2022 में पंजाब की राजनीति में वापस आऊंगा:बाजवा

2022 में पंजाब की राजनीति में वापस आऊंगा:बाजवा

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा एक और राजनीतिक पारी खेलने के बयान के बाद पंजाब के पूर्व कांग्रेस प्रधान व राज्यसभा मैम्बर प्रताप सिंह बाजवा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर पंजाब की राजनीति में उतरने की बात की है।

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‘पंजाब केसरी’ के प्रतिनिधि रमनदीप सिंह सोढी को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में बाजवा ने पूर्व मंत्रियों बिक्रम मजीठिया, तोता सिंह और प्रताप सिंह कैरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक बार फिर आवाज बुलंद की है। इसके साथ ही बाजवा ने निजी चीनी मिलों के अरबों के मुनाफे में से गन्ना किसानों को भी फसल की बनती कीमत देने की मांग की। पेश है प्रताप सिंह बाजवा का पूरा इंटरव्यू :  

सवाल : बाजवा साहिब इस्तीफे की पेशकश करके चुनाव से पहले दिए गए बयान से बच रहे हो या फिर कैप्टन साहिब को फंसा रहे हो?

जवाब : मैं एक गम्भीर नेता हूं, मैं कोई मजाकिया या ओछा राजनीतिज्ञ नहीं हंू। मैंने चुनाव प्रचार दौरान तरनतारन में लोगों के साथ जिस समय यह वायदा किया था उस समय कैप्टन अमरेन्द्र सिंह कांग्रेस के प्रधान बन चुके थे और पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर प्रचार के मुखी थे। मैं उस समय राज्यसभा का मैम्बर था। मैं न तो उस समय चुनाव लड़ रहा था और न ही मैंने उनकी कैबिनेट का हिस्सा बनना था। यह बयान सिर्फ मेरे नहीं थे  जबकि सभी राजनेता पंजाब की लूट-खसूट करने वाले अकाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करके पंजाब के लोगों को इंसाफ देने की बात कह रहे थे।

जब सरकार को बने हुए 5-6 महीने हुए थे तो लोगों ने मुझे इस बारे में पूछना शुरू कर दिया कि बाजवा साहिब नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कब करोगे। तब मैंने अपने नेता राहुल गांधी को पंजाब के हालात और कांग्रेस द्वारा क्षेत्र के लोगों के साथ की गई वचनबद्धता बारे लिखकर भेजा था तथा उनसे पूछा था कि लोग हमें वायदों के बारे पूछ रहे हैं और हम इसका क्या जवाब दें। इसके साथ ही मैंने 3 महीने पहले लिखी गई इस चिट्ठी के साथ अपना इस्तीफा भी उनको भेजा था मगर उस पर उनका अभी तक कोई जवाब नहीं आया। 

सवाल : पिछले 3 महीनों दौरान राहुल गांधी के साथ इस्तीफे या संबंधित विषय के बारे में फोन पर भी कोई बात नहीं हुई?

जवाब : राहुल गांधी पिछले 2-3 महीनों से गुजरात और हिमाचल विधानसभा के चुनावों में व्यस्त हैं। उनको पार्टी प्रधान बनाए जाने की भी तैयारी हो रही है। जैसे ही समय मिलता है वह अगले 10-15 दिनों बाद होने वाले संसद के सैशन दौरान  इस बारे में बातचीत करेंगे। 

सवाल : क्या राहुल गांधी ने आपसे इस्तीफे का कारण नहीं पूछा?

जवाब: इस्तीफे के कारण मैंने चिट्ठी के साथ ही लिखे थे और वह भावनाओं को समझते हैं तथा इस चीज को लेकर अच्छी तरह से वाकिफ हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आरोपी अकालियों के खिलाफ कार्रवाई करने का वायदा समूची कांग्रेस पार्टी का था। कांग्रेस के सभी नेताओं ने बादल की तुलना गद्दाफी, सद्दाम हुसैन और अहमद शाह अब्दाली के साथ की थी। अब जब लोगों को दिया गया वचन पूरा नहीं हो रहा तो इसके खिलाफ पार्टी के अंदर उठ रही आवाजों और गम्भीरता को वह अच्छी तरह समझते हैं। 

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सवाल : राहुल गांधी ने आपके इस्तीफे के बाद आपसे संवाद क्यों नहीं किया?

