इन कारणों से नहीं बन पा रही समाजवादी पार्टी में बात, पढ़ें क्या है इनसाइड स्टोरी

Navodayatimesनई दिल्ली (टीम डिजिटल): समाजवादी पार्टी के बीच कलह किसी भी रूप में सुलह का आकार लेती नहीं नजर आ रही है। ऐसा नहीं है कि सुलह की कवायदें ना हुई हो,पर हर कोशिश नाकाम सी नजर आई।

क्या हुआ चुनाव आयोग से मिलने के बाद?

चुनाव आयोग से मिलकर दिल्ली से जब नेताजी लखनऊ अपने घर लौटे तो लगा अब जैसे सुलह हो ही गई और ऐसा इसलिए क्योकिं अब तक ‘नए विधायक ही अपना नया मुख्यमंत्री चुनेंगे’ कहने वाले मुलायम सिंह ने ‘अखिलेश ही अगले सीएम होंगे’ वाला बयान देकर सबको चौंका दिया। मंगलवार की सुबह से ही नेताजी के घर के बाहर मीडिया का हुजुम उमड़ा सबने कयास लगाए कि अब नेताजी कुछ अच्छी खबर देंगे। 

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बता दें कि मुलायम सिंह के बगल वाले घर में उनके बेटे रहते हैं। वैसे तो आमतौर पर अखिलेश दस बजे सवेरे अपने घर से निकल कर मुख्यमंत्री वाले बंगले पर चले जाते हैं। लेकिन वे इंतजार करते रहे कब नेताजी घर वापस लौटेंगे?

मुलायम सिंह यादव जैसे ही घर लौटे अखिलेश यादव तुरंत पिता के पास पहुंच गए। दोनों के घर के बीच कोई दीवार नहीं है और इसी का फायदा उठाते हुए या यूं कहें मीडिया की आंखों से बचते हुए अखिलेश अंदर के दरवाजे से ही नेताजी से मिलने पहुंच गए।

आखिर कैसे बिगड़ गयी बात?

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पिता पुत्र में तकरीबन एक घंटे 45 मिनत तक लंबी बात चली। मीडिया में सुलह वाली हैडलाइन भी जमकर शोर कर रही थी तो वहीं इन सबके बीच अखिलेश अपनी मर्सीडीज गाड़ी में मुलायम सिंह के घर से निकले। बाहर खड़े कार्यकर्ताओं को देख कर हाथ हिलाया और आगे चल दिए।

जो खबरें सुलह की सुर्खियां बटोर रही थी तभी वो कलह जारी वाली हैडलाइनस के साथ शोर करने लगी यानि मीटिंग में कुछ हासिल नहीं हुआ यानि वहीं ढाक के तीन पात। 

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क्या कुछ हुआ बैठक में ?

बैठक में मुलायम सिंह ने अखिलेश को सीएम चेहरे के साथ साथ टिकट बांटने का अधिकार देने को तैयार हो गये थे। साथ ही फॉर्म पर दस्तखत कर ये भी देने को तैयार थे कि चुनाव चिन्ह अखिलेश बांटेंगे। नेताजी की बस दो ही शर्त थी कि मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने दो और प्रोफ़ेसर पार्टी से बाहर रहेंगे। लेकिन अखिलेश को ये मंजूर नहीं था और आखिर वे नहीं मानें। अखिलेश ने अपने पिता से कहा कि मुझे चुनाव तक अध्यक्ष बने रहने दीजिये, उसके बाद सब आपका है।

इससे पहले अखिलेश और मुलायम सिंह के बीच फोन पर कई बार बातचीत हो चुकी थी। नेताजी अपने भाई शिवपाल को लखनऊ की राजनीती से दूर और अपने सखा अमर सिंह को पार्टी से बाहर करने को तैयार थे। बातचीत सिर्फ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर फंसी थी। नेताजी चाहते थे अखिलेश उपाध्यक्ष बन जाएं। 

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अखिलेश की अपने चाचा रामगोपाल यादव से लंबी बातचीत हुई। तय हुआ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। प्रोफ़ेसर साहेब ने अखिलेश को समझाया ” अगर नेताजी आपको पार्टी से निकाल सकते हैं तो वे आगे भी ऐसा कर सकते हैं। उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

चुनाव चिन्ह कुछ भी मिले। अखिलेश यादव और उनकी टीम अब आगे की तैयारियों में जुट गयी है। कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन लगभग फाइनल है। कुछ छोटी पार्टियों के साथ भी बातचीत हो रही है। टीम अखिलेश अपने उम्मीदवारों की लिस्ट बना रही है. कहां, कब और कितनी चुनावी सभाएं करनी है. प्रचार कैसे होगा इस पर अखिलेश की कोर टीम दिन रात काम कर रही है।

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