CBI और UP पुलिस दोनों ने मिलकर की केस की हत्या, जानें डबल मर्डर मिस्ट्री की कुछ बातें

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। हमारे देश में बहुचर्चित आरुषि हेमराज हत्याकांड आज भी लोगों की जुबान पर है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया है। आज तलवार दंपत्ति अपने घर वापस लौट सकते हैं। करीब चार साल से तलवार दंपत्ति गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे थे। इससे पहले साबीआई की अदालत ने तलवार दंपत्ति को हत्या का आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 

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क्या हुआ था उस दिन
मई 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में शक की सुई नौकर हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद किया गया। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

यूपी पुलिस ने नहीं की ठीक से जांच
देखा जाए तो शुरूआत में जब इस केस की कमान यूपी पुलिस को सौंपी गई था तब, पुलिस ने जांच में लापरवाही की थी । इसके बाद जब जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया तब तक सुबूतों से छेड़छाड़ हो चुकी थी काफी सुबूत नष्ट भी किए जा चुके थे। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ना कहा था कि आज भले ही सीबीआई पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है, पर किसी केस का मेरिट सुबूतों के आधार पर ही बनता और बिगड़ता है। यूपी पुलिस ने शुरुआती सात-आठ दिनों में ही इस केस को खराब कर दिया था।Navodayatimes

जब उठे थे पिता और बेटी के चरित्र पर सवाल 
शुरुआती दो-तीन सालों में सीबीआई अपनी ही जांच से पलटती रही थी। इस केस के पहले जांच अधिकारी यूपी पुलिस के आईजीपी गुरुदर्शन सिंह थे, जिन्होंने राजेश तलवार को गिरफ्तार किया था। गुरुदर्शन सिंह ने ही नोएडा में मीडिया से बात करते हुए पिता और बेटी के चरित्र पर भी सवाल उठाए थे। 

वहीं, इस केस की शुरुआती जांच की कमान संभालने वाले सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार ने 10 दिन के भीतर ही राजेश तलवार के तीन नौकरों कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को गिरफ्तार किया और राजेश तलवार को रिहा कर दिया था।

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क्लोजर रिपोर्ट में नहीं था कोई साक्ष्य
इस केस ने नाटकिय मोड़ तब आया जब सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार की जगह एजीएल कौस तो सितंबर 2009 में जांच का जिम्मा सौंपा गया। कौल ने जांच की चार्द संभालते हुए जांच की दिशा तलवार दंपत्ति की ओर मोड़ दी थी।

लेकिन दिसंबर 2010 में जांचकर थक चुकी सीबीआई ने कोर्ट में एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, सीबीआई ने यह कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी कि हत्या में कोई साक्ष्य नहीं मिला, फिर भी सीबीआई को राजेश तलवार पर ही इस हत्याकांड को अंजाम देने का शक है। इस रिपोर्ट के खिलाफ तलवार दंपत्ति कोर्ट गए थे। इस पर सीबीआई के तत्कालीन जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने सीबीआई को दोबारा जांच करने का आदेश दिया

इस बीच तलवार दंपत्ति निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और जेल से अंदर-बाहर होते रहे। कहीं अपील खारिज होती तो कहीं सीबीआई की फटकार लगती। कुल मिलाकर जनवरी 2011 से लेकर 25 नवंबर 2013 तक गाजियाबाद की विशेष अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ट्रायल चलता रहा। आखिरकार 25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने आरुषि और हेमराज की हत्या का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई।Navodayatimes

सीबीआई की रिपोर्ट में था प्रतिवाद

साल 2014 में तलवार दंपत्ति फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट  गए। इसी साल 11 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा।

1 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपील दोबारा से सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दलीलों में काफी विरोधाभास है। दोबारा दलील सुनने के बाद कोर्ट ने 8 सितंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रख लिया और 12 अक्टूबर को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया।

अब सबके मन में दो सवाल उठ रहे हैं, सबसे पहला और अहम तो ये कि आरुषि-हेमराज को किसने मारा? दूसरा, अगर मारा तो क्यों मारा? यूपी पुलिस से लेकर सीबीआई तक के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है।
देखा जाए तो पूरा मामला केवल संदेहों और मान्यताओं के आधार पर ही चल रहा था। सीबीआई ने पिछले 9 सालों से इस केस में एक से बढ़ कर एक कहानियां गढ़ी, जिन्हें कोर्ट ने आखिरकार खारिज कर दिया।