जवाब : मैं उनसे मिलकर इस मामले पर बातचीत कर सकता हूं। उन्होंने केवल प्रताप सिंह बाजवा के इस्तीफे के मामले में ही नहीं देखना, उन्होंने पूरे देश की पार्टी की स्थिति के अलावा देश के तमाम मसलों के बारे भी सोचना है। वह इससे पहले अमरीका के दौरे पर थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हो रही राजनीति बारे भी सोचना है। लिहाजा हो सकता है कि उन्हें बातचीत करने का समय न मिला हो। यह पार्टी का अंदरूनी मामला है, उन्होंने इसको घर की बात ही समझा है। अगर मैं इस्तीफा राज्यसभा के स्पीकर को भेजता तो शायद उस वक्त कोई बातचीत होती। 

सवाल : क्या आपने इस्तीफा देने से पहले अपनी मांगों के बारे में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह से बातचीत की थी? 

जवाब : यह केवल प्रताप सिंह बाजवा का मामला नहीं है, यह समूची कांग्रेस का मसला है। इस बारे में कांग्रेस के 40 विधायकों ने भी कैप्टन को पत्र लिखा है और रोजाना कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू व अन्य नेता भी बातचीत करते हैं। यह केवल प्रताप सिंह बाजवा के साथ ताल्लुक रखने वाली बात नहीं।

सवाल : सभी नेता तो सत्ता का सुख भोग रहे हैं, बाजवा इस्तीफा देकर अकेले क्यों रहना चाह रहे हैं?

जवाब: इतिहास इस बात का गवाह है कि जब इस किस्म की लड़ाई लड़ी जाती है तो उस समय कोई न कोई तो पहलकदमी करता है। बाद में लोग खुद उसके साथ शामिल हो जाते हैं। मैंने लोगों के साथ वचनबद्धता की थी, बाकी राजनीतिक पार्टी की साख उसकी जुबान के साथ ही बनती है। मैंने लोगों के साथ किए गए अपने वायदे निभाए हैं, अब आगे सरकार देखे कि इस मसले में क्या करना है। 

सवाल : जिस समय आपकी गुरदासपुर चुनाव टिकट को लेकर  बात चली उस समय भी कैप्टन को इस मसले के बारे में याद नहीं दिलाया?

जवाब : जब हमारी मुलाकात हुई उस समय राहुल गांधी अमरीका में थे। यह मुलाकात सिर्फ 10 मिनट की थी। इस दौरान मीटिंग में आशा कुमारी और हरीश चौधरी भी थे। मैंने उनको इन वायदों की याद दिलाई थी परंतु उन्होंने कहा कि राजनीतिक हालात कुछ तबदील हो चुके हैं, तब मैंने पार्टी के सामने आई चुनौती दौरान मिलकर चलने को कहा था। मुझे इस मामले में इंतजार करने को कहा गया और मैंने पार्टी का सिपाही होने के नाते उसका पूरा साथ दिया।

सवाल : आप यदि पंजाब प्रति इतने ही गम्भीर हो तो पंजाब के सांसदों की बैठक में क्यों नहीं गए?

जवाब : यह प्रोटोकाल की बात थी। सबसे पहले मुख्यमंत्री दफ्तर ने सभी सांसदों को बुलाकर 6 नवम्बर को बैठक बुलाने की बात की थी और हम सब भी तैयार थे। इस दौरान हमें यह कहा गया कि मुख्यमंत्री के व्यस्त होने के कारण 6 तारीख की बैठक 14 नवम्बर तक टाल दी गई है। जब 14 नवम्बर की बैठक  की तैयारी की गई तो 13 नवम्बर को फिर चिट्ठी आई कि 14 की बजाय 15 नवम्बर को बैठक होगी।

15 नवम्बर को साढ़े 3 बजे मीटिंग से पहले ही सुबह पता चला कि मुख्यमंत्री की जगह संसदीय मामलों बारे मंत्री ब्रह्म मङ्क्षहद्रा इस मीटिंग की अगुवाई करेंगे। यह प्रोटोकाल के खिलाफ था क्योंकि जब भी सांसदों की बैठक होती है तो मुख्य तौर पर मुख्यमंत्री ही बैठक की अगुवाई करता है। जब मुख्यमंत्री वहां नहीं पहुंचे तो संसदीय सदस्यों ने विचार किया कि जो मुद्दे केवल मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आते हैं उनका हल कैसे निकलेगा। उदाहरण के तौर पर किसानों का मुद्दा अहम था।

