बिहार के भ्रष्ट ‘अफसर शाह व राजनीतिज्ञ’ की संपत्ति 20 साल बाद जब्त

Navodayatimesआज देश में भ्रष्टाचार जोरों पर है तथा हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के भ्रष्टाचार व अवैध सम्पत्ति जमा करने के समाचार न आते हों। 

इसी शृंखला में बिहार सरकार ने भ्रष्टï अफसरशाहों की सम्पत्ति जब्त करने के लिए ‘बिहार विशेष न्यायालय कानून 2009’ बनाया था। इसमें आरोपी के निर्दोष सिद्ध होने पर सम्पत्ति ब्याज सहित लौटाने की व्यवस्था भी है। 

इस कानून के अंतर्गत सबसे पहले बिहार के पूर्व सिंचाई सचिव एस.एस. वर्मा की पटना स्थित 1 करोड़ 40 लाख रुपए मूल्य की अवैध सम्पत्ति जब्त की गई और वहां अब एक स्कूल चल रहा है। 

इसके अलावा अभी तक बिहार में 53 अफसरशाहों के विरुद्ध अवैध सम्पत्ति के मामले में केस दर्ज करके 22 मामलों में 17.5 करोड़ रुपए मूल्य की सम्पत्ति जब्त की गई है। 

 नवीनतम मामले में बिहार सरकार ने पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्रर तथा पूर्व भाजपा विधायक ‘सोने लाल हैम्ब्रम’ द्वारा 1972 से 1997 के दौरान उक्त पद पर रहते हुए बनाई 7 करोड़ रुपए की अवैध सम्पत्ति को उसके 2009 में रिटायर होने के 8 वर्ष बाद जब्त करने के आदेश जारी किए हैं। 

इस कानून के अंतर्गत अफसरशाह से राजनीतिज्ञ बने किसी व्यक्ति की सम्पत्ति जब्त किए जाने का यह पहला मौका है। 
भ्रष्टï कर्मचारियों और अफसरशाहों ने भ्रष्टï तरीके अपना कर न जाने कितनी अवैध सम्पत्ति जमा कर रखी होगी, अत: इस कार्रवाई को जहां तेज करने की जरूरत है वहीं अन्य राज्यों को भी ऐसे कानूनी प्रावधान करके भ्रष्टï अफसरशाही पर नकेल डालने की दिशा में पग उठाना चाहिए। 

कौन नहीं जानता कि आज राजनीतिज्ञों के साथ-साथ अफसरशाही के भ्रष्टïाचार की विषैली जड़ें बहुत गहराई तक पहुंच चुकी हैं और यदि इसे कठोर दंड प्रावधान द्वारा नष्टï न किया गया तो यह समस्या और भी बढ़ते-बढ़ते एक नासूर का रूप धारण कर लेगी।                

 —विजय कुमार

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