सफल लोगों की इन ‘ई-मेल हैबिट्स’ को अपनाकर आप भी बने सफल

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नई दिल्ली (टीम डिजिटल)। जब आपको रोजाना 100-200 से भी ज्यादा ई-मेल मिलती हों तो जाहिर है कि आपका खूब सारा वक्त इन्हें देखने या इनका उत्तर देने में ही गुजरता होगा। चूंकि इन दिनों अधिक से अधिक आधिकारिक संवाद भी ई-मेल द्वारा ही होने लगा है, इनसे बचना भी सम्भव नहीं है।

 जानिए क्या होता है जब आप निगल लेते हैं च्यूइंग गम!

अगर आपके जिम्मे एक पूरी कम्पनी की कमान हो तो ई-मेल सम्भालने का कौशल आपको विशेष रूप से सीख लेना चाहिए।  आखिर विश्व की सबसे सफल कम्पनियों के सर्वोच्च अधिकारी किस तरह से लगातार आती ई-मेल्स को सम्भालते हैं, जान कर भी इस संबंध में कुछ न कुछ सीखा जा सकता है। 

टिम कुक (700 से ज्यादा ई-मेल्स में से ज्यादातर को पढ़ते हैं)

एप्पल के सी.ई.ओ. टिम रोज 3.45 बजे उठ जाते हैं और सुबह-सुबह ही ई-मेल पढऩा शुरू कर देते हैं। उनका कहना है कि उन्हें करीब 700 से 800 ई-मेल्स रोज आती हैं और वह उनमें से अधिकतर को रोज पढ़ते हैं। वह खुद को ‘वर्काहोलिक’ (हमेशा काम में डूबे रहने वाले) यूं ही तो नहीं कहते हैं। 

बिल गेट्स (कम ई-मेल्स का सौभाग्य)

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एक बार कहा था कि  उनके पास रोजाना करीब 40 से 50 ई-मेल्स ही आती हैं। इनमें कुछ पर ध्यान देने के बाद बाकियों को वह रात में निपटाते हैं। उनका मानना है कि यदि आप किसी काम को टाल रहे हैं तो याद रखना चाहिए कि बाद में उसे पूरा करना है। 

एरियाना हफिंगटन (तीन नियमों का पालन)

हफिंगटन पोस्ट की  सह-संस्थापिका ई-मेल्स के संबंध में तीन नियमों का सख्ती से पालन करती हैं : 
1. सोने से आधे घंटे पहले ई-मेल चैक नहीं करना।
2. सुबह उठते ही ई-मेल चैक करने की जल्दबाजी न दिखाना।
3. बच्चों की मौजूदगी में ई-मेल से दूर रहना।

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जैफ वेनर (कम से कम ई-मेल भेजते हैं)

लिंक्डइन के सी.ई.ओ. जैफ के पास ई-मेल मैनेजमैंट का एक ‘सुनहरा मंत्र’ है। उनके अनुसार यदि आप कम ई-मेल्स प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको कम से कम ई-मेल्स भेजने की आदत डालनी होगी। उन्हें इस कमाल के मंत्र का पता पिछली कम्पनी में काम करते हुए तब चला था जब ऐसे दो कर्मचारी नौकरी छोड़ गए जिन्हें ज्यादा ई-मेल भेजने का शौक था। उन्होंने पाया कि इसके बाद वहां आने वाली ई-मेल्स में 30 प्रतिशत कमी हो गई।

काटिया ब्यूचैम्प (कर्मचारियों से डैडलाइन सहित ई-मेल करने को कहती हैं)

ब्यूटी सैम्पल सब्सक्रिप्शन सेवा प्रदान करने वाली कम्पनी बिर्चबॉक्स की यह सह-संस्थापक कर्मचारियों को हिदायत देती हैं कि ई-मेल में वे एक डैडलाइन भी लिखें कि वे कब तक उसका उत्तर चाहते हैं। इससे वह सरलता से ई-मेल्स की प्राथमिकता तय कर पाती हैं और उन पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं। इससे उनका काफी वक्त बच जाता है।

जोनाथन एम. टिस्च (ई-मेल की शुरूआत कभी ‘आई’ (मैं) से नहीं करते हैं)

लोएस के यह एग्जीक्यूटिव अपनी ई-मेल के किसी भी पैराग्राफ की शुरूआत ‘आई’ यानी मैं शब्द से नहीं करते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से महसूस होता है कि आप खुद को उस व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं जिसे आप ई-मेल लिख रहे हैं।

चैड डिकरसन (कॉन्टैक्ट्स याद रखने का सिस्टम)

ऑनलाइन मार्केटप्लेस एत्सी के सी.ई.ओ. चैड जब भी किसी नए व्यक्ति से मिलते हैं तो उसकी  जानकारी को अपनी एड्रैस बुक में जोड़ लेते हैं। वह नोट बनाते हैं कि उससे कब मिले थे और क्या बात हुई थी। इस तरह से जब भी वह किसी को ई-मेल करते हैं तो उसके बारे में सभी बातें तुरंत उन्हें याद आ जाती हैं।

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जैफ बेजोस (प्रश्नचिन्ह लगा कर ई-मेल को फॉर्वर्ड कर देते हैं)

यदि कोई ग्राहक एमेजन के सी.ई.ओ. जैफ को किसी ऐसी समस्या के बारे में ई-मेल करता है जिसे आसानी से दूर किया जा सकता है तो वह उसे संबंधित कर्मचारी को केवल एक प्रश्नचिन्ह ‘?’ लगा कर फॉर्वर्ड कर देते हैं। कम्पनी के किसी भी कर्मचारी को जैफ की प्रश्नचिन्ह युक्त ई-मेल मिले तो वे उस पर ऐसी प्रतिक्रिया देते हैं जैसे कि उन्हें कोई टाइमबम मिल गया हो और वे उस पर त्वरित कार्रवाई करते हैं। 

टोनी सीह (‘ई-मेल ङ्क्षनजा’ का सहारा)

एक सूत्र के अनुसार जैपोज के इस सी.ई.ओ. ने उससे कहा था कि उन्होंने कम्पनी में अपनी ई-मेल्स सम्भालने के लिए 4 या 5 ‘ई-मेल हैंडलर्स’ को नियुक्त किया हुआ है। इस संबंध में दिलचस्प तथ्य है कि उनके ऑफिशियल टाइटल्स ‘ई-मेल ङ्क्षनजा’ हैं।

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