माझा और दोआबा के किसानों के लिए इस समय गन्ने के भाव का मुद्दा भी मुख्य है। हम फसल विविधता की बात करते हैं परंतु किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं देते। पिछले 4 वर्षों से किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल रहा तो ऐसे में फसल विविधता का लक्ष्य किस तरह पूरा होगा। मैंने बैठक में इस मुद्दे पर बातचीत करनी थी परंतु जब पता चला कि इसमें मुख्यमंत्री ही नहीं आ रहे तो मुझे मायूसी हुई। वैसे मैं ब्रह्म महिंद्रा जी का बहुत सम्मान करता हूं। जब मैं पार्टी प्रधान था तो उस समय वह उपकप्तान थे परंतु किसानों के मुद्दे का हल उनके बस की बात नहीं। इसका हल सिर्फ मुख्यमंत्री के पास ही है। 

सवाल: अगर मुख्यमंत्री बैठक में आते तो क्या आप बैठक में हिस्सा लेते?

जवाब: हां, मैं 110 प्रतिशत बैठक में हिस्सा लेता। मैंने यह भी पेशकश की है कि अभी संसद के सैशन की तारीख तय नहीं की गई है और यह दिसम्बर के दूसरे या तीसरे हफ्ते होने की उम्मीद है, अत: मुख्यमंत्री कार्यालय एक बार फिर क्षेत्र के सांसदों की बैठक बुला सकता है और सभी सांसद इसमें हिस्सा लेंगे। पिछली बैठक में केवल मैं ही गैर-हाजिर नहीं था बल्कि शमशेर सिंह दूलो, अम्बिका सोनी और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे दिग्गज नेता भी गैर-हाजिर थे। 

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सवाल : इस समय सैद्धांतिक तौर पर कितने सांसद और विधायक आपके साथ हैं?

जवाब : इस समय बड़ी गिनती में लोग हमारे साथ हैं जो पंजाब के मुद्दों की बात करना चाहते हैं। 

सवाल : कै. अमरेंद्र सिंह ने कहा है कि पंजाब को बचाने के लिए वह एक और राजनीतिक पारी खेल सकते हैं। इस बयान को आप कैसे देखते हैं? 

जवाब : मुझे मुख्यमंत्री के इस बयान से कोई दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि मेरी यह आखिरी पारी है। मैंने मुख्यमंत्री को कोई सलाह नहीं दी कि आप ऐसा कहें और न ही उन्होंने मेरे कहने पर ऐसा बयान दिया है। अब वह खुद ही आगे राजनीति में रहने की बात कह रहे हैं। मैं अरदास करूंगा कि परमात्मा उनको तंदुरुस्ती दें। वह पंजाब में लीड करें इससे हमें कोई दिक्कत नहीं है। सवाल बाजवा और कैप्टन का नहीं है, सवाल हमारे द्वारा लोगों को दी जुबान का है। क्या हमने आगे चुनाव नहीं लडऩा। हम 2019 या 2022 में लोगों के पास क्या मुंह लेकर जाएंगे।

कैप्टन साहिब ने खुद ही कुछ दिन पहले कहा है कि 2007 में जब अकाली दल ने क्षेत्र की कमान संभाली तो उस समय पंजाब पर केवल 58 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। अकाली दल के 10 साल सत्ता में रहने पर यह कर्ज 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपए हो गया। मैं यह पूछना चाहता हूं कि जिन लोगों ने पंजाब के टैक्स का पैसा लूटा तथा आने वाली पीढिय़ों पर और डेढ़ लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज चढ़ाया उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। मनप्रीत सिंह बादल ने विधानसभा के पिछले सैशन दौरान क्षेत्र की आॢथक अवस्था को लेकर एक व्हाइट पेपर लाने की बात कही थी जिसमें क्षेत्र के हर विभाग की कारगुजारी के बारे में लिखा जाना था। मैं कहता हूं कि व्हाइट पेपर लेकर आओ।

सवाल : मुख्यमंत्री अकालियों के खिलाफ अब कार्रवाई न करने के लिए सबूतों की कमी की बात कह रहे हैं। क्या आप भी चुनावों से पहले बिना तथ्यों के आरोप लगाते हो?

जवाब : मैंने बिल्कुल पूरे तथ्यों के आधार पर बात की थी और करता हूं। डेढ़ लाख करोड़ रुपए का बढ़ा कर्ज एक बड़ा तथ्य है। जहां तक बिक्रम सिंह मजीठिया की बात है, उनके साथ मेरी कोई निजी लड़ाई नहीं है परंतु जगदीश सिंह भोला, बिट्टू औलख और चाहल ने केन्द्र की जांच एजैंसी एनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) के सामने मजीठिया के खिलाफ बयान दिए हैं। यह बयान सी.आर.पी.सी. की धारा 164 के तहत मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए काफी है क्योंकि ई.डी. कोदिए गए बयान मैजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान के बराबर है। अगर आप उनके खिलाफ कार्रवाई करोगे तो ही सबूत सामने आएंगे। जत्थेदार तोता सिंह कृषि मंत्री थे।

मालवा में आज भी सैंकड़ों गरीब किसान खुदकुशियां कर रहे हैं। मैं उस समय प्रदेश कांग्रेस का प्रधान था। उस समय नरमे के नकली बीज और कीड़ेमार दवाइयां किसानों को बेची गईं, उस फैसले पर तोता सिंह के बतौर मंत्री हस्ताक्षर थे मगर उन दवाइयों से सफेद मक्खी नहीं मरी जिससे लाखों एकड़ नरमे की फसल बर्बाद हुई। उस समय के कृषि विभाग के मुखी बी.एस. संधू 2 महीने जेल में भी रहे। अकाली दल की सरकार में खेतीबाड़ी विभाग का मुखी तो 2 महीने जेल में रहता है परंतु जो कृषि मंत्री इस फैसले पर हस्ताक्षर करता है उसको कोई पूछता तक नहीं। मैं जानना चाहता हूं कि तोता सिंह आज बाहर क्यों हैं? आदेश प्रताप सिंह कैरों पर 31 हजार करोड़ रुपए का गेहंू घोटाला करने के कांग्रेस द्वारा आरोप लगाए गए थे। मैं खुद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गया। कांग्रेस के क्षेत्र प्रधान सुनील जाखड़ ने खुद वे मोटरसाइकिल दिखाए जो माल ढोने के लिए इस्तेमाल किए गए। आदेश प्रताप सिंह कैरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। 

सवाल : जो सबूत आपको नजर आ रहे हैं वे मुख्यमंत्री को नजर क्यों नहीं आते, कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

जवाब : यह तो मुख्यमंत्री ही बता सकते हैं कि उनको सबूत नजर क्यों नहीं आते। नवजोत सिंह सिद्धू भी कह रहे हैं, पंजाब के 4 सीनियर नेता भी कह रहे हैं, विधायक भी चिट्ठी लिख रहे हैं, कोई कार्रवाई तो होनी ही चाहिए। 

सवाल : क्या बाजवा को इस विरोध के पीछे कोई राजनीतिक फायदा होने  की उम्मीद तो नहीं है?

जवाब : न मैंने कभी किसी फायदे की उम्मीद रखी है, न ही मैं रखता हूं। फायदा-नुक्सान परमात्मा के हाथ में है जो आपके माथे की लकीर पर लिखा है, उससे न तो अधिक और न ही कम मिल सकता है।

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सवाल : आपने फगवाड़ा में गन्ना किसानों के हक में धरना दिया था, अब आप उनके हक क्यों नहीं दिलवा रहे?

जवाब : मैंने अपने विधायकों तथा मंत्रियों से अपील की है कि आप इन किसानों के वोटों के दम पर मंत्री तथा विधायक बने हो, लिहाजा आप सभी मिलकर मुख्यमंत्री से किसानों के हक में आवाज उठाएं। पंजाब का 70 प्रतिशत गन्ना 7 प्राइवेट मिलों ने रख रखा है। इन मिलों को 12 से 13 रुपए प्रति किलो मुनाफा हो रहा है। हमारे किसानों का जो कच्चा माल जा रहा है वह 285 से लेकर 300 रुपए प्रति किं्वटल जा रहा है, मिलों को चीनी 28 से 30 रुपए किलो पड़ती है तथा यह 41 रुपए किलो बेची जा रही है। हर शूगर मिल हजारों किं्वटल गन्ना से रोज शूगर बना रही है, इसके अलावा मिल वालों के पास पावर प्लांट हैं। अधिकतर मिलों के पास अपनी शराब की फैक्टरियां हैं। इनसे शीरा भी निकलता है तथा खल भी बनती है। हालांकि प्राइवेट मिलर पाकिस्तान से आ रही चीनी को रोकने की मांग कर रहे हैं तथा मैं भी मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि वह केंद्र सरकार से इस संबंधी बात करें और पाकिस्तान से चीनी की बरामदगी रोकी जाए।

सवाल : 2019 में पंजाब की राजनीति में वापसी करोगे?

जवाब : मेरी राज्यसभा की अवधि 2022 तक है तथा 2022 में ही पंजाब विधानसभा के चुनाव होने हैं। लिहाजा मैं राज्यसभा की अवधि खत्म होने के बाद राज्य की राजनीति में दोबारा सरगर्म होऊंगा।

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