अमोल जाधव भारत में ही तैयार करेगा 6 और 20 सीटों वाले विमान

Navodayatimesमहाराष्ट्र के चारकोप नगर में रहने वाले पायलट अमोल जाधव ने अपने फ्लैट की छत  पर  6 सीटों वाला एक विमान तैयार किया है। उन्हें गत वर्ष मुम्बई में आयोजित ‘मेक इन इंडिया’  सप्ताह दौरान अपनी यह कृति प्रदर्शित करने का मौका मिला था। अब उन्हें महाराष्ट्र के पालघर जिले में राज्य सरकार द्वारा उद्यम स्थापित करने के लिए 157 एकड़ भूमि का आबंटन किया गया है।

जाधव भारत में 6 सीटों और 20  सीटों  वाले  विमान ‘थ्रस्ट इंडिया कम्पनी’ के नाम तले तैयार करना चाहते हैं।
जैट एयरवेज के 41 वर्षीय डिप्टी चीफ पायलट जाधव ने गत दिनों मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस से मुलाकात की। इस मौके पर उनके साथ उन कम्पनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे जो विमानों के इंजन तथा अन्य प्रकार की टैक्नोलॉजी तैयार करने की विशेषज्ञता रखती हैं। 

जाधव 1975 में प्रशिक्षण लेने के लिए अमरीका गए थे और वहां उन्होंने देखा कि ढेर सारे मध्यवर्गीय परिवारों के लोग ग्राहकों की विशिष्ट जरूरतों  के अनुसार अपने घरों में ही विमान असैंबल किया करते थे। इसे देखकर उनके दिमाग में यह विचार आया कि भारत में भी ऐसा क्यों न किया जाए। इसलिए स्वदेश लौटकर उन्होंने चारकोप स्थित अपने घर में ही 6 वर्षों की कठिन मेहनत के बाद विमान असैंबल किया।

यह विमान प्रति मिनट 1500 फुट की दर से ऊंचा उठता हुआ 13000 फुट की ऊंचाई तक जा सकता है और 185 नॉटीकल माइल्ज की गति से लगातार 2000 किलोमीटर का सफर तय कर सकता है। इस समय यह विमान महाराष्ट्र के धूले हवाई अड्डे पर पार्क किया हुआ है। सरकार की ओर से उन्हें मिल रहा समर्थन किसी सपने के साकार होने जैसा है। 

मोदी सरकार क्षेत्रीय हवाई कनैक्टिविटी में वृद्धि करना चाहती है। जाधव मानते हैं कि जब तक विमान भारत के अंदर निर्मित नहीं किए जाते  सरकार की यह योजना पूरी नहीं हो सकती। वह कहते हैं कि भारत में छोटे विमानों का विनिर्माण शुरू होने से विमानन क्षेत्र में एक क्रांति आ जाएगी।

फड़णवीस ने मीडिया को बताया कि सरकार जाधव को हर संभव सहायता देगी। इसी योजना के अंतर्गत पालघर के जिला कलैक्टर अभिजीत बांगड़ को मुख्यमंत्री की जाधव के  साथ होने वाली मीटिंग में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। इस  मीटिंग   में  नागर विमानन महानिदेशालय के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। 

अपने इस सपने को साकार करने के संबंध में जाधव ने बताया कि उनके लिए वित्त पोषण की व्यवस्था करना सचमुच बहुत बड़ी चुनौती था क्योंकि केवल एक ही 6 सीटर विमान तैयार करने पर उन्हें कुछ करोड़ रुपए खर्च करने पड़े और 6 एवं 20 सीट वाले विमान की फैक्टरी पर तो निश्चय ही बहुत खर्चा आएगा। फिर भी उन्हें बहुत उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक सरकारी समर्थन से वह अपनी परियोजना का आधारभूत ढांचा खड़ा कर लेंगे।  

    (मु.मि.)

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