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Bird Flu Havoc in between of coronavirus aljwnt

कोरोना महामारी के बीच ‘बर्ड फ्लू’ का कहर

  • Updated on 1/9/2021

कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच देश में पिछले कुछ दिनों से लगातार सामने आ रहे बर्ड फ्लू (Bird Flu) के मामले काफी चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहे हैं। चिंताजनक इसलिए क्योंकि 30 सितम्बर 2020 को ही भारत को ‘बर्ड फ्लू’ की बीमारी से मुक्त देश घोषित किया गया था और कोरोना महामारी के बीच बर्ड फ्लू का संक्रमण कोरोना से भी कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। मुर्गे-मुर्गियों में एच5एन1 वायरस मिलता रहा है लेकिन कौओं में बर्ड फ्लू के एच5एन8 वायरस की पुष्टि भी हुई है। 

भोपाल की हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब में राजस्थान, केरल तथा मध्य प्रदेश के पक्षियों के सैंपल पॉजिटिव मिले हैं, जिनमें बर्ड फ्लू के एच5एन8 वायरस मिले हैं जबकि हिमाचल के सैंपल में एच5एन1 वायरस पाए गए हैं। कई राज्यों में कौओं, मुर्गियों तथा अन्य पक्षियों की मौतें हो रही हैं जबकि केरल में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद बड़े पैमाने पर मुर्गों और बत्तखों को मारा जा रहा है।

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हरियाणा में तो पिछले दो सप्ताह में ही चार लाख से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो जाने से हड़कंप मचा है। कई अन्य राज्यों में भी अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, केरल सहित कुछ राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है ताकि प्रत्येक राज्य के सम्पर्क में रहा जा सके। 

हालांकि सरकार का कहना है कि सर्दियों में आए प्रवासी पक्षियों की वजह से यह बीमारी फैली है और फिलहाल बर्ड फ्लू के जरिए इंसानों में संक्रमण फैलने का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन फिर भी इसे कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। दरअसल दुनियाभर में पिछले एक वर्ष में कोरोना वायरस से करीब 19 लाख लोगों की मृत्यु हुई और कोरोना से मृत्युदर फिलहाल लगभग तीन फीसदी है लेकिन माना जाता है कि बर्ड फ्लू से संक्रमित मरीजों की मृत्युदर 60 फीसदी तक होती है, जो कोरोना से 20 गुना ज्यादा है। 

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दरअसल बर्ड फ्लू के कुछ स्ट्रेन (एच5एन1 और एच7 एन1) इंसानों के लिए काफी खतरनाक होते हैं जबकि बाकी स्ट्रेन पक्षियों तथा कुछ स्तनधारी पशुओं को भी पीड़ित कर सकते हैं। यह संक्रमण कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2003 से 2019 के बीच करीब डेढ़ हजार लोगों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई, जिनमें से पूरे इलाज के बावजूद करीब छह सौ लोगों को बचाया नहीं जा सका। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों की आंख, गर्दन तथा सिर में सूजन, आंखों से रिसाव और कलगी व टांगों में नीलापन आ जाता है। 

बर्ड फ्लू (पक्षियों का बुखार) को ‘एवियन इन्फ्लूएंजा’ नाम से भी जाना जाता है, जो एक वायरल संक्रमण है। यह बीमारी एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस ‘एच5एन1’ की वजह से ही होती है, जो पक्षियों से मनुष्यों तक पहुंचता है। पक्षियों से एक-दूसरे में फैलने वाले वाला यह वायरस बेहद संक्रामक होता है, जिसके कई स्ट्रेन होते हैं लेकिन सबसे खतरनाक स्ट्रेन एच5एन1 माना जाता है, जिससे संक्रमित लोगों में से आधे से ज्यादा की मौत हो जाती है। इंफ्लूएंजा के कुल 11 वायरस ऐसे हैं, जो इंसानों को संक्रमित करते हैं लेकिन इनमें से पांच (एच5एन1, एच7एन3, एच7एन7, एच7एन9 और एच9एन2) ऐसे हैं, जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। 

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दुनियाभर में अब तक चार बार बर्ड फ्लू बड़े पैमाने पर फैल चुका है। पिछले 14 वर्षों में एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस के 65 बार संक्रमण फैलने के मामले सामने आ चुके हैं। 2008 में तो चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा वियतनाम में एच5एन1 वायरस ने कुल 11 बार संक्रमण फैलाया। एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस के दो स्ट्रेन हैं, नॉर्थ अमेरिकन ‘लो पैथोजैनिक एवियन इन्फ्लूएंजा एच5एन1’ तथा एशियन लीनिएज ‘हाइली पैथोजैनिक एवियन इन्फ्लूएंजा एच5एन1’, जिनमें एशियन लीनिएज ज्यादा खतरनाक है। 

बर्ड फ्लू से संक्रमित होने के बाद आमतौर पर 2-8 दिनों के बाद इसके लक्षण प्रकट होते हैं। इन लक्षणों में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण ही देखे जाते हैं, जैसे कफ, डायरिया, तेज बुखार, खांसी, गले की खराश, नाक बहना, मितली, उल्टी, बेचैनी, सिरदर्द, सीने में दर्द, जोड़ों का दर्द, पेट दर्द, आंखों का संक्रमण इत्यादि। संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया हो सकता है और सांस की परेशानी भी बढ़ सकती है। बर्ड फ्लू संक्रमण की वजह से होने वाला निमोनिया प्राय: काफी घातक होता है। संक्रमित मरीजों को विशेष देखभाल के तहत इलाज की जरूरत होती है, जिनका इलाज अस्पताल में रखकर ही किया जाता है। यह वायरस भी मुंह, नाक व आंख के जरिए ही शरीर में प्रवेश करता है, इसलिए कोरोना काल में पहली से अपनाई जा रही सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। 

एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस के इलाज के लिए कुछ वैक्सीन तो बनी हैं लेकिन उन्हें ब्रिटेन, अमरीका, फ्रांस, कनाडा जैसे कुछ देशों ने अपने पास जमा करके रखा है। अमरीका में एफ.डी.ए. ने भी वर्ष 2007 में बर्ड फ्लू की वैक्सीन को मंजूरी थी लेकिन वह वैक्सीन भी सहजता से उपलब्ध नहीं है। भारत में बर्ड फ्लू की कोई वैक्सीन नहीं है लेकिन चिकित्सकीय परामर्श के बाद बर्ड फ्लू संक्रमण से बचाव के लिए फ्लू की वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है।

-योगेश कुमार गोयल

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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