Blog: घोलकर जहर खुद ही हवाओं में... हर शख्स यहां घूम रहा मुँह छुपाए

Edited by: Aishwarya Awasthi

Navodayatimesनई दिल्ली/ऐश्वर्य अवस्थी। ये धुंधा-धुंआ सा है या मेरी जिंदगी की सांसे छीने जाने के पहले का मातम है....  इस बार दिल्ली एनसीआर के लोग कड़की ठंड का इंतजार ना करके एक प्रदूषण से भरे पर्यायवरण मुक्ति का इंंतजार कर रहे हैं। नवंबर एक ऐसा महीना होता था जिसमें सुबह घर से निकलने से पहले सभी एक वूलन का कोई कपड़ा तन ढकने के लिए ढूंढते थे लेकिन इस बार ये नजारा शहर के लोंगो से नदारत है।ठंड में ठिठरते बच्चे कैप नहीं चेहरे पर मास्क लगाए घूम रहे हैं।

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दिल्ली  एक अजीब सी धुंए जैसे फॉग की चादर ने अपनी गिरफ्त में लिया हुआ है। असल में जिसे आप शायद सर्दियां शुरू होने की आहट समझ रहे हैं वो फॉग नहीं आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक स्मॉग है। दिल्ली में छाई ये धुंध सर्दियों के कोहरे जैसी नहीं है, असल में ये वो खतरनाक कोहरा है जो आपको सांस और फेफड़ों से संबंधित कई गहरी बीमारियां दे सकता है।

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Navodayatimesदिल्ली में प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर शादीपुर इलाके में दर्ज किया गया जहां हवा में PM 2.5 की मात्रा 471 दर्ज की गई, जबकि इसका लेवल ज़ीरो से 50 के बीच सबसे सही माना जाता है। देश के दूसरे हिस्सों में भी पटाखों का असर देखा गया है और दिल्ली से अलग दूसरे शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। ठंड की दस्तक और गाड़ियों, फैक्टरियों के धुएं की वजह से भी प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है।जाड़ों में जब स्मॉग का मौसम चल रहा होता है तब गाड़ियों के धुंए से हवा में मिलने वाले ये सूक्ष्म कण बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर देते हैं।

Navodayatimesइन सूक्ष्म कणों की मोटाई करीब 2.5 माइक्रोमीटर होती है और अपने इतने छोटे आकार के कारण यह सांस के साथ फेफड़ों में घुस जाते हैं और बाद में हृदय को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्मियों में जब स्मॉग बनता है तो सबसे बड़ी समस्या होती है ओजोन की। कारों के धुएं में जो नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन्स होते हैं, वे सूर्य की रोशनी में रंगहीन ओजोन गैस में बदल जाते हैं। ओजोन ऊपरी वातावरण में एक रक्षा पर्त बना कर हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है। लेकिन वही ओजान अगर धरती की सतह पर बनने लगे तो हमारे लिए बहुत जहरीला हो जाता है।

Navodayatimesएक हम जो अपना छोटा सा गांव शहर छोड़ कर दो जून की रोटी कमाने के लिए इन शहरों में बसने आते हैं। बदले में ये शहर हमको क्या दे रहे...तो साहब से ये हमें धीमें धीमें बिना कुछ खिलाए पिलाए फ्री में जहर दे रहे । जो हमें बिना गलती के मौत की ओर ले रहा है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

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