अमेरिका में मुस्लिम विरोधी घृणा अपराध काफी बढ़े

Navodayatimesनई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अमेरिका में विदेशियों के खिलाफ घृणा अपराध को रोकने के लिए सख्त कानून हैं लेकिन हाल में इन वारदात में अचानक बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद अमेरिका  भारतीय छात्रों के लिए एक सुरक्षित जगह है।

अमेरिका में घृणा अपराध के एक अग्रणी विशेषज्ञ मार्क पोटोक के मुताबिक 2001 में अमेरिका में अलकायदा द्वारा किए गए भीषण आतंकवादी हमलों के बाद से खासकर मुसलमानों के खिलाफ घृणा अपराध के मामले काफी बढ़े हैं लेकिन इनकी चपेट में सिख समुदाय के लोग इसलिए आ रहे हैैं कि उन पर हमला करने वाले उन्हें मुसलमान समझ लेते हैं। 

हाल में अमेरिका में कई सिखों पर हुए हमले के बारे में मार्क पोटोक ने कहा कि मुसलमान विरोधी घृणा गुटों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। यहां अमेरिका दूतावास द्वारा आयोजित वीडियो के जरिये एक बातचीत में मार्क पोटोक ने कहा कि पिछले राष्ट्रपति चुनावों के दौरान विदेशी आव्रजकों के खिलाफ हुए हमलों की वजह राजनीतिज्ञों द्वारा उनके खिलाफ माहौल खड़ा करना भी था। पोटोक ने बताया कि गत 18 मार्च को पिटसबर्ग के एक रेस्तरां में हुए एक भारतीय पर  हमला इसलिये हुआ कि हमलावर ने उसे मुस्लिम समझ लिया।

घृणा अपराध के मामले बढऩे में राजनीतिज्ञों की भूमिका के बारे में पोटोक ने कहा कि पिछले दशक  के अंत में राष्ट्रपति जार्ज बुश ने अमेरिकियों से कहा था कि मुसलमान अमेरिका विरोधी नहीं हैं। इससे साफ है कि राजनीतिज्ञ इसे रोकने में भी भूमिका निभा सकते हैं। इसके बाद से मुसलमान विरोधी हिंसा में भारी कमी आई लेकिन जब मुसलमानों ने न्यूयार्क में वल्र्ड ट्रेड सेंटर के पास ही इस्लामिक सेंटर ने आतंकवादी हमला करने वालों को सराहा तो इसकी काफी प्रतिकूल प्रतिक्रिया हुई।    

 पनामा मामला- नवाज और बेटों को ज्वाइंट कमेटी के सामने पेश होना होगा

पोटोक ने बताया कि अमेरिका में कुल होने वाले घृणा अपराधों में 67 प्रतिशत मुसलमान विरोधी भावना से जुड़ेे थे। पिछले राष्ट्रपति चुनावों के तुरंत बाद मुसलमानों के खिलाफ घृणा अपराध अचानक  काफी बढ़े।

खासकर मस्जिदों पर हमले की कई वारदात हुईं। 2001 में न्यूयार्क ट्रेड सेंटर पर अलकायदा के हमले के  बाद मुसलमानों के खिलाफ घृणा अपराध में 16 सौ प्रतिशत की बढोतरी दर्ज की गई है। पोटोक ने आंकड़े देकर  बताया कि 2002 से 2012 के बीच पूरे अमेरिका में औसत 2,60,000 घृणा अपराध हुए जब कि केवल 2012 के दौरान ही इनकी संख्या काफी अधिक यानी 2,94,000 थी। पोटोक ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ घृणा अपराध एक नई बात है।

2015 में अमेरिका में एशियाईयों के खिलाफ 111 मामले हुए , 2016 में यह बढृकर 131 हो गया। इसमें से हिंदू विरोधी पांच और सिख विरोधी छह  वारदातें हुईं। इसी तरह यहूदी और मुस्लिम समुदायों के बीच भी आपराधिक हिंसा के मामले देखे जाते हैं। पोटोक ने बताया कि घृणा अपराध बढऩे में सोशल मीडिया की भी एक उल्लेखनीय भूमिका है।

स्नैपचैट के बयान के बाद बोले मार्क जुकरबर्ग, फेसबुक सिर्फ अमीरों के लिए नहीं

सोशल मीडिया की वजह से घृणा अपराध करने वाले प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि साउथ केरोलाना में हुए एक मामले का दोषी वाकई में इंटरनेट के जरिये ही जानकारी हासिल कर रहा था और गुस्से में आ कर उसने घृणा अपराध किया। 

पोटोक ने बताया कि अमेरिका में घृणा अपराध रोकने के लिये 1968 में नागरिक अधिकार कानून बना था जिसमें घृणा अपराध करने वालों की सजा का प्रावधान सामान्य अपराध करने वालों से काफी अधिक तय की गई थी।

अमेरिका के 50 में से 45 राज्यों ने इस कानून को अपना लिया है। पोटोक ने बताया कि घृणा अपराध की वजह से समुदाय आपस में धार्मिक आधार पर बंट जाते हैं। 
उन्होंने कहा कि अक्सर घृणा अपराधों को अदालत में साबित करना मुश्किल होता है लेकिन पुलिस इनकी  घृणा अपराध करने वालों से सख्ती से निबटती है। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

FacebookGoogle+TwitterPinterestredditDigglinkedinAddthisTumblr

ताज़ा खबरें