OMG! भारत के इस शहर में आलू-प्याज से भी सस्ते बिकते हैं काजू

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। काजू की बता करें तो लगभग सबको पसंद होता है। चाहे वह ड्राई  फ्रूट में या काजू की कोई भी मिठाई सबको ही पसंद होती है लेकिन समस्या यह होती है कि काजू को खरीदने के लिए अपनी जेबें जरूर ढीली करनी पड़ती है।

लेकिन अगर हम आपको कहे कि काजू आपको आलू और प्याज से भी कम कीमत पर मिल सकते है तो क्या आप विश्वास करेगें। शायद नहीं क्याेंकि ये हैरानी कि बात है कि 800 सौ रूपये किलो मिलने वाले काजू को काेई कैसे 10 या 12 रूपये किलो दे सकता है।

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लेकिन यह सच है कि झारखंड में काजू बेहद ही सस्ते हैं। जामताड़ा जिले में 10 से 12 रूपये किलो मिलते हैं। जामताड़ के नाला में लगभग 49 एकड़ इलाके  में काजू के बागान हैं। बागान में काम करने वाले बच्चे और महिलाएं काजू को बहुत सस्ते दाम में बेचते हैं। काजू की फसल में फायदा होने के कारण लोगों को इस तरफ रूझान ज्यादा है। 

सबसे ज्यादा दिलचस्प बात तो यह है कि जामताड़ा में काजू की इतनी बड़ी फसल मात्र चंद दिनों की मेहनत के बाद ही शुरू हुई है। जामताड़ा कें पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू खाना बहुत पसंद था। यही वजह थी कि वह चाहते थे कि जामताड़ा में काजू के बागान बन जाये ताकि उन्हें ताजे और सस्ती काजू खाने को मिलें।

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इसी वजह से कृपानंद झा ओडिशा में काजू की खेती करने वाले से मिले। उन्होंने कृषि के वैज्ञानिकों से जामताड़ा के जमीन के बोर में पता किया और काजू की बागवानी शुरू कर दी और महज चंद दिनों मे ही काजू की खेती बड़े पैमाने पर होने लगी। 
कृपानंद के यहां से जाने के बाद निमाई चन्द्र को घोष एंड कंपनी को तीन लाख में तीन साल के लिए बागान की जिम्मेदारी सौप दी है। अनुमान के मुताबिक यहां हर साल हजारों क्विंटल काजू होते हैं और देखरेख न हो पाने के कारण यहां से गुजरने वाले काजू तोड़ ले जाते हैं। 

इस कारण काजू के बागानी में लगे लोगों ने राज्य सरकार से फसल की सुरक्षा के लिए कई बार गुहार लगाई है, पर खास ध्यान नहीं दिया गया। पिछले साल सरकार ने नाला इलाके में 100 हेक्टेयर भूमि पर काजू के पौधे लगाए जाने की बात कही थी। पौधारोपण की सारी तैयारियां विभाग ने पूरी कर ली। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत काजू के पौधे लगाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को दी। लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है। 

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