Sunday, Feb 18, 2018

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले बसपा का जनता दल (एस) से गठजोड़

  • Updated on 2/12/2018

 यह आश्चर्यजनक बात है कि विपक्षी दलों की बैठक में से एक प्रमुख विपक्षी पार्टी ‘बसपा’ अनुपस्थित थी। मायावती ने राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है और समाजवादी पार्टी यह उम्मीद लगाए हुए है कि वे 2019 के आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लेकर यू.पी. में संयुक्त रूप में चुनाव लड़ेंगे लेकिन  कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को मायावती के व्यवहार से उस समय गहरा झटका लगा जब गत सप्ताह यू.पी.ए. चेयरपर्सन सोनिया गांधी द्वारा  बुलाई गई मीटिंग में न तो वह स्वयं पहुंचीं और न ही उनका प्रतिनिधि उपस्थित था।

जब विपक्षी पाॢटयों ने राज्यसभा में आधे दिन के बायकाट की घोषणा की तो भी बसपा का न तो कोई सांसद और न ही कोई नेता उनमें शामिल था। इसके अलावा 15 विपक्षी पाॢटयों द्वारा न्यायमूॢत लोया के मुद्दे पर भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन पर भी बसपा के किसी सांसद ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।

वर्तमान में मायावती ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाले कर्नाटक के जनता  दल (सैकुलर) के साथ गठबंधन बना लिया है। यह गठबंधन कांग्रेस के विरुद्ध लडऩे के लिए ऐन उस समय बनाया गया है जब वह भाजपा के साथ टक्कर में उतरी हुई है। बसपा और जद (एस) का गठबंधन कांग्रेस की वोट शक्ति को प्रभावित करेगा। 

निर्णायक बात यह भी है कि यदि यू.पी. के आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस और बसपा संयुक्त रूप में नहीं लड़े जाते तो दोनों को ही नुक्सान होगा क्योंकि एक सीट समाजवादी पार्टी को मिल जाएगी। यू.पी. में भाजपा इस स्थिति में है कि वहां वह अकेले दम पर 10 में से 8 राज्यसभा सीटें जीत सकती है। यदि कांग्रेस-बसपा-सपा इन चुनावों में संयुक्त रूप में उतरते हैं तो वह 2 सीटें जीत सकते हैं और यदि वे एकजुट नहीं होते तो केवल एक ही सीट जीत पाएंगे। मायावती इन चुनावों में किस से गठबंधन बनाएगी, यह अभी तक एक रहस्य ही है।

जेल में बंद लालू की रणनीति

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपनी कार्य समिति की घोषणा कर दी है। पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष के रूप में राबड़ी देवी ही इस कार्य समिति का नेतृत्व करेंगी। राजद का शक्ति परीक्षण अररिया लोकसभा सीट के उपचुनाव में होगा। यह सीट मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन के कारण खाली हुई थी और इस पर चुनाव 11 मार्च को होगा।

यह चुनावी दंगल नीतीश कुमार की भी अग्नि परीक्षा होगा जिन्हें अभी-अभी केन्द्र सरकार द्वारा जैड प्लस सिक्योरिटी प्रदान की गई है। यही चुनाव यह फैसला लेने का समय है जब राजद प्रमुख जेल में बैठे हुए हैं, (वहीं से उन्होंने राबड़ी देवी के नेतृत्व में रघुवंश प्रसाद सिंह, शिवानंद तिवारी, मोहम्मद इलियास एवं मंगणी लाल मंडल पर आधारित कार्यसमिति की घोषणा की है) तो 2019 के आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार का नेतृत्व कौन करेगा? ऐसी कानाफूसियां हो रही हैं कि बिहार में नीतीश कुमार और भाजपा के साथ गठबंधन तथा राजद-कांग्रेस गठजोड़ के बीच कांटे की टक्कर होगी।

शीला दीक्षित से आशीर्वाद के अभिलाषी अजय माकन

दिल्ली के 20 विधानसभा हलकों में होने जा रहे उपचुनाव के मद्देनजर कांग्रेस को एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की जरूरत पड़ गई है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन हालांकि उनके कड़े आलोचक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं लेकिन इन विधानसभा उपचुनावों के लिए उन्हें शीला से राजनीतिक परामर्श लेने और विचार-विमर्श करने के लिए उनके घर जाना पड़ा। 

शीला दीक्षित लगातार 15 वर्ष तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही हैं और उन्होंने दिल्ली का न केवल विकास किया बल्कि उनके कार्यकाल के दौरान इसका सम्पूर्ण कायाकल्प हो गया। अजय माकन द्वारा दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद दिल्ली कांग्रेस  के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द्र सिंह लवली, पूर्व प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष बरखा सिंह और अमरीश गौतम कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे समाचार आ रहे हैं कि कांग्रेस हाईकमान पार्टी को एकजुट करना चाहती है और अजय माकन यह चुनाव शीला दीक्षित के मार्गदर्शन में लड़ेंगे।

राष्ट्रपति को 15 विपक्षी दलों का ज्ञापन

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 15 विपक्षी पाॢटयों के प्रतिनिधिमंडल ने 9 फरवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भेंट की और एक ज्ञापन प्रस्तुत किया जिस पर इन पाॢटयों के 114 सांसदों के हस्ताक्षर थे। इन पाॢटयों ने सी.बी.आई. के विशेष जज बी.एच. लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु और बाद में उनके 2 विश्वस्त साथियों की भी इसी तरह की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीमकोर्ट की देखरेख में जांच करवाने की मांग की है। राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल को विश्वास दिलाया कि वे इस मामले का संज्ञान लेंगे।

बिहार कांग्रेस को नए अध्यक्ष की तलाश

बिहार में गत वर्ष महागठबंधन के पतन के बाद कांग्रेस में कौकब कादरी को अशोक चौधरी के स्थान पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आने तथा 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी को नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करना होगा। इस संबंध में पार्टी नेतृत्व ने पहले ही बिहार कांग्रेस के कार्यकत्र्ताओं से रिपोर्ट मांगी है।

कांग्रेस प्रवक्ता प्रेम चंद मिश्रा, अनिल शर्मा और बिहार में राबड़ी नीत सरकार में स्वास्थ्य विभाग के कैबिनेट मंत्री एवं मनमोहन सिंह की केन्द्रीय सरकार में 2004 में कैबिनेट मंत्री व संचार एवं सूचना टैक्नोलॉजी मंत्रालय के साथ-साथ गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री रह चुके डा. शकील अहमद के नामों को लेकर चर्चा गर्म है। शकील अहमद मार्च 2011 में झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के प्रभारी भी नियुक्त किए गए थे। इस संबंध में अंतिम फैसला राहुल गांधी द्वारा लिया जाना है।

25 फरवरी से शुरू होगी हुड्डा की रथयात्रा

हमारे सूत्रों के अनुसार हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्द्र सिंह हुड्डा 25 फरवरी को होडल नगर से रथयात्रा शुरू करेंगे। इस यात्रा दौरान वह हरियाणा सरकार की जनविरोधी नीतियों तथा हरियाणा में बढ़ते अपराधों के मुद्दे पर लोगों से सीधे बातचीत करेंगे। यह यात्रा हरियाणा के प्रत्येक जिले में जाएगी। रथयात्रा के संयोजक के अनुसार पूर्व विधायक और सांसद भी इस रथयात्रा में उपस्थित रहेंगे। ऐसी अटकलें गर्म हैं कि यह रथयात्रा आगामी विधानसभा एवं लोकसभा चुनावी तैयारी की कवायद है।

राहिल नोरा चोपड़ा

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