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स्वच्छता और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर एक नई पहल, गोबर के उपलों से दाह संस्कार

  • Updated on 9/28/2019

आज विश्व भर में पेड़ों के अंधाधुंध कटान के कारण पर्यावरण को पहुंच रही क्षति को लेकर भारी चिंता व्यक्त की जा रही है और पर्यावरण तथा  पेड़ों को बचाने के उपाय तलाश किए जा रहे हैं। चूंकि हिंदू धर्म में मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है और इसके लिए पेड़ों को काटना जरूरी होता है, लिहाजा महाराष्ट्र के उल्हासनगर में पहली बार अंतिम संस्कार के लिए गाय के गोबर से बने उपलों के इस्तेमाल की दिशा में पहल की गई है।

 इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए ‘धन गुरु नानक दरबार’ के संत बाबा थाहिरिया सिंह, जसकीरत सिंह तथा त्रिलोक सिंह ने सोचा कि क्यों न गाय के गोबर को सदुपयोग में लाने के इरादे से इससे उपले बना कर उससे मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाए। इसी उद्देश्य से ‘धन गुरु नानक दरबार’ ने गाय के गोबर से बने उपलों से शव का दाह संस्कार करने की योजना शुरू की है जिसका 18 सितम्बर को शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने उद्घाटन किया। 

‘दरबार’ के अनुसार जहां गाय के गोबर से बने उपले एक ओर  हिंदू संस्कृति के अनुसार मृतक को मुक्ति प्रदान करेंगे वहीं लकड़ी का प्रयोग न करने और पेड़ न काटने से पर्यावरण को भी दूषित होने से बचाया जा सकेगा।  
उल्लेखनीय है कि उल्हासनगर के अनेक मंदिरों के अलावा कई अन्य गौशालाओं में हजारों गाय हैं जिनसे इतनी अधिक मात्रा में गोबर निकलता है कि उसे फैंकने का इंतजाम करना कठिन हो गया है। कुछ गोबर किसान खेत में डालने के लिए ले जाते हैं लेकिन बचा हुआ गोबर नालों में बहाना पड़ता है।

 इस योजना के अंतर्गत अब उल्हासनगर की सभी गौशालाओं के गोबर का प्रयोग कर यहां के चारों मुक्तिधामों में लाए जाने वाले मृतकों का अंतिम संस्कार करने से जहां लकड़ी की बचत होगी वहीं पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी और सीवरेज जाम होने की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी। अन्य स्थानों पर भी ऐसा ही प्रयोग करके जहां गोबर का सही उपयोग हो सकेगा वहीं स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

- विजय कुमार

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