MCD की लापरवाही से जाम हो रहा बॉर्डर, दोनों मुख्यमंत्रियों को बात करने की जरूरत

Navodayatimesनई दिल्ली/मनोज। दिल्ली सरकार और हरियाणा सरकार के बीच आपसी सामंजस्य स्थापित न होने का दंश दिल्ली-गुडग़ांव एक्सप्रेस-वे पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। जागरुक लोगों का कहना है कि दिल्ली-गुडग़ांव बॉर्डर स्थित सरहौल टोल प्लाजा को बंद करा कर यात्रियों को जाम से मुक्ति दिलाने का जो स्वप्न देखा गया था वह आज भी पूरा होते इसलिए नहीं दिख रहा है कि अभी भी बॉर्डर पर प्रतिदिन हाई-वे से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को पिक ऑवर में शाम से देर रात तक भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है।

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इसका कारण यह है दिल्ली नगर निगम का टोल न भुगतान करने वाले प्राइवेट वाहनों की चेकिंग के लिए एमसीडी के बाउंसर टोल कि सीमा के बाद रात को हाई-वे पर खड़े हो जाते हैं और वाहनों की चेकिंग करने लगते हैं। इस दौरान टोल पर लंबा जाम लग जाता है और लोगों को कई घंटे का समय एकमात्र बॉर्डर को पार करने में ही गंवाना पड़ता है। विडंबना तो यह है कि जिस समय एमसीडी टोलकर्मी बॉर्डर पर जांच करते हैं, उसी समय ट्रैफिक पुलिस भी दिल्ली की सीमा में हाईवे पर अनाधिकृत वाहनों की चेकिंग करती है।

इसके कारण लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बुधवार को मध्य रात्रि में दिल्ली गुडग़ांव बॉर्डर पर देखने को मिला। शाम 7 बजे से ही लगा जाम मध्य रात्रि के बाद तक चलता रहा। यात्री हाई-वे पर टोल के पास एमसीडी के बाउंसर खड़े थे और इसके बाद हाई-वे पर ही यातायात पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसके कारण हाई-वे काफ समय तक जाम रहा और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। 

दोनों मुख्यमंत्रियों को वार्ता करने की जरूरत

लोगों का कहना है कि दिल्ली-गुडग़ांव एक्सप्रेस-वे पर सरहौल टोल के पास लग रहे जाम की समस्या को दूर करने के लिए और टोल की चेकिंग तथा यातायात पुलिस की चेकिंग के लिए कोई निर्बाध योजना बनाने को लेकर दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक में इसके सही विकल्प की तलाश करने की जरुरत है।  

लोगों का कहना है कि हाइवे पर लग रहे जाम को नियंत्रित करने के लिए अब तक दिल्ली और हरियाणा सरकार ने आपस में सामंजस्य स्थापित कर कोई बातचीत नहीं की जबकि अगर जाम से गुरुग्राम और हरियाणा की जनता प्रभावित होती है तो हरियाणा के मुख्यमंत्री का यह दायित्व बनता है कि समस्या को दूर करने के लिए वह दिल्ली सरकार से बात करें और अगर जाम की समस्या से दिल्ली की जनता प्रभावित होती है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वह हरियाणा सरकार से बात करें, लेकिन दुर्भाग्य है कि ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है और इसके कारण आम जनता को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। 
 

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