चीन को हमारे इलाकों के नाम बदलने का हक नहीं

Navodayatimesनई दिल्ली/रंजीत कुमार। अरुणाचल प्रदेश पर चीन को कड़ा संदेश देने के साथ ही भारत ने चीन की  वन  बेल्ट वन रोड (ओबोर)  शिखर बैठक पर नरमी के संकेत दिए हैं। अरुणाचल  प्रदेश के छह इलाकों के चीनी नाम जारी करने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उसे इस तरह करने का हक नहीं है।

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 वहीं संकेत दिया कि अगले महीने पेइङ्क्षचग में होने वाली बेल्ट व रोड शिखर बैठक में भारत भाग ले सकता है। चीन द्वारा  अगले महीने पेइचिंग में आयोजित बेल्ट एवं रोड शिखर बैठक में भारत अपना प्रतिनिधि भेजने पर विचार कर रहा है। यहां विदेश मंत्रालय के  प्रवक्ता गोपाल बागले ने पुष्टि की कि इस आशय का निमंत्रण भारत को मिला है और इस पर विचार किया जा रहा है।

 उल्लेखनीय है कि पेइचिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए  हैं कि बेल्ट एंड रोड शिखर बैठक में भारत अपने अधिकारी को मौजूद रहने को कह सकता है। इस तरह इस शिखर बैठक को लेकर भारत ने अपना रुख नरम कर लिया है। हालांकि चीन ने इस शिखर बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री को भाग लेने का निमंत्रण दिया है लेकिन भारत पेइङ्क्षचग में अपने राजदूत के  इस बैठक में भाग लेने पर विचार कर रहा है। 

इस तरह भारत यह संकेत देगा कि बेल्ट एंड रोड शिखर बैठक का बहिष्कार नहीं कर रहा है। उल्लेखनीय है कि  वन बेल्ट वन  रोड (ओबोर) शिखर बैठक में रूसी राष्ट्रपति सहित करीब 30 देशों के राष्ट्रप्रमुख भाग लेने वाले  हैं।   गौरतलब  है कि वन बेल्ट एंड वन रोड के तहत पूरी  दुनिया में आठ गलियारों पर चीन काम कर रहा है जिसमें से एक चीन पाक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) एक अहम प्रोजेक्ट है। भारत ने इसका यह कह कर विरोध किया है कि यह इलाका जम्मू कश्मीर के पाक अधिकृत इलाके से होकर गुजर रहा है जो कि भारत का एक भूभाग  है।

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दूसरी ओर भारत ने ओबोर के तहत बांग्लादेश, चीन ,  भारत , म्यांमार (बीसीआईएम ) गलियारा पर काम आगे  बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इसकी अगली बैठक जल्द ही कोलकाता में होगी जिसमें चारों देशों के प्रतिनिधि आगे की रुपरेखा पर विचार करेंगे। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश की छह जगहों का चीनी नाम घोषित करने के चीन सरकार के कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यहां भारत ने कहा कि पड़ोसी देश के सीमांत राज्य के इलाकों का नाम इजाद कर लेने से ही अवैध कब्जे को कानूनी जामा नहीं पहनाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि अरुणाचल प्रदेश के  तवांग , इटानगर आदि इलाकों का चीन ने नया चीनी नाम घोषित किया है और कहा है कि  ये  इलाके सदियों से चीन के भाग रहे हैं। लेकिन यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चीन के इस ऐलान पर अपनी प्रतिक्रिया में जोर दे कर  कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। यह पूछे जाने पर कि चीन ने यह कदम क्यों उठाया प्रवक्ता ने कहा कि वह इस बारे में अटकलबाजी नहीं कर सकते लेकिन यहां राजनयिक सूत्रों ने कहा कि साफ तौर पर चीन का यह कदम भारत द्वारा दलाई लामा के अरुणाचल दौरे की अनुमति  से जुड़ा है।

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चीन ने भारत को कई बार चेतावनी दी थी कि दलाई लामा के अरुणाचल दौरे से भारत और चीन के रिश्तों पर अत्यधिक प्रतिकूल असर पड़ेगा। चीन ने इस बारे में अपना विरोध जताने के लिये पेइचिंग में भारतीय राजदूत विजय गोखले को विदेश मंत्रालय में तलब किया था।  

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