विकासशील प्रवृत्ति के स्वामी थे महाराजा हरि सिंह

Navodayatimesकश्मीर के डोगरा शासन  के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह का जन्म 23 सितम्बर 1895 को अमर महल  मुबारक मंडी जम्मू में राजा अमर सिंह के घर हुआ। उनसे पहले जिन महाराजाओं ने जम्मू-कश्मीर में शासन किया वे निम्रलिखित हैं : 
1. महाराजा गुलाब सिंह 1822-1856, 2. महाराजा रणबीर सिंह 1856-1885, 3. महाराजा प्रताप सिंह 1885-1925, 4. महाराजा हरि सिंह 1925-1947 तक। 

महाराजा हरि सिंह  के राज्याभिषेक के समय जम्मू-कश्मीर राज्य में लद्दाख, तिब्बत, गिलगित, स्कर्दू क्षेत्र शामिल थे। राज्य की सीमाएं चीन, रूस और अफगानिस्तान से लगती थीं। महाराजा हरि सिंह की शादी तारा देवी के साथ 1928 में हुई और युवराज कर्ण सिंह का जन्म 9 मार्च 1931 को हुआ। 

महाराजा हरि सिंह के शासनकाल में कार्य : महाराजा हरि सिंह ने सदियों से दबी-कुचली निम्र कहलाई जाने वाली जातियों के लिए मंदिरों के दरवाजे खोल दिए। महारानी तारा देवी के साथ निम्र जातियों के लोगों के साथ मंदिरों में प्रवेश करके छुआछूत का खात्मा करने का कानून पास कर दिया।  इन सभी को कुंओं से पानी भरने का अधिकार भी दिया और समानता, बराबरी और भाईचारे की मिसालें पेश कीं। 

उन्होंने किसानों को कृषि भूमि स्वामित्व के अधिकार दिए जाने के कानून बनाए। जनता की भलाई और कल्याण के लिए स्कॉलरशिप बोर्ड इत्यादि की स्थापना की। हाईकोर्ट जम्मू-कश्मीर की स्थापना का आदेश दिया और मुख्य न्यायाधीश  श्री कंवर सेन ने बार एट लॉ को 1750 रुपए मासिक वेतन राय बहादुर बोधराज साहनी बी.ए., बार एट लॉ, जज हाईकोर्ट वेतन 1500 रुपए मासिक, खान साहिब आगा सैयद हुसैन जज हाईकोर्ट कम रेवेन्यू कमिश्नर वेतन 1500 रुपए मासिक की नियुक्ति का आदेश दिनांक 26 मार्च 1928 कैम्प अखनूर में दिया। इसके अलावा   पब्लिक सॢवस कमीशन की भी स्थापना की। 

उन्होंने खेत में खुद हल चलाकर राजपूत बिरादरी को खेतीबाड़ी करने की प्रेरणा दी, बच्चों की शादी और सती प्रथा व बेटी की हत्या पर कानूनी रोक लगा दी। 1931 में ब्रिटिश सरकार की तरफ से करवाई गई गोलमेज कांफ्रैंस में भारत के अन्य महाराजाओं, राजाओं और नवाबों ने सम्मिलित होकर भारत  की  आजादी की आवाज उठाई। जनता को शिक्षित बनाने के लिए राज्य के दोनों भागों जम्मू व कश्मीर में कालेज व स्कूल खुलवाए। चिनाब नदी पर अखनूर में जनता की सुविधा के लिए पुल  बनवाकर कर्ण ब्रिज नाम रखा। 

प्रजा सभा के नाम से विधानसभा  स्थापित की जिसके सरकार के नामित सदस्यों की संख्या 36 थी और 34 जनता के प्रतिनिधि थे जिनमें से 4 प्रतिनिधियों को अपनी सरकार में मंत्री के तौर पर  उन्होंने शामिल किया। 

चिनाब नदी से निकाली रणबीर नहर के पानी से जम्मू में बिजली पैदा की। कश्मीर में रेकाम फैक्टरियों की स्थापना की। रणबीर सिंहपुरा में शूगर मिल लगाई और जम्मू तवी पर गाडिय़ों के आने-जाने के लिए पुल बनवाया। महाराजा गुलाब सिंह के नाम से जम्मू व श्रीनगर में बड़े अस्पताल बनवाए। जम्मू व कश्मीर में रेडियो स्टेशन स्थापित करवाए। जम्मू-कश्मीर बैंक की स्थापना की। विकासशील  प्रवृत्ति के स्वामी महाराजा हरि सिंह ने अपने शासनकाल में जन कल्याण के प्रशंसनीय काम किए। 

1947 में जम्मू-कश्मीर राज्य के भारतीय संघ में विलय के बाद अपने जीवन के अंतिम दिन महाराजा हरि सिंह ने मुम्बई में गुजारे। महाराजा हरि सिंह के जीवन का सबसे श्रेष्ठ कार्य वह था जो उन्होंने अंतिम समय में किया। अपने शासन के मुख्यमंत्री लाला हरचंद महाजन की प्रेरणा से लिखी वसीयत के मुताबिक अपनी जायदाद का अधिकांश हिस्सा आर्य समाज के नाम डी.ए.वी. शिक्षण संस्थाओं को दान में दे दिया। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

FacebookGoogle+TwitterPinterestredditDigglinkedinAddthisTumblr

ताज़ा खबरें