राजधानी के पार्क बने नशेडिय़ों, बलात्कारियों व अन्य अपराधियों के अड्डे

Navodayatimesपार्क और उद्यान लोगों के मनोरंजन तथा सैर-सपाटे के लिए होते हैं जहां चहलकदमी करके या प्रकृति के सान्निध्य में कुछ समय बिताकर लोग अपने तन-मन को स्वस्थ और ताजा दम कर सकें परंतु दिल्ली के पार्क इसके सर्वथा विपरीत सिद्ध हो रहे हैं। 

यहां बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के साथ-साथ चोरी, स्नैचिंग आदि घटनाएं लगातार होने के कारण ये पार्क न सिर्फ लोगों के लिए पूर्णत: असुरक्षित बल्कि अपराधियों और नशेडिय़ों के अड्डे और शरणस्थली बन कर रह गए हैं जो चंद निम्र घटनाओं से स्पष्टï है : 

- 02 मई, 2016 को राजधानी के प्रसिद्ध ‘जापानी पार्क’ में जब दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने कुछ गुंडों को लड़कियों से छेड़छाड़ करने से रोका तो उन्होंने पुलिस अधिकारी को ही बुरी तरह पीट डाला।

-12 मई को उत्तरी दिल्ली के ‘बौंता पार्क’ में एक व्यापारी ने अपनी भूतपूर्व गर्लफ्रैंड द्वारा विवाह का प्रस्ताव ठुकराने पर उसे गोली मार दी। 

- 09 अगस्त को ‘प्रशांत विहार पार्क’ में अपने पति के साथ सैर कर रही बुजुर्ग महिला का कुछ बदमाशों ने गला रेत डाला और उसके पति पर भी छुरे से अनेक वार करके उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।

- 22 अगस्त को ‘यमुना खादर’ के निकट एक पार्क में 3 युवकों ने एक 7 वर्षीय बच्ची से अपहरण के बाद बलात्कार कर डाला।  

-03 सितम्बर को विकासपुरी के निकट डी.डी.ए. पार्क में एक 10 महीने की बच्ची से बलात्कार किया गया। यह बच्ची बाद में झाडिय़ों में पड़ी मिली।

-16 सितम्बर को 17 और 18 वर्ष की दो लड़कियों से ‘अमन विहार’ पार्क के निकट 5 युवकों ने गैंग रेप किया और युवतियों के साथियों द्वारा विरोध करने पर उन्हें बुरी तरह पीटा। 

-14 फरवरी 2017 रात को रोहिणी के प्रशांत विहार इलाके में स्थित प्रसिद्ध ‘जापानी पार्क’ में 2 युवकों की छुरों से ताबड़तोड़ वार करके हत्या कर दी गई। 

-19 फरवरी को दक्षिण दिल्ली में हौज खास के निकट ‘डियर पार्क’ में एक व्यक्ति ने 26 वर्षीय महिला से बलात्कार करने के अलावा उसका ‘आई फोन’ तथा रुपए-पैसे लूट लिए। 

- और अब 5 अप्रैल शाम को उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में स्थित अशोक विहार  में डी.डी.ए. के पार्क ‘पिकनिक हट’ में बदमाशों ने 45 वर्षीय पत्रकार अपर्णा कालरा पर हमला करके उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। अपर्णा के शरीर पर अनेक घाव आए तथा उनकी दिमाग की नाडिय़ों को भारी क्षति पहुंची। 

ये तो वे समाचार हैं जिनकी रिपोर्ट दर्ज हुई जबकि इनके अलावा भी अनेक घटनाएं हुई होंगी जिनकी पीड़ितों ने रिपोर्ट ही दर्ज नहीं करवाई होगी। ऐसी घटनाओं से राजधानी के पार्कों में लोगों की सुरक्षा के लिए मंडरा रहा खतरा तथा पार्कों में प्रशासन द्वारा सुरक्षा प्रबंधों की त्रुटियां लगातार उजागर हो रही हैं। 

राजधानी में लगभग सभी पार्क अधूरी सुरक्षा व्यवस्था का शिकार हैं तथा नशेडिय़ों, बलात्कारियों एवं अन्य आपराधिक तत्वों का अड्डïा बन कर रह गए हैं। अधिकांश पार्कों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है। इसी कारण अब इन पार्कों में आने वाले लोगों तथा पार्कों के सुरक्षा कर्मचारियों की भी कोशिश होती है कि वे शाम 6 बजे तक यहां से चले जाएं। 
हालांकि पुलिस यह कहती है कि पार्कों में रूटीन गश्त की जाती है लेकिन लोगों का कहना है कि पुलिस कर्मचारी शायद ही कभी पार्कों के भीतर निगरानी करने के लिए जाते हों। 

जापानी पार्क तथा अन्य पार्कों के मालियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को पार्क में आने से रोकने का मतलब है मुसीबत को बुलावा देना और मार खाना तथा  न जाने कितनी बार अपराधी तत्व आकर उन्हें पीट चुके हैं। इसीलिए अधिकांश पार्कों में तैनात सुरक्षा कर्मचारी वहां काम नहीं करना चाहते और पार्क के प्रबंधकों से उन्हें किसी अन्य स्थान पर तैनात करने की गुहार लगा रहे हैं।  

कुल मिलाकर दिल्ली के पार्क आज लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र न रह कर भय और दहशत का पर्याय बनते जा रहे हैं। लोगों के मन में व्याप्त असुरक्षा की भावना दूर करने के लिए राजधानी के पार्कों में सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करना और आधारभूत कमियां दूर करने की तत्काल 
आवश्यकता है।   

 —विजय कुमार 

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