GST की चिदंबरम ने गिनवाई कमियां, कहा- 1 अक्तूबर से हो लागू

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। जीएसटी बिल अभी भी संपूर्ण नहीं है। पी चिदंबरम के मुताबिक अगले दो साल में इसमें कई तरह के बदलाव किए जा सकते हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हाल ही में पारित हुए जीएसटी बिल पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि जीएसटी बिल में क्या-क्या कमियां हैं जो उसमें अभी भी बदलने के लिए जरूरी हैं।

जीएसटी में कमियां

उन्होंने बता कि दरों की बहुलवादिता, अनुपालन प्रावधान और कुछ प्रावधानों में स्पष्टता की कमी इसके कमजार होने के कुछ पॉईंट्स हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि क्या होगा यदि कारोबार एक वर्ष में 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर आता है और फिर अगले साल 1.5 करोड़ रुपये से नीचे जाता है और फिर 2-3 साल बाद 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर जाता है?

स्पष्टता की कमी का दूसरा उदाहरण यह है कि एक क्षमा योग्य अपराध भी गैर-जमानती अपराध कैसे बन सकता है। एक और उदाहरण है फिटमेंट। पूरी चीज उजागर करेगी कि फिटनेस को मूर्खतापूर्वक किया गया है या दिल में लालच के साथ किया गया है।

यदि सभी राज्य (जीएसटी परिषद में) एक साथ मिलते हैं और कहते हैं कि हमें अधिक कर निकालना होगा और संपूर्ण रिक्त उच्च दर के पक्ष में है, तो मुझे लगता है कि सारी चीज उजागर हो जाएगी। फिर कथित तौर पर मुनाफा विरोधी के साथ निपटने वाली धारा 171 वास्तव में संवैधानिक दृष्टिकोण से एक संदिग्ध प्रावधान है और मुझे लगता है कि यह दुरुपयोग करने के लिए खुला है।

GST आने से पहले ही दिख रहा प्रभाव, शैम्पू और साबुन के लिए चुका रहे ज्यादा कीमत!

कौन करेगा जीएसटीएन को ऑडिट?

उन्होंने इस बात का भी जवाब दिया कि क्या सीएजी के पास जीएसटीएन को ऑडिट करने की पॉवर है? उनका कहना है कि सीएजी को पॉवर संविधान से सीएजी अधिनियम के तहत मिली है। इसलिए इस बात को हर बार हर टैक्स कानून में बताने की जरूरत नहीं है कि सीएजी राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खातों को ऑडिट करेगी।

लेकिन अगर सीएजी ने औपचारिक रूप से यह सवाल उठाया है तो मुझे नहीं पता है। सीएजी अधिनियम के तहत अपनी पॉवर के आधार पर सीएजी को औपचारिक रूप से स्पष्ट करने के लिए सरकार का यह कर्तव्य है कि उसे जीएसटीएन सहित पूरे जीएसटी का ऑडिट करने का अधिकार होगा।

उन्होंने कहा कि यह संविधान के तहत है कि गैर-सरकारी कंपनी होने के बाद भी सीएजी के पास जीएसटीएन के ऑडिट की सारे अधिकार होंगे। लेकिन सरकार या सीएजी के अनुरोध पर यह किसी दूसरी कंपनी को भी दिया जा सकता है।

GST का इंतजार खत्म, राज्य होने लगे तैयार

कब से हो जीएसटी लागू?

जम्मू और कश्मीर की तरह और राज्यों की मांग है कि जीएसटी को 1 सितंबर तक टाल दिया जाए। इस पर चिदंबरम का कहना है कि इसकी 1 जुलाई से शुरू करने की समय सीमा के बारे में मुझे गंभीर संदेह है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह अव्यावहारिक और अवांछनीय है। ये क्यों अव्यावहारिक दिखता है इसके कारण नहीं पता हैं।

जीएसटी काउंसिल स्वयं मई के अंत में इसके नियमों पर गौर करेगा। इसके फिटमेंट को तब सार्वजनिक किया जाना चाहिए और फिटमेंट के खिलाफ कुछ विरोध प्रदर्शन भी होंगे। जिसके बाद उन्हें संसद में वापस लाया जाना चाहिए। नियम और दर को संसद में वापस लाया जाना है और संसद को उन्हें संशोधित करने का अधिकार है।

उनका कहना है कि लेकिन मुझे लगता है कि इस अभ्यास में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। यह सार्वजनिक डोमेन में पूर्ण बहस के बाद होने चाहिए। इसलिए मुझे लगता है कि 1 जुलाई अव्यावहारिक और अवांछनीय है। हम पूरी तरह से नए शासन की ओर बढ़ रहे हैं जिससे बहुत से लोग परिचित नहीं हैं।

उनका मानना है कि अनुपालन प्रावधान बेहद जटिल हैं। फाइलिंग प्रक्रियाएं पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक है और इसके लिए लोगों को समझने का पूरा समय दिया जाना चाहिए।

दूसरा पहलू यह है कि जीएसटीएन को एक परीक्षण में साबित करना होगा। वित्त मंत्री ने एक दिन में 30 अरब चालान के बारे में बात की। अगर वो संख्या सही है, तो यह एक विशाल संख्या है। क्या जीएसटीएन बिना किसी गलती के सभी को संभालने के लिए सक्षम है?

मुझे लगता है कि जीएसटीएन को वास्तविक लॉन्च से एक या दो महीने पहले तक परीक्षण आधार पर चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। मुझे व्यक्तिगत रूप से इसके वास्तविक लॉन्च के लिए 1 अक्टूबर की तारीख ठीक लगती है। ये वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

FacebookGoogle+TwitterPinterestredditDigglinkedinAddthisTumblr