पहले ही बन गई थी ढांचा गिराने की योजना

Navodayatimesनई दिल्ली/बृजेश शुक्ल। 7 दिसम्बर की सुबह। लखनऊ के माल ऐवन्यू स्थित लालजी टंडन का सरकारी आवास। अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिरने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवानी देर रात लखनऊ लौट आए थे। ङ्क्षचता में डूबे अडवानी के सामने जब सुबह नाश्ते के लिए चाय व ब्रेड लाई गई तो उन्होंने कुछ भी लेने से इनकार कर दिया। एक दिन पहले ही भाजपा व विश्व हिंदू परिषद के नेता उत्साहित थे, लेकिन अडवानी हक्के-बक्के क्यों थे। 

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5 दिसम्बर की रात अयोध्या यह सोच कर सोई थी कि कारसेवा के नाम पर एक और कर्मकांड होगा और कारसेवक फिर से अपने-अपने घरों को लौट जाएंगे। विहिप के नेताओं ने एक दिन पहले ही घोषणा कर दी थी कि कारसेवक सरयू से एक-एक मुट्ठी बालू लाकर विवादित परिसर के पास प्रतीक रूप में डालकर कारसेवा करेंगे। इससे कारसेवक भड़क उठे। देर रात यह सूचनाएं आ रही थी कि बिल्डिंग को गिराने वाले सामान जैसे बेलचा, हथौड़े आदि को कुछ कारसेवक इकट्ठा कर रहे हैं। 6 दिसम्बर को अयोध्या में कुछ भी हो सकता है।

इस संवाददाता को हनुमान गढ़ी के पास कारसेवकों का एक दल मिला था, जिसने बताया था कि इस बार वे खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे। आर-पार की लड़ाई होगी और कल ढांचा नहीं बचेगा। रात एक बजे कारसेवक पुरम में चहलकदमी थी। उत्साहित कारसेवक रह-रहकर नारेबाजी कर रहे थे। सुबह होने का इंतजार किया जा रहा था। यह तूफान के पहले का वह वातावरण था जो कहीं से यह संकेत नहीं दे रहा था कि कुछ घंटों के बाद ही वह घटना होने जा रही है जो भारत की राजनीति को बदल देगी। विहिप के एक वरिष्ठ नेता ने यह दावा किया कि फिलहाल ढांचा नहीं गिराया जाएगा।

सुबह से ही विवादित ढांचे के पास कारसेवकों का जमावड़ा लगने लगा। पास ही मंच पर विहिप व भाजपा नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। मंच पर अडवानी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, गोविंदाचार्य, विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, साध्वी उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा सहित कई बड़े नेता उपस्थित थे। मंच से उत्तेजक भाषण चल रहे थे। विवादित ढांचे के इर्द-गिर्द विहिप के कार्यकर्ता तैनात थे।

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लगभग दस बजे कारसेवकों का एक दल तेजी से ढांचे की ओर बढ़ा। विहिप कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की। तभी कारसेवकों का एक और दल भी बाबरी मस्जिद की ओर जाने लगा। कुछ लोग ढांचे की ओर जाने में सफल रहे। इनमें कुछ के हाथ में बेलचा और हथौड़े थे। इस धक्का-मुक्की में विहिप व कारसेवकों के बीच मार-पीट होने लगी। मंच से भाजपा व विहिप के नेता अपने कार्यकर्ताओं व कारसेवकों से अपील कर रहे थे कि आपस में न लडि़ए, सब अपने लोग हैं। यह खबर फैल गई कि ढांचे के पास मारपीट चल रही है। 

इससे कारसेवकों का हुजूम ढांचे की ओर बढऩे लगा। इसी बीच कुछ कारसेवक ढांचे पर चढ़ गए और उसे गिराना शुरू कर दिया। मंच से यह अपील की जा रही थी कि कारसेवक ढांचे से उतर आएं। चोट लग जाएगी लेकिन जितनी तेज अपील हो रही थी उतनी तेजी से ही ढांचे को गिराने का प्रयास भी हो रहा था। कारसेवकों व विहिप कार्यकर्ताओं के बीच चल रही मारपीट की जब प्रेस फोटोग्राफर फोटो ले रहे थे तभी उन पर हमला शुरू हो गया।

मार्क तुली सहित कई विदेशी पत्रकारों के साथ तमाम पत्रकार कारसेवकों के निशाने पर आ गए। उनको दौड़ा-दौड़ाकर मारा जा रहा था। वास्तव में कारसेवक किसी भी कीमत पर ढांचे के विध्वंस की फोटो बाहर नहीं जाने देना चाहते थे। इस अफरा-तफरी के बीच ही विनय कटियार ढांचे की ओर गए और कई बक्सों को बाहर लाते देखा गया। इन बक्सों में मूर्तियों को बाहर लाया गया। अब साफ हो गया था कि ढांचा नहीं बचेगा। कारसेवकों ने ढांचे को गिराने की नई तकनीक अपनाई। अभी तक कारसेवक ऊपर चढ़कर ढांचे को गिरा रहे थे लेकिन बाद में नीचे ढांचे में कई छेद कर पूरे ढांचे को ही जर्जर कर गिराने का प्रयास किया गया। साफ था कि बिल्डिंग गिराने की यह तकनीक बिना तैयारी के संभव ही नहीं थी। 

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उधर लखनऊ में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह धूप में बैठे तेल मालिश करा रहे थे तभी उन्हे सूचना दी गई कि ढांचे पर कुछ कारसेवक चढ़ गए हैं और उसे गिराना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरसिंह राव भी कल्याण सिंह से सम्पर्क करना चाहते थे लेकिन वह बात नहीं कर पा रहे थे। कल्याण ने गृहसचिव को निर्देश दिया कि कारसेवकों पर गोली नहीं चलाई जाएगी। सायं 5 बजे कल्याण का काफिला मुख्यमंत्री आवास से राजभवन की ओर बढ़ा और पत्रकार उस काफिले के पीछे भागे। कल्याण ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा दे दिया। 

अयोध्या में उत्साहित उमा भारती नारे लगाती आगे बढ़ी और डॉ. जोशी की पीठ पर लटक गई। विहिप के कुछ नेताओं के चेहरों से खुशी झलक रही थी। मंच से फिर से ऐलान किया गया कि ढांचा गिरने वाला है इसलिए कारसेवक वहां से हट जाएं। कुछ देर बाद मंच खाली हो गया। ढांचा धराशाई हो गया। तत्काल वहां पर अस्थाई मंदिर का निर्माण कर मूॢतयां स्थापित कर दी गई।
 

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