Tuesday, Jan 23, 2018

रियल एस्टेट में जान फूंकेगा रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, हरियाणा को मिलेगें यह फायदे

  • Updated on 7/23/2016

नई दिल्ली (टीम डिजिटल): रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आर.आर.टी.एस.) पर जैसे-जैसे काम आगे बढ़ रहा है, राजधानी दिल्ली के साथ लगते हरियाणा के कई कस्बों के निवासियों के चहरे खिलने लगे हैं।

नैशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (एन.सी.आर.पी.बी.) द्वारा रेल आधारित हाई-स्पीड कम्प्यूटर  ट्रांजिट सिस्टम के लिए चिन्हित किए गए तीन कोरिडोर्स में से दो प्रमुख कोरिडोर हरियाणा से ही गुजरेंगे।

इनमें से एक 111 किलोमीटर लम्बा दिल्ली-सोनीपत-पानीपत कोरिडोर तथा दूसरा 180 किलोमीटर लम्बा दिल्ली-गुडग़ांव-रिवाड़ी-अलवर कोरिडोर है। भविष्य में पलवल तथा रोहतक को हाई स्पीड कोरिडोर द्वारा दिल्ली से जोडऩे की योजना है।

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सोनीपत तथा पानीपत
हालांकि, हरियाणा के जिन जिलों को हाई-स्पीड कोरिडोर द्वारा दिल्ली से जोडऩे की योजना है, उन सभी को इससे लाभ होगा क्योंकि वहां सरल तथा तीव्र परिवहन सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। सोनीपत तथा पानीपत जिले सबसे ज्यादा लाभांवित होंगे।

इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुडग़ांव की नजदीकी ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। दिल्ली मैट्रो तथा सड़कों से भी यह राजधानी से अच्छे से जुड़ा है। मैट्रो फरीदाबाद, नोएडा तथा गाजियाबाद को भी दिल्ली से जोड़ती है परंतु सोनीपत तथा पानीपत अभी तक इससे जुड़े नहीं हैं। इन दोनों जिलों ने दिल्ली के साथ लगती सीमा के बावजूद ज्यादा विकास दर्ज नहीं किया है क्योंकि वे राजधानी की सरल पहुंच में नहीं हैं।

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काम के सिलसिले में राजधानी तक रोजाना आवाजाही करने वालों के अलावा दोनों जिलों के रियल एस्टेट तथा इंडस्ट्रियल सैक्टर भी बुरी स्थिति का सामना कर रहे थे।

रियल एस्टेट
जानकारों का कहना है कि गत 5 वर्षों के दौरान दिल्ली-सोनीपत सीमा पर कुंडली के निकट डिवैल्परों ने कई आवासीय तथा वाणिज्यिक परियोजनाएं लांच की हैं परंतु उनमें रुचि लेने वालों की संख्या कम ही रही है। इन परियोजनाओं में से अधिकतर आवास अभी तक खाली पड़े हैं और निवेश के मकसद से इनमें आवास खरीदने वालों को भी बड़ा घाटा उठाना पड़ा है। कुंडली के उद्योगों का हाल भी बेहाल है। 

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प्रस्तावित कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रैस-वे में कई वर्षों से देरी हो रही है। अब हाई-स्पीड कोरिडोर के पुनर्जीवित होने से दोनों सैक्टर भविष्य में हालात बेहतर होने की आशा कर सकते हैं।

उद्योग
जानकारों के अनुसार यह स्वागत योग्य कदम है। इलाके में उद्योग पृथक रहते हुए विकास नहीं कर सकते हैं। किसी भी उद्योग के फलने-फूलने के लिए आसपास के इलाकों से बेहतर सम्पर्क मार्गों की उपलब्धता अनिवार्य है।

प्रस्तावित परियोजना गुडग़ांव से अलवर तक के उद्योगों को लाभांवित करेगी। वरिष्ठ अधिकारियों सहित रोजाना बड़ी संख्या में कामगार दिल्ली व गुडग़ांव से मानेसर, बवाल तथा नीमराणा जाते हैं। तीव्र तथा सरल सम्पर्क मार्ग उत्पादकता में वृद्धि करेंगे। 

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धारूहेड़ा, भिवाड़ी तथा नीमराणा में बन रही रियल एस्टेट परियोजनाओं को भी हाई-स्पीड कोरिडोर से लाभ होगा।
रिवाड़ी, भिवाड़ी तथा नीमराणा में कई उद्योग शुरू हुए हैं परंतु इलाके में रियल एस्टेट सैक्टर विकास के साथ कदम से कदम मिला कर नहीं चल सका है। डिवैल्पर तथा रियल एस्टेट एजैंट्स सैक्टर की मंदी की प्रमुख वजह सम्पर्क मार्गों की कमी को ही मानते हैं। 

हालांकि, कई मौकों पर मैट्रो को भिवाड़ी तक ले जाने की मांग की जाती रही है, इस दिशा में कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए जा सके हैं। अब हाई-स्पीड कोरिडोर से हरियाणा के कई कस्बों व शहरों के रियल एस्टेट सैक्टर में जान पडऩी तय है। 

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