Wednesday, Apr 14, 2021
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army will get more strength by amending chinese defense laws aljwnt

चीनी रक्षा कानूनों में संशोधन से सेना को मिलेगी और ताकत

  • Updated on 1/8/2021

विश्व की बड़ी सैन्य शक्ति रखने वाले देशों की जब बात चलती है तो चीन सरे-फेहरिस्त आता है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन विश्व की सबसे बड़ी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पी.एल.ए.) रखता है। जिसके कुल सैनिकों की संख्या 28 लाख के करीब है। 

गत दिनों चीन (China) ने अपने रक्षा कानूनों में जो संशोधन किए हैं, उस के चलते आज वह मीडिया में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने चीन के नैशनल डिफैंस लॉ में बदलाव के आदेश पर पिछले दिनों हस्ताक्षर किए हैं। जिसके नतीजे में अब सैंट्रल मिलिटरी कमिशन (सी.एम.सी.) के पास राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना को तैनात करने की अधिक शक्तियां होंगी। यहां उल्लेखनीय है कि दरअसल राष्ट्रपति जिनपिंग ही सी.एम.सी. के प्रमुख हैं। 

‘संवाद हो तो समाधान निकलेगा’

चीन की न्यूज एजैंसी शिन्हुआ के हवाले से खुलासा करते हुए बताया गया है कि नए बदलाव युद्ध की तैयारी और क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं। इन रक्षा कानूनों में संशोधन के बाद चीन की सेना के दायरे को भौगोलिक सीमाओं, समुद्री सीमाओं और वायुक्षेत्र के बाहर इलैक्ट्रोमैग्नेटिक नैटवर्कों और बाहरी अंतरिक्ष तक बढ़ाने के प्रावधान हैं। विशेषज्ञों की राय में नए संशोधित कानून सैन्य नीति तैयार करने में राज्य परिषद की भूमिका को कमजोर करते हैं अथवा यह सीएमसी को निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं। ‘दक्षिण चीन मॉॄनग पोस्ट’ के मुताबिक सशस्त्र बलों को जुटाने और तैनात करने के आधार के रूप में पहली बार ‘विकास हितों’ और ‘विकास हितों की सुरक्षा’ को कानून में शामिल किया गया है। 

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रक्षा माहिरों के अनुसार कानून में इन बदलावों का बड़ा मकसद चीन की सेना के आधुनिकीकरण की रफ्तार को और अधिकतर बढ़ाना या गति देना हो सकता है। उल्लेखनीय है कि चीन की सेना की वैस्टर्न थिएटर कमांड भारत के साथ लगने वाली सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है और यह चीन की सेना की सबसे बड़ी कमान भी मानी जाती है। नए संशोधन के अंतर्गत ‘जब भी संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा या विकास के हित ख़तरे में होंगे तो वह राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सेना की तैनाती कर सकेगा। 

‘अमर’ होना है तो करें ‘अंगदान’

इस के साथ ही ‘विकास के हित’ संदर्भ को कानून में नया जोड़ा गया है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि इसके तहत अब चीन के आॢथक हितों और विदेशों में संपत्तियों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। अर्थात बैल्ट एंड रोड अभियान के तहत आने वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भी सेना की तैनाती की जा सकेगी। यहां काबिले जिक्र है कि इस संदर्भ में इस पहले साल 2016 में भी राष्ट्रपति जिनपिंग ने बड़े सुधार करते हुए पीपल्स लिबरेशन आर्मी (चीन की सेना पी.एल.ए.) के कई विभागों को सी.एम.सी. के सीधे नियंत्रण में लिया था। जिस के अंतर्गत सात सैन्य क्षेत्रों का पुनर्गठन करके उन्हें पांच थिएटर कमांड में तबदील कर दिया गया था। 

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दूसरी ओर भारत के प्रति चीन की सैन्य आक्रामकता की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव अमरीका में द्विदलीय संसदीय समिति से पारित होने के बाद अब कानूनी शक्ल अख्तियार कर गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार उक्त प्रस्ताव अमरीका के 740 बिलियन डॉलर के रक्षा नीति बिल में शामिल है। ट्रम्प ने बिल पर वीटो लगा दिया था। वीटो को संसदीय समिति ने रद्द कर कानून का रूप दे दिया है। राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकार एक्ट के पारित होने के बाद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि उनका चीन संबंधी प्रस्ताव भी कानून में शामिल हो गया है। यहां उल्लेखनीय है कि इस से पहले कृष्णमूर्ति ने ही चीन की भारत के प्रति एलएसी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य आक्रामकता की निंदा का प्रस्ताव पेश किया था।

-मोहम्मद अब्बास धालीवाल

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