सीरिया के हमले के जवाब में कार्रवाई करके ट्रम्प ने अपनी स्थिति सुधारी

Navodayatimes2013 में जब बशर अल असद ने अपने ही लोगों का विद्रोह दबाने के लिए पहली बार उन पर रासायनिक हमला किया था, तब अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरिया की इस कार्रवाई पर सक्रिय प्रतिक्रिया देने से संकोच किया था। इसके बाद धीरे-धीरे सीरिया की समस्या के मामले में अमरीका का प्रभाव और शक्ति घटती गई। 

इसके परिणामस्वरूप रूस को उसके सैनिक संरक्षक के रूप में आगे आने और सीरिया के हवाई क्षेत्र की गश्त करने का अवसर मिल गया जबकि ईरान हथियारों की सप्लाई और हिजबुला की मार्फत श्री असद का जमीन पर संरक्षक बन गया जहां अमरीका द्वारा प्रशिक्षित कुर्द सेनाओं को आई.एस.आई.एस. का चारा बनने के लिए छोड़ दिया गया, वहीं रूस ने न सिर्फ सीरिया के विद्रोहग्रस्त इलाकों में बम वर्षा का जिम्मा संभाल लिया, बल्कि इसने सख्ती के साथ असद का समर्थन शुरू कर दिया और रूस तथा ईरान के बीच गठबंधन में तुर्की तीसरा स्तंभ बन गया। 

इस परिप्रेक्ष्य में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने कूटनीतिक दृष्टि से मजबूत स्थिति में पलटवार करने की बहुत कम गुंजाइश थी और इसी कारण वह रूस के यूक्रेन पर कब्जे को अपनी मान्यता दे प्रतिबंधों की समाप्ति का अनुमोदन करके सीरिया में रूस के साथ कुछ सहमति कायम करना चाहते थे। 

इससे पुतिन को अपने देश में न सिर्फ एक हीरो का दर्जा प्राप्त हो जाता बल्कि अमरीका-यूरोप गठबंधन भी लुप्त हो जाता। मध्य-पूर्व में अपनी पोजीशन को बहाल करने के दूसरे उपाय के रूप में ट्रम्प ईरान और तुर्की के साथ संबंध सामान्य करने पर विचार कर रहे थे लेकिन इससे भी अमरीका को वह स्थिति प्राप्त न होती, जो ट्रम्प ने वीरवार को सीरिया पर जवाबी मिसाइल हमले के फैसले और तत्संबंधी कार्रवाई से कायम कर ली है। 

बेशक अमरीका की इस कार्रवाई से असद और रूस अपने ही जाल में फंस गए हैं, अब असद अपने ही लोगों को और उत्पीड़ित नहीं कर सकेगा और रूस भी पूर्वी यूरोप को जीतने की अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को फलीभूत नहीं कर सकेगा लेकिन इस  घटनाक्रम का  प्रभाव सीरियाई लोगों से अधिक अमरीकी लोगों पर देखा जा सकता है। यह कुछ-कुछ ऐसा ही है, जैसे डोनाल्ड ट्रम्प के ‘अच्छे दिन’ शुरू हो गए हैं। 

डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 49 वर्षीय गोर्सच की नियुक्ति की अमरीकी सीनेट ने पुष्टि कर दी है। यह सीनेट के समक्ष ट्रम्प की पहली विजय है।  

लेकिन ट्रम्प के लिए दूसरा अनसुलझा मोर्चा था, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर वार्ता। उस समय जब मिसाइल फैंकने की तैयारी की जा रही थी, ट्रम्प और शी डिनर पर बैठे थे। हमले की घोषणा के बाद शी जिनपिंग कठिन स्थिति में फंस गए। यकीनन उन्हें ट्रम्प के चुनावी भाषणों का महत्व समझ आ गया होगा जिनमें ट्रम्प ने चीन को उत्तर कोरिया के न्यूक्लीयर प्रोग्राम को रोकने की बात कही थी और यदि चीन सहयोग न दे तो अमरीका अकेले ही उत्तर कोरिया पर हमला कर देगा। इस संदर्भ में ट्रम्प ने अपना समुद्री बेड़ा कोरिया की तरफ रवाना कर दिया है।

याद रहे कि चीन उत्तरी कोरिया की अर्थव्यवस्था को कायम रखने के लिए उसकी जरूरत का लगभग समूचा तेल सप्लाई करता है और उत्तरी कोरिया का 90 प्रतिशत व्यापार चीन के रास्ते होता है, इसलिए वह नहीं चाहता कि दक्षिण-पूर्व एशिया में महत्व प्राप्त करने के लिए दक्षिण कोरिया अमरीका का समर्थन करे। 

हालांकि शी चीनी लोगों को अक्सर यह कहते हैं कि ट्रम्प चीन के लिए अच्छे नहीं हैं, लेकिन सीरियाई हमले ने एकाएक डोनाल्ड ट्रम्प का पलड़ा भारी कर दिया है। 

जहां तक ट्रम्प का संबंध है, बहुत कुछ निर्णायक ढंग से नहीं कहा जा सकता लेकिन मौजूदा दौर में उन्होंने दक्षिण-पूर्व, अमरीका-एशिया, अमरीका-यूरोप और अमरीका-चीन संबंधों के मामले में बढ़त हासिल कर ली है और अचानक वह एक अनुकूल स्थिति में पहुंच गए हैं।

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