धूमल के खिलाफ 16 के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी! 

Navodayatimesनई दिल्ली/ब्यूरो।  राज्य सरकार के निर्देश पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल और उनके परिवार की संपत्ति की जांच और तेज हो गई है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी की एक टीम पंजाब तो दूसरी ऊना भेजी गई है। पहले भी एक टीम पंजाब भेजी गई थी, लेकिन इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा जा रहा है। सरकार ने विजीलैंस को संपत्ति होने के पुख्ता सुबूत जुटाने को कहा है। इससे यह टीम भी दबाव में कार्य कर रही है।

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 विजीलैंस से जुड़े पुख्ता सूत्रों का कहना है कि 16 अप्रैल के बाद कभी भी बड़ी कार्रवाई संभव है। चुनावी साल में सरकार पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कर सकती है। सारी तैयारियां इसी सिलसिले में हो रही हैं। पूरी जांच का जिम्मा शिमला के एस.पी. डी.डब्ल्यू. नेगी को सौंपा गया है। उन्हें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। नेगी के पास विजीलैंस के एस.पी. एस.आई.यू. का भी कार्यभार है। इसी के तहत वह दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। 

सूत्रों ने बताया कि एस.पी. कानूनविदों से भी लगातार सलाह-मशविरा ले रहे हैं। वह हर कदम संभल कर चल रहे हैं, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सी.बी.आई. केस का कोर्ट में चालान किया, वैसे ही राज्य की विजीलैंस पर भी धूमल परिवार की घेराबंदी करने का दबाव आया। हालांकि इन्क्वायरी काफी समय से चल रही है, लेकिन सुबूतों के अभाव में इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाई है। 

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शिकायतकत्र्ता ने आरोप लगाया था कि धूमल परिवार की कई राज्यों में 31 से अधिक जगहों पर संपत्तियां हैं। इसमें से कुछ संपत्तियां पंजाब में होने के भी आरोप लगाए गए थे। इससे पहले पंजाब में अकाली-भाजपा की सरकार थी, इसलिए वहां से विजीलैंस को कोई जवाब नहीं मिला। कई बार रिमाइंडर भेजे, लेकिन पंजाब में सत्ता परिवर्तन होते ही हिमाचल सरकार फिर से हरकत में आ गई।

विजीलैंस ने दिया था नोटिस
विजीलैंस कथित संपत्तियों को लेकर धूमल को 2 बार नोटिस भेज चुकी है। इसके लिए उन्हें बाकायदा प्रश्नावली भेजी गई थी। उधर, धूमल विजीलैंस की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित कहते रहे हैं। उनका कहना था कि राज्य सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है। उन्होंने सरकार पर पुलिस तंत्र का भी दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया था। जब उन पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने के आरोप लगे, तभी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था। उन्होंने अपनी संपत्ति की जांच देश की सर्वोच्च जांच एजैंसी सी.बी.आई. से करवाने का आग्रह किया था, लेकिन राज्य सरकार ने जांच सी.बी.आई. को नहीं दी।

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