Tuesday, Jan 23, 2018

खतरनाक बीमारी से जूझ रहे बच्चे की बाईपास सर्जरी सफल रही

  • Updated on 3/29/2016

Navodayatimes

नई दिल्ली (टीम डिजिटल)। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट (एफईएचआई) ने सबसे कम उम्र के भारतीय बच्चे की बाईपास सर्जरी की है। 10 साल का यह बच्चा होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) से पीड़ित था। 

सर्जरी करने वाले चिकित्सकों की टीम का नेतृत्व डॉ. रामजी मेहरोत्रा, निदेशक- कार्डियो-थोरासिक वैस्क्यूलर सर्जरी, एफईएचआई ने किया और उन्होंने टोटल आर्टरियल ग्राफ्ट्स का इस्तेमाल कर कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) पूरी की। 

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मथूरा में रहने वाले इस मरीज का जन्म अत्यंत दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी के साथ हुआ था, जिसे होमोजोइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एचओएफएच) कहते हैं। तीन दिनों तक सीने में दर्द और सांस न ले पाने की शिकायत के बाद उसे डॉ. पीयूष जैन, निदेशक, नॉन-इनवैसिव कार्डियोलॉजी एवं प्रमुख प्रीवेंटिव कार्डियोलॉजी, फोर्टिस-एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट को दिखाया गया।

शुरूआती जांच से पता चला कि वह गंभीर रूप से व्यापक मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हृदयाघात) से पीड़ित है और उसका हृदय काम करना बंद कर रहा है। मरीज को तत्काल ही आईसीयू में आगे की जांच और उपचार के लिए डॉ. विनय जेटली, सहायक निदेशक, इनवैसिव कार्डियोलॉजी, एफईएचआई की देखरेख में भर्ती किया गया।

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 मरीज की एंजियोग्राफी कराने पर गंभीर कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज का पता चला जिसकी वजह से हृदय की मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह बधित हो रहा था और ऐसे में तुरंत कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) करना आवश्यक हो गया था। 

मरीज का हृदय सिर्फ 50 फीसदी क्षमता से काम कर रहा था। सीएबीजी को डॉ रामजी मेहरोत्रा, डायरेक्टर - कार्डियो-थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी, एफईएचआई ने अंजाम दिया। मरीज के पिता ने सर्जरी के बाद बच्चे की हालत में सुधार देखकर डॉक्टरों को और फोर्टिस को धन्यवाद दिया।
 

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