Tuesday, Jan 25, 2022
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blog on migrant workers who are returning back to their homes in lockdown aljwnt

जरूरतमंदों तथा प्रवासियों की तरफ ‘उदार’ होने की आवश्यकता

  • Updated on 4/16/2020

मुंबई में विश्व के सबसे बड़े झुग्गी-झोंपड़ी वाले इलाके धारावी के 2.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में करीब 8.5 लाख लोग रहते हैं जोकि इस ग्रह पर सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र है। एक कमरे में 8 से 10 लोग रहते हैं जोकि 10 वर्ग फुट से ज्यादा आकार का कमरा नहीं होता। कोरोना वायरस के फूटने के दौरान आप इन लोगों की दुर्दशा तथा सामाजिक दूरी का अंदाजा लगा सकते हैं। यह समाज का गरीब तबका है जिसमें प्रवासी लोग रहते हैं। ये सब लोग महामारी के बाद अपनी आय के स्रोत खो चुके हैं। यह सबसे बुरा परिदृश्य है। मगर हम उन लाखों गरीब तथा वंचित लोगों के बारे में सोचें जो हमारी जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा हैं। हालांकि आमतौर पर ये ग्रामीण क्षेत्र के गरीब होते हैं जो वंचित तथा महामारी संकट के पीड़ित होते हैं मगर इस बार शहरी क्षेत्र के गरीब भी इस त्रासदी को झेल रहे हैं। इसमें कोई शंका की बात नहीं कि अपनी दुर्दशा के चलते हजारों लोग अपने घरों की वापसी करने के लिए सैंकड़ों मील लम्बा सफर तय कर रहे हैं। धारावी जैसी कालोनियों के कई परिवार जोकि किराए की झुग्गियों में रहते हैं उन्हें उनके आश्रयों को खाली करने के लिए कहा गया है। रेलवे तथा बसों जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मात्र 4 घंटों के भीतर बंद करने के सरकारी निर्णय से इन लोगों की दुर्दशा और बदतर हो गई है।

न रहने को छत, न रोजगार, न जेबों में पैसा है। गांव में उनके परिवार में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इन अभागे लोगