Tuesday, Jan 23, 2018

देश के इस शहर में रोज होते हैं 5 से ज्यादा दुष्कर्म, अमेरिका ने भी जताई चिंता

  • Updated on 1/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।   भारत में हर दिन बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश की महिलाओं को सचेत करते हुए भारत यात्रा के दौरान सावधानी बरतने के लिए कहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो भी अमेरिकी नागरिक भारत जाता है उसे अपने लिए कुछ सावधानी बरतने की जरुरत है। 

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वहीं, दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के दावों के मुताबिक राजधानी के प्रत्येक थाने में जितने पद हैं उसके तहत एक तिहाई महिला पुलिसकर्मी की तैनाती होनी चाहिए। ये नियम भी है, लेकिन मौजूदा समय में केवल 72 थानों में ही इन मानकों का पालन है, जबकि अन्य थानों में महिलापुलिसकर्मियों की संख्या 4 से 10 प्रतिशत की ही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना था कि हर थाने में कम से कम 15-15 महिला पुलिसकर्मियों की संख्या हो जाएगी, लेकिन दावे सिफर साबित हुए। वर्तमान में थानों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 8-9 तक है। उसमें भी आधी मातृत्व व अन्य घरेलू कारणों से अवकाश पर रहती हैं। जिससे थानों के संचालन में भी दिक्कत होती है। 

डार्क स्पॉट किए गए चिन्हित, लेकिन उन्हें नहीं किया गया रोशन 

दिल्ली पुलिस और सरकार ने इन बीते पांच सालों में महिला सुरक्षा के नाम पर राजधानी में 200 ऐसे डॉक स्पॉट को चिन्हित किया, जहां महिलाओं के साथ कभी भी बड़ी वारदातें हो सकती हैं। इन डॉक स्पॉटों पर खुद पुलिस की दलील है अगर इलाका सुनसान है तो ये जगह महिलाओं के बेहद ही असुरक्षित है।
 

इस पर दिल्ली सरकार ने भी मंथन किया और दावा किया कि डॉर्क स्पॉट जल्द ही हटा दिए जाएंगे, लेकिन पंाच साल बीत गए, लेकिन अभी तक ये डार्क स्पॉट अभ्ज्ञी तक नहीं बदले। दूसरी तरफ सवाल है कि आखिर इन जगहों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने क्या किया? डार्क स्पॉट को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने क्या किया? केंद्र सरकार ने सुरक्षा बेहतर करने के लिए क्या किया? 

ये है दिल्ली के डार्क स्पॉट...

नंबर 1: बुद्धा गार्डन और रिज एरिया-शुक्रवार को कैब में यहीं रेप हुआ था। ये इलाका सुनसान और अंधेरे से घिरा है। 2003 में भी इसी इलाके में डीयू की एक छात्रा से रेप हुआ था।

नंबर 2: पालिका और सीपी-ये दिल्ली का दिल है फिर भी रात में महिलाओं के लिए ये इलाके बेहद असुरक्षित हैं। यहां पुलिस दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। जबकि आए दिन लड़कियों के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं होती रहती है। 

नंबर 3: बॉन्टा पार्क, यह जगह डीयू के करीब है। यहां लगातार छेड़छाड़ की वारदात होती रहती हैं लेकिन यहां अभी तक महिला थाना बनाने की तैयारी ही चल रही है। इस संबंध में कई बार पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी जा चुका है।

नंबर 4: संजय झील, मंडावली-इस इलाके में रोशनी का इंतजाम अच्छा नहीं है। यहां भी मर्डर-रेप की कई घटनाएं हो चुकी हैं। 2010 में रेप का विरोध करने पर लड़के को यहां चाकू मार दिया गया था।

नंबर 5: दिल्ली-नोएडा बॉर्डर-बॉर्डर का इलाका होने की वजह से पुलिस यहां एक-दूसरे पर मामला टालती है। यहां की कई सड़कें बेहद सुनसान और अंधेरी हैं। अपराधियों के लिए दिल्ली में जुर्म करके यूपी भागने के कई आसान रास्ते हैं यहां।

नंबर 6: नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज-इसी इलाके में 2009 में महिला पत्रकार सौ या की हत्या हुई थी। ये इलाका सुनसान है और रोशनी की सही व्यवस्था भी नहीं है जबकि यहां आसपास कई बड़े मॉल हैं।

नंबर 7: कैंट रोड, धौला कुआं-ये रिज इलाका है। रात में यहां सन्नाटा और अंधेरा रहता है। यहां भी अक्सर वारदात की खबरें आती हैं। यहां लगातार गश्त और लाइटिंग की जरूरत है।

नंबर 8: महरौली-गुडग़ांव रोड- ये रास्ता भी बेहद सुनसान है। सन्नाटे की वजह से आए दिन वारदात होती रहती हैं। दो राज्यों की सीमा होना भी इसकी एक वजह है।

नंबर 9: पालम रोड-महिलाओं के लिए असुरक्षित इस इलाके में भी लंबे समय से हालात सुधर नहीं रहे हैं।

नंबर 10: काटजू मार्ग, रोहिणी-इस इलाके में भी अक्सर वारदात होती रहती हैं। डार्क स्पॉट होने के बावजूद यहां सुधार के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे।

नंबर 11: कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रात में करीब 11:00 बजे के बाद अंधेरा छा जाता है। गत छह महीने से वह लाइट खराब है। रात के वक्त भी अति व्यस्त रहने वाले इस चौक पर अंधेरे का आलम यह था कि बस पकडऩे वाले यात्री सड़क पार करने के लिए वाहनों की लाइट का सहारा ले रहे थे। यहीं कारण है कि महिलाओं के साथ झपटमारी की घटनाएं यहां पर सबसे ज्यादा हैं।

नंबर 12: पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास वैसे तो आने-जाने वाले लोगों का ताला लगा हुआ रहता है। लेकिन उसके बावजूद भी दिल्ली पुलिस का एक भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आता है। ट्रेन पकडऩे जाने वाले यात्री अंधेरे में ही सफर तय कर रहे थे। उससे कुछ दूरी पर स्मैकिए नशा भी करते दिखे। यहीं कारण है कि आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस को मिलती रहती है। 

कर रहें हैं जॉब इंटरव्यू की तैयारी तो इन सवालों के जवाब रखें तैयार

दिल्ली में वर्ष 2017 में हुई दुष्कर्म की बड़ी घटनाएं 

- 14 मार्च 2017 पांडव नगर इलाके में नेपाली मूल की 30 साल की महिला के साथ गैंगरेप हुआ। महिला ने विरोध किया तो उसकी पिटाई की और उसके कपड़े उतार दिए। 

- 10 सितम्बर 2017 गांधी नगर के टैगोर पब्लिक स्कूल में 5 साल की बच्ची से चपरासी ने 
किया रेप 

- 15 नवम्बर 2017 पंजाबी बाग इलाके में 9 साल की बच्ची घर पर अकेली थी पड़ौसी ने किया दुष्कर्म 

- 14 नवम्बर 2017 अमन विहार इलाके में पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म की वारदात हुई। आरोपी कमरे में आया और बच्ची को चॉकलेट आदि देने के बहाने के अपने कमरे में लेकर चला गया। फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। 

- 11 नवम्बर 2017 हौजखास इलाके में डेढ़ साल की बच्ची के पिता के दोस्त ने दुष्कर्म किया। बच्ची को अकेला पाकर संतोष ने उससे दुष्कर्म किया। 

- 15 अप्रैल 2017  गांधी नगर इलाके में पांच साल की एक मासूम बच्ची के साथ उसी के घर के पास गैंगरेप हुआ था। गुम होने के करीब 40 घंटे बाद बच्ची उसी इलाके में बने एक किराए के घर में बुरी हालत में मिली थी।

- 12 अक्टूबर 2017  सुदरनगरी इलाके में सात वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। 

ये उठाए पुलिस ने कदम, लेकिन कितने हुए कारगर 

हिम्मत एप: इस एप से दावा है कि आपने पैनिक बटन दबाया तो 3 मिनट में पुलिस आपके पास। लेकिन शायद ये सच नहीं है तभी इस एप को महज 1 लाख से भी कम महिलाओं से यूज किया और बाद में उसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। दूसरी तरफ पुलिस ने इसे प्रमोट करने के लिए तीन बार इसमें बदलाव भी किया,लेकिन ये सफल नहीं हुआ। मौजूदा समय में ये हिंदी सहित कई अन्य भाषाओं को भी शामिल किया गया है। 

सशक्ति कार्यक्रम के तहत दिए जाते हैं आत्मरक्षा के प्रशिक्षण

दिल्ली पुलिस ने महिलाओं को शारीरिक रूप से खुद सशक्त बनाने के लिए एक सशक्ति नामक एक अभियान शुरू किया है। इसमें दिल्ली पुलिस के आत्मरक्षा तकनीक में प्रशिक्षित कर्मी महिलाओं के साथ ही स्कूलों में लड़कियों को आत्मरक्षा के तकनीकों का प्रशिक्षण देते हैं। इसमें उन्हें ऐसे तकनीक सिखाए जाते हैं, जिसके माध्यम से विपरीत परिस्थिति में वे अपनी रखा करने के साथ ही सामने वाले पर भरपूर प्रहार भी कर सकें। प्रशिक्षण में लड़कियों को अपने पास स्थित दुपट्टा, बैग, पहले हुए जूते आदि का रक्षा और हमला में कारगर तरीके से उपयोग भी बताया जाता है। इसके तहत वर्ष 2017 तक कुल 7 लाख 71 हजार 443 महिलाओं और लड़कियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। 

ऑपरेशन शिष्टाचार : पुलिस ने इसके अलावा एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने के साथ ही ऑपरेशन शिष्टाचार नामक अभियान चला रही है। इसमें पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध स्थिति में पकड़े गए युवकों को पुलिस गिरफ्तार नहीं करती बल्कि उन्हें हिरासत में लेकर उनका काउंसङ्क्षलग करती है। इसमें पुलिस अधिकारी के साथ ही इलाके के गणमान्य लोग भी होते हैं। जो युवाओं को सीख देते हैं। इसके माध्यम से युवा भी अपनी बात सीधे रूप से पुलिस अधिकारी तक पहुंचा पाते हैं। 

स्कूल कॉलेजों में लगाए गए हैं निर्भीक बॉक्स : किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, यौन उत्पीडऩ जैसी घटना के होने पर भी ज्यादातर महिलाएं और लड़कियां बदनामी और शर्म के कारण सीधे रूप से पुलिस के पास पहुंच शिकायत नहीं करती। इससे ऐसे लोगों का हौसला और बढ़ जाता है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने निर्भीक नाम से स्कूलों और कॉलेजों के साथ ही कुछ सार्वजनिक स्थानों पर बॉक्स लगाए हैं। इसमें पीड़िता बिना अपनी पहचान बताए अपनी समस्या लिखकर डाल सकते हैं। ताकि पुलिस उसपर कार्रवाई कर सके। 

हर थाने में महिला हेल्प डेस्क : किसी समस्या को लेकर थाना पहुंची महिला किसी पुरुष पुलिस अधिकारी से खुल कर बातचीत कर पाती थी। इसे देखते हुए हर थाने में एक अलग महिला हेल्प डेस्क ही बना दिया गया। यहां नियमित रूप से 24 घंटे महिला पुलिस कर्मी की नियुक्ति होती है। कोई भी महिला अपनी समस्या को लेकर सीधे उनसे संपर्क कर 
सकती है। 

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महिलाओं के लिए पिंक टैक्सी सेवा :अकेली रहने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ ही महिलाओं के सफर के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से पिंक टेक्सी सेवा की शुरुआत की थी। इसमें उन महिलाओं का चयन किया गया था जो पति से अलग या विधवा या अन्य किसी कारणों अकेली रहती हो और उस पर परिवार का बोझ हो। ऐसी महिलाओं पहले टैक्सी चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। साथ ही विशेष सहायता दे टैक्सी उपलब्ध कराई गई थी। पिंक रंग की ये टैक्सियां सुरक्षा के कई विशेष तकनीकों से लैस होती है। 

‘छह महीने में मिले बलात्कारियों को मौत की सजा’

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने निर्भयाकांड के पांचवीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख यह मांग की है कि छोटी बच्चियों से बलात्कार करने वाले आरोपियों को छह महीने के अंदर सजा ए मौत की सजा दी जाएं। पत्र ने स्वाति ने यह भी लिखा है कि पूरे विश्व में दिल्ली को रेप कैपिटल के नाम से जाना जाता है, इस छवि को दूर करने की जरुरत है और यह तभी हो सकता, जब आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले।

स्वाति ने लिखा है कि दिल्ली में 11 महीने की बच्चियों तक से रेप होता है। हर दिन दिल्ली में औसतन 3 बच्चियां रेप की शिकार होती हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि 2012 से लेकर 2014 तक महिलाओं के साथ 31,446 अपराध दर्ज किए गए और उनमें से केवल 150 मामलों में ही सजाएं हुई।

निर्भया बलात्कार कांड को हुए पांच साल बीत गए, लेकिन देश में आज कुछ नहीं बदला है। दिल्ली पुलिस में करीब 66,000 पुलिस कर्मियों की जरूरत है। इसके साथ ही दिल्ली में फास्ट ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ाने की है जरूरत है। स्वाति ने लिखा है कि भारत सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को निर्भया फंड का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। सरकार इसमे पूरी तरह से फेल हो चुकी है। 

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