पार्वती परियोजना में रिसाव की होगी जांच

Navodayatimesनई दिल्ली/बुद्धि सिंह। पार्वती परियोजना-2 से हुए रिसाव को एक सप्ताह का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक एन.एच.पी.सी. के पास रिसाव के सही कारणों का जवाब नहीं है। रिसाव के लगातार बढऩे तथा अनेक स्थानों पर रिसाव के चलते भू-स्खलन से रैला पंचायत के आधा दर्जन गांवों को पैदा हुए खतरे से परियोजना की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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परियोजना प्रबंधन ने रिसाव के कारणों का पता लगाने की कवायद अब तेज कर दी है तथा एन.एच.पी.सी. ने अपने मुख्यालय से विशेष टीम को पार्वती परियोजना के लिए रवाना कर दिया है। वीरवार तक पूरी टनल का पानी खाली हो जाने पर विशेष इंजीनियरों की यह टीम 1500 मीटर लम्बी टनल में जाकर रिसाव के कारणों को समझने की कोशिश करेगी।

 परियोजना प्रबंधकों का अनुमान है कि प्रैशर टनल में कई  स्थानों पर जमीन के पानी को टनल में आने के लिए रखे गए छेदों से भी रिसाव हो सकता है । माना जा रहा है कि टनल निर्माण के दौरान आसपास के जो जलस्रोत टनल में जुड़ गए थे अब टनल भर जाने पर वापस अपनी जगह निकल सकते हैं इसलिए गांव के समीप टनल में रखे छेदों को बंद कर रिसाव के जलस्तर पर भी अध्ययन हो सकता है।

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टनल निर्माण के दौरान लोहे की पाइपें लगाने वाली कम्पनी को भी बुलाया गया है।  उधर, रिसाव के कारण शिफ्ट किए गए भाईवल व राईण के ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीणों खेवा राम, राम सिंह, पृथ्वी सिंह, दिले राम व शीला देवी ने बताया कि उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है।

ग्रामीणों को हो रही परेशानी के लिए एन.एच.पी.सी. को भी खेद है। उन्हें घबराने की आवश्यक्ता नहीं है। प्रभावितों को हर प्रकार की सहायता देने को हम बचनबद्ध हैं। रिसाव के कारणों व उचित समाधान के लिए मुख्यालय से विशेष टीम निकल पड़ी है तथा जल्द बेहतर परिणाम सामने होंगे।
-- -ए.के. सिंह, महाप्रबंधक पार्वती परियोजना चरण

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