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आरुषि के दोस्तों का मानना है कि उसके माता पिता ने उसकी हत्या नहीं की है। इस वजह से  साल 2013 में निचली अदालत से डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को उम्रकैद की सजा मिलने के दौरान दोस्तों ने एक जस्टिस फोर आरुषि तलवार नाम से वेबसाइट बनाई थी। जिस पर उन्होंने आरुषि से जुड़ी अपनी यादों को भी साझा किया था। अब इलाहाबाद हाइकोर्ट की ओर से तलवार दंपत्ती को निर्दोष करार देने के बाद दोस्त खुश हैं। दोस्तों का यह भी कहना है कि हत्या के पीछे जो तर्क दिए गए थे, वह भी ठीक नहीं थे। 

क्या कहा था इलाहाबाद हाईकोर्ट ने
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के न्यायाधीश को आड़े-हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने कल्पनाशीलता के आधार पर काम करते हुए एक फिल्म निर्देशक के जैसा बर्ताव किया और कानून के बुनियादी सिद्धांतों की उपेक्षा की। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की पीठ ने निचली अदालत के न्यायाधीश की ओर से की गई गलतियों, त्रुटिपूर्ण कदमों और काल्पनिक नतीजों का उल्लेख किया है।

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उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने अपने आदेश में कहा कि श्याम लाल ने अपने हिसाब से चीजों को पूर्वाग्रह की दृष्टि से देखा, काल्पनिक दृष्य बनाते हुए निष्कर्ष पर पहुंचे तथा तथ्यों को लेकर अनुमान लगाया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि तलवार दंपति को दोषी ठहराने के लिए पारिस्थितिजनक साक्ष्य अपर्याप्त थे और उनको संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।उसने कल तलवार दंपति को बरी कर दिया। साल 2008 में आरुषि और हेमराज की हत्या की गई थी। आरुषि राजेश और नुपुर की बेटी थी और हेमराज घरेलू सहायक था। 

जानिए केस में कब क्या हुआ?

  • 16 मई 2008- दन्त चिकित्सक राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि व उनके घरेलू नौकर हेमराज की हत्या।
  • 17 मई 2008- पड़ोसी की छत से हेमराज का शव बरामद।
  • 23 मई 2008- आरुषि के पिता राजेश तलवार गिरफ़्तार।
  • 24 मई 2008- यूपी पुलिस ने राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त माना।
  • 29 मई 2008- मुख्यमन्त्री मायावती ने सीबीआई जांच की सिफारिश की।
  • जून 2008- सीबीआई ने जांच शुरू कर एफ़आईआर दर्ज़ की।
  • 12 जुलाई 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा किया गया।
  • सितम्बर 2008- सबूतों के अभाव में राजेश तलवार के सहायक और दो नौकरों को भी रिहा कर दिया गया।
  • 9 फ़रवरी 2009- तलवार दम्पति पर हत्या का मुकदमा दर्ज।
  • जनवरी 2010- राजेश और नूपुर के नार्को टेस्ट की इजाजत मिली।
  • दिसम्बर 2010- 30 महीने तक चली जाँच के बाद सीबीआई ने अदालत को क्लोजर रिपोर्ट सौंपी।
  • 25 जनवरी 2011- नए सिरे से जांच की मांग को लेकर राजेश तलवार पर कोर्ट परिसर में हमला हुआ।
  • 12 अप्रैल 2011- नूपुर की जमानत पर सुनवाई से उच्चतम न्यायालय ने मना कर दिया।
  • 6 जनवरी 2012- उच्चतम न्यायालय ने तलवार दम्पति पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया।
  • 30 अप्रैल 2012- नूपुर तलवार को भी गिरफ़्तार किया गया।
  • जून 2012- अदालत के निर्देश पर फिर से सुनवाई शुरू हुई।
  • 25 सितम्बर 2012- नूपुर तलवार की रिहाई का आदेश जारी हुआ।
  • 24 अप्रैल 2013- सीबीआई ने राजेश तलवार पर हत्या का आरोप लगाया।
  • 11 जून 2013- गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू किये गये।
  • 12 नवम्बर 2013- मुकदमें की अन्तिम सुनवाई पूर्ण हुई।
  • 25 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को अपनी पुत्री आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी करार दिया गया।
  • 26 नवम्बर 2013- नूपुर एवं राजेश तलवार को उम्रक़ैद की सजा।
  • 12 अक्टूबर 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी किया और उम्रकैद की सजा रद्द की। 
  • 16 अक्टूबर 2017- आज हो सकती है तलवार दंपत्ति की रिहाई। 

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