जानें, तुलसी के पत्ते के बिना क्यों अधूरा होता है भगवान का भोग

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। इस देश में अधिकतर लोगों की सुबह बिना भगवान की पूजा किये हुए नही शुरू होती है। पूजा करने के बाद घर में भगवान को प्रसाद भी जरूर चढ़ाते है।

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श्रीमद भगवत गीता में प्रसाद चढ़ाने के पीछे एक वजह है। श्रीमद भगवात गीता में भगवान श्री कृष्ण मे स्वयं कहा कि कोई भी भक्त यदि प्रेम से मुझे फल, फूल या अन्न चढ़ाता है तो उसे मै जरूर ग्रहण करता हूं तो भगवान की पूजा करने के बाद उनका भोग लगाना कभी न भूलें क्योंकि भगवान को भोग कृतज्ञता प्रकट करने के लिए लगाया जाता है। इसके साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि भोग लगाने के बाद जो अन्न किया जाता है वह दिव्य हो जाता है। 

आपको बता दें कि भगवान को भोग लगाते समय याद रखें कि बिना तुलसी दल के भोग न लगायें क्योंकि बिना तुलसी दल के भोग लगाने से भोग पूरा नहीं होता है। वैसे सका एक कारण तो तुलसी को औषधीय गुण है । शायद ही आपको पता हो कि तुलसी में यह गुणवत्ता है कि तुलसी को एक ही पत्ता रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर है। इसका मतलब तुलसी एक एंटीबाॅयोटिक है।

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इसके अलावा तुलसी स्वस्थ्य के लिए  भी लाभदायक है। तुलसी के पौधा मलेरिया के किटाणु को भी खत्म करता है। 
यहां तक की तुलसी के स्पर्श मात्र से ही रोग दूर हो जाते है।  वही तुलसी पर किए गए प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है, कि ब्लड प्रेशर और डायजेशन में संतुलन रखने के इलावा यह मानसिक रोगों के लिए भी लाभकारी है।

इसलिए कहते है कि भगवान का भोग लगाने के बाद तुलसी उालकर प्रसाद को ग्रहण करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी पत्ता डालकर भगवान को प्रसाद चढ़ाने से घर को अन्न का भंडार हमेशा भरा होता है। इससे घर मे कभी कमी नही आती है और जीवन खुशहाल रहता है।
 

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