Blog: सीडी कांड - जांच सीडी की होनी चाहिए या विनोद वर्मा की ?

Navodayatimesपत्रकारिता और राजनीति का रिश्ता बड़ा पुराना रहा है यह हम बहुत पहले से कहते आ रहे हैं। दोनों हॉरलिक्स और बार्नविटा की तरह समकालीन रही हैं और समय -समय पर अपनी जात दिखाती रहीं हैं।
पहले के विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों की बातूनी भाषा में पत्रकारिता और राजनीति के बारे में बड़े शुद्ध विचार रहे थे। पर आजकल ऐसा नहीं  है यहां अब जितनी ज्यादा नीचता होगी उतना आगे जाएंगे।

खैर प्रवचन छोड़िए मुद्दे पर आइए। बीबीसी और अमर उजाला में वरिष्ठ पदों पर रह चुके पत्रकार विनोद वर्मा को कथित उगाही के आरोप में छत्तीसगढ़ पुलिस ने उनके गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में स्थित  घर से गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद यह खबर मीडिया में दौड़ने लगी। इस मुद्दे पर भी मीडिया के लोगों की राय जुदा -जुदा नजर आई।

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किसी ने कहा कि सरकार के साथ न होने पर पत्रकारों का हश्र यही होगा। तो किसी ने खबर में विनोद वर्मा को दोषी ही बता दिया होना भी यही था मीडिया ट्रायल नामक जुलाब से तो भारतीय मीडिया पीड़ित ही है। गिरफ्तारी के बाद जब अपनी ही बिरादरी के लोग विनोद के मुंह में माइक ठूंस रहे थे तो विनोद ने बताया कि उनके पास छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री राजेश मूणत की सेक्स सीडी है इसलिए सरकार उन्हें फंसा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सीडी पहले से ही पब्लिक डोमेन में है और उनका इससे कुछ लेना-देना नहीं है।

इसके बाद बारी थी नेता जी की तो छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण मंत्री मंत्री राजेश मूणत ने विनोद वर्मा के दावों को खारिज कर दिया । मूणत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए सीडी के बारे में जानकारी मिली और सीडी पूरी तरह फर्जी है। मंत्री ने कहा कि जिस भी एजेंसी से जांच करानी हो जांच हो जाए, वह जांच के लिए तैयार हैं। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने पत्रकार विनोद वर्मा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि वर्मा पत्रकार हैं या कांग्रेस के एजेंट। 

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रायपुर जिले के पुलिस अधीक्षक संजीव शुक्ला ने  को बताया कि प्रकाश बजाज नामक व्यक्ति ने रायपुर के पंडरी पुलिस स्टेशन में एक अज्ञात कॉलर द्वारा फोन पर परेशान किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। फोन करने वाले व्यक्ति ने उसे कहा था कि उसके पास उसके आका की एक सीडी है।पुलिस ने माना कि न एफआईआर में विनोद वर्मा का नाम है, न  कहीं उन्होंने फोन किया। बस एक सीडी वाले से मिले नंबर की बुनियाद पर उन्हें गिरफ़्तार किया गया।

कहां नजर आता है राजनीतिक दबाव-

विनोद वर्मा को सुबह साढ़े तीन बजे ही उनके आवास से उनको गिरफ्तार कर लिया जबकि कानून कहता है कि पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो आधी रात के बाद और सवेरे छह बजे से पहले किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार ना करे। इस समयावधि में गिरफ़्तारी तभी हो सकती है अगर अभियुक्त के फ़रार होने की आशंका हो और आरोप बेहद संगीन हों।
यानी आधी रात को भी गिरफ़्तारी, हत्या जैसे मामलों में हो सकती है जिसमें सबूत मिटाने का डर हो, तो सवाल यह है कि विनोद वर्मा ने इतना बड़ा संगीन आरोप तो किया नहीं था फिर इतनी हड़बड़ी में गिरफ्तारी की बात कुछ हजम सी नहीं होती है। बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि जब तक ज़रूरी न हो, गिरफ़्तारी नहीं की जानी चाहिए।
यहां तक पढ़कर आप को विनोद वर्मा पर दया जरूर आई होगी।

सेक्स सीडी रखने का भी अपराध बनता है।

आगे पढ़िए शायद आपका मन बदलने लगे। सेक्स सीडी रखने का भी अपराध बनता है। विनोद वर्मा पर सीडी रखने  का आरोप है।सेक्स वीडियो देख कर मिटा देना दंडनीय अपराध नहीं है। सीडी देख कर उसे नष्ट कर देना करना अपराध नहीं है।
लेकिन सेक्स वीडियो को कंप्यूटर पर सेव करके रखना अपराध है क्योंकि इसे वीडियो प्रकाशित करना माना जाता है। ऐसे में आपको प्रकाशन करने में सहायता करने के संदर्भ में दोषी माना जा सकता है।

सेक्स वीडियो की नकल बनाना धारा 67 के तहत अपराध है। ये ज़मानती अपराध है और इसमें अधिकतम तीन साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।

अगर वीडियो में अश्लील सामग्री है तो ये धारा 67-ए के तहत आ सकता है। इसमें आईटी एक्ट के तहत अधिकतम पांच साल की सज़ा है और ये गैर ज़मानती अपराध है ।

सेक्स सीडी की नकल करवाने का मामला आईटी एक्ट के तहत आता है। हालांकि आईटी एक्ट के तहत अश्लील वीडियो देखना अपराध नहीं है, लेकिन उसका प्रकाशन करना या इसमें सहायता करना अपराध है।

इन दो पहलुओं के बाद एक तीसरा पक्ष भी है जो सरकार पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

छत्तीसगढ़ में उन पत्रकारों को खासकर निशाना बनाया जाता है जो दलितों, आदिवासियों का पक्ष लेते हैं। इनके साथ ही उन लोगों पर को भी निशाना बनाया जाता है जिनके लेखन से विपक्षी पार्टियों को किसी न किसी तरह फायदा पहुंचता है।
दोष दोनों तरफ से हो सकता है लक्ष्मी कृपा में दोनों पक्ष की सरस्वती डिगती ही जा रही है। सरकार और अन्य वरिष्ठ धुरंधरों के बीच में पुलिस  नारद बन नारायण नारायण करती नजर आ रही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

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