Year Ender:सिद्धू और छोटेपुर के कारण पलटी पंजाब की सियासत!

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नई दिल्ली (टीम डिजिटल):बीते वर्ष में पंजाब की सियासत में काफी बड़ी घटनाएं हुई हैं लेकिन जिन 2 सियासी घटनाओं का पंजाब की आने वाली सियासत पर प्रभाव पड़ेगा वे नवजोत सिंह सिद्धू और सुच्चा सिंह छोटेपुर के साथ जुड़ी हुई हैं। इन चेहरों को लेकर यदि सियासी गलतियां न होतीं तो पंजाब की सियासत की तस्वीर आज शायद कुछ और होती।

‘आप’ छोड़ कांग्रेस में सीएम पद के लिए गए सिद्धू : केजरीवाल

सुच्चा सिंह छोटेपुर तो आम आदमी पार्टी (आप) में से निकाले जाने पर मजबूर हुए जबकि नवजोत सिंह सिद्धू की ‘आप’ में एंट्री होते-होते रह गई। इनके अलावा भी पंजाब में 2016 में बड़े-बड़े सियासी भूचाल आए। पंजाब केसरी उन सारे सियासी घटनाक्रमों के सियासत पर होने वाले असर का विश्लेषण कर रहा है।   

-कांग्रेस के खेमे में मनप्रीत

वर्ष की शुरूआत कांग्रेस के लिए अच्छी रही और 15 जनवरी को पूर्व वित्त मंत्री व पंजाब पीपुल्ज पार्टी के अध्यक्ष ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया और राहुल गांधी की उपस्थिति में खुद कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें मैनीफैस्टो कमेटी में अहम जिम्मेदारी दी है और किसी समय बादल परिवार व अकाली दल के लिए काम करने वाले मनप्रीत इस चुनाव में कांग्रेस की तरफ से किस्मत आजमाएंगे। 

-बेअदबी के विरोध में सिक्की का इस्तीफा

पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले सामने आने के बाद इसके विरोध में खडूर साहिब विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने 16 फरवरी को इस्तीफा दे दिया। इस सीट पर हुए उपचुनाव का कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया जिसके चलते अकाली उम्मीदवार रविंद्र सिंह ब्रह्मपुरा यह सीट 65,000 से ज्यादा मतों के अंतर से जीत गए। 

-एस.वाई.एल. मामला

एस.वाई.एल. के मामले को लेकर उठे विवाद के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सुल्तानपुर लोधी में पहली बार 16 मार्च को नदियों का पानी पंजाब को दिए जाने की बात कही, हालांकि बाद में दिल्ली जाते ही वह अपनी बात से पलट गए और सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ  हलफनामा दे दिया। एस.वाई.एल. पर अभी तक ‘आप’ की स्थिति साफ नहीं है और यह मामला ‘आप’ के गले की फांस बना हुआ है। 

-संसद की सुरक्षा से सांसद भगवंत मान का खिलवाड़ 

1 जुलाई को संसद की कार्रवाई को लाइव करने के चक्कर में ‘आप’ सांसद भगवंत मान ने संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ कर दिया। इस गलती पर गंभीर नोटिस लेते हुए लोकसभा की सभापति सुमित्रा महाजन ने जांच कमेटी बनाई। इस मामले के बाद भगवंत मान आज तक संसद में सैशन में नहीं जा पाए हैं। 

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-‘आप’ के चुनावी मैनीफैस्टो पर विवाद

अमृतसर में आम आदमी पार्टी का चुनाव मैनीफैस्टो जारी करते वक्त 3 जुलाई को ‘आप’ बड़े विवाद में फंस गई। पार्टी ने अपने चुनावी मैनीफैस्टो की तुलना श्री गुरु ग्रंथ साहिब से कर दी। मैनीफैस्टो पर श्री दरबार साहिब की फोटो के साथ झाड़ू लगाए जाने को लेकर भी काफी विवाद हुआ जिस पर बाद में पार्टी को माफी मांगनी पड़ी। 

-18 सी.पी.एस. को इस्तीफा देना पड़ा

12 अगस्त को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बनाए गए मुख्य संसदीय सचिवों (सी.पी.एस.) की नियुक्ति रद्द कर दी। लिहाजा पंजाब के 18 सी.पी.एस. को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना पड़ा। इनमें वे 6 सी.पी.एस. भी शामिल थे जिनकी नियुक्ति 26 अप्रैल को की गई थी। इससे पहले अमृतसर साऊथ से विधायक इंद्रबीर सिंह बुलारिया को सी.पी.एस. पोस्ट से हटा दिया गया था जबकि जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह ने पद स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। 

-सुच्चा सिंह छोटेपुर सी.डी. मामला

27 अगस्त को ‘आप’ ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। इस सूची से नाराज हुए पार्टी के कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर को आखिर एक कथित सी.डी. के आधार पर पार्टी से बाहर निकलने पर मजबूर किया गया। हालांकि बाद में वह सी.डी. कभी सामने नहीं आई जिसके आधार पर पार्टी ने छोटेपुर को पार्टी छोडऩे पर मजबूर किया। 

-कांग्रेसियों ने सदन में बिताई रात

पंजाब विधानसभा के सैश्न के दौरान 13 सितम्बर को कांग्रेस विधायकों ने सदन में रात बिताई। कांग्रेस के विधायक सदन की कार्रवाई खत्म होने के बाद भी पूरी रात विधानसभा में डटे रहे। ये विधायक कानून व्यवस्था, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और अन्य गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे थे। 

-‘आवाज-ए-पंजाब मोर्चे’ का गठन 

18 जुलाई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने 14 सितम्बर को बैंस ब्रदर्ज और परगट सिंह के साथ मिलकर ‘आवाज-ए-पंजाब मोर्चे’ का गठन किया। बाद में सिद्धू का यह फ्रंट बिखर गया और बैंस ब्रदर्ज ने आम आदमी पार्टी के साथ गठजोड़ कर लिया जबकि परगट सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं जबकि नवजोत सिद्धू को लेकर अभी भी सस्पैंस बना हुआ है।

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-एस.वाई.एल. : 42 विधायकों का इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस.वाई.एल. नहर को बनाने की मंजूरी दिए जाने के विरोध में 11 नवम्बर को कांग्रेस के 42 विधायकों ने इसे पंजाब सरकार की नालायकी बताते हुए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि बाद में अकाली दल ने विधानसबा का सत्र बुलाकर एस.वाई.एल. के निर्माण के लिए जमीन देने वाले किसानों को उनकी जमीन वापस करने का प्रस्ताव पारित कर दिया औैर कुछ ही दिन में इन किसानों और उनके वारिसों को मुफ्त में जमीन वापस भी दे दी गई।

-जलालाबाद में सुखबीर के सामने भगवंत 

‘आप’ ने 20 नवम्बर को संगरूर से अपने सांसद भगवंत मान को सुखबीर बादल की विधानसभा सीट जलालाबाद से बतौर उम्मीदवार मैदान में उतारने की घोषणा की। ‘आप’ की इस घोषणा के बाद इस सीट पर लड़ाई दिलचस्प हो गई है, हालांकि कांग्रेस ने अभी इस सीट पर अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। 

- घुबाया के बेटे का कांग्रेस में शामिल होना

फिरोजपुर और उसके आसपास के इलाके में प्रभाव रखने वाले अकाली दल के सांसद शेर सिंह घुबाया के बेटे दविंद्र घुबाया 21 दिसम्बर को कांग्रेस में शामिल हो गए। खुद घुबाया ने अकाली दल के पक्ष में प्रचार न करने की घोषणा की है। घुबाया के इस कदम को जलालाबाद सीट पर अकाली दल की मुश्किल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। घुबाया राय सिख बिरादरी से संबंध रखते हैं और इस बिरादरी का जलालाबाद सीट पर अच्छा-खासा प्रभाव है। 

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