Tuesday, Jan 23, 2018

बच्ची से यौन संबंधों का आरोप झेल रहा आरोपी हुआ बरी, कोर्ट में साबित नहीं हुआ जुर्म

  • Updated on 12/15/2017

नई दिल्ली/उमा मिश्रा। द्वारका कोर्ट की एक अदालत ने बच्ची से यौन संबंध बनाने और धमकी देने के आरोप में बंद एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत में पीड़ित पक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर पाया है। पीड़ित पक्ष की ओर से अनिल रबिदास पर झूठा आरोप लगाकर उसके खिलाफ नाबालिग बच्ची से यौन संबंध बनाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। पीड़ित पक्ष की ओर से 2016 में कापसहेड़ा थाने में मामला दर्ज कराया गया था।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग ने आरोप सिद्ध न होने के कारण आरोपी को बरी कर दिया है। नाबालिग की अभियोग पक्ष द्वारा जांच की गई, जिसमें यह बात सामने आई थी कि पीड़िता के साथ किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं हुआ है। 4 मई 2016 को हुए इस वारदात में पीड़िता जब घर में सो रही थी तो उसने महसूस किया था कि उसे किसी ने स्पर्श किया है, जो कि एक गलतफहमी का हिस्सा था।

दुबारा पूछताछ होने के बाद पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से इनकार कर दिया और साथ ही दोहराया कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत या फिर किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की है। नाबालिग बच्ची की उम्र उस वक्त मात्र आठ साल ही थी। कापसहेड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 4 मई 2016 को पीड़िता और उसकी दादी ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पीड़ित बच्ची का आरोप था कि आरोपी ने उसके साथ यौन संबंध बनाने और जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद पीड़िता और उसकी दादी ने स्थानीय पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 बी/ 506 और 10 पाक्सो एक्ट के तहत एफआईआर (139/2016) दर्ज करवाया था। 

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पुलिस ने उस वक्त नाबालिग पीड़िता के बयान 164 सीआरपीसी के तहत रिकार्ड भी करा दिए थे। आरोपी के द्वारा किए गए दंडनीय अपराध के मद्देनजर पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 10 पॉस्को एक्ट और 451/506 का मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोपी ने स्वयं को आरोपी न होने की वकालत नहीं की थी। पीड़ित कीजांच करने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग की अदालत ने आरोपी पर लगी धारा 313 को समाप्त कर दिया।

मां ने कर दिया रेप केस, कोर्ट ने किया बरी

वहीं ऐसा ही एक मामला और भी देखने को मिला जहां एक विशेष अदालत ने रेप के आरोपी शख्स को बरी कर दिया। जिसमें सबसे दिलचस्प बात यह रही  कि पीड़ित लड़की की मां ने अपनी बेटी के हैंडबैंग में इस्तेमाल किए हुए तीन कंडोम देखे थे। इसी के बाद उसने आरोपी के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया था। लेकिन इसमें  कोर्ट ने यह पाया कि लड़की और शख्स दोनों ने आपसी सहमति के साथ सेक्स संबंध बनाए थे।

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ऐसे में कोर्ट के मुताबिक लड़की ने संबंध बनाने के बाद इस इरादे से कंडोम को अपने बैग में रख लिया कि ताकि बाद में वह उसे किसी सही जगह पर फेंक दे। परंतु FIR में यह बताया गया कि आरोपी ने 20 साल की  लड़की के साथ शादी का वादा करके संबंध बनाए थे। लेकिन इस मामले में कोर्ट की तरफ से यह पाया गया कि रेप का ये केस इसलिए दर्ज कराया गया क्योंकि लड़की के मां - बाप को उसके शारीरिक संबंध के बारे में पूरी तरह से पता चल चुका था। इस पर कोर्ट ने यह पाया कि FIR दर्ज करने की असली वजह शादी के झूठे वादे से लड़की का दुखी होना नहीं था। बल्कि मामला पूरी तरह से उलटा था। 

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