।

आर्किटेक्चर की पढ़ाई के लिए मध्य प्रदेश से नोएडा आईं गंधर्वी राय योर स्पेस के हॉस्टल में ही रह रही हैं। वह कहती हैं कि यह हॉस्टल मेरे लिए लव एट फस्र्ट साइट जैसा था। लंच टाइम पर अगर स्टूडेंट्स कॉलेज में है तो लंच वहीं डिलिवर कर दिया जाता है। सबसे अच्छी बात है कि कपड़े धोने की टेंशन नहीं। 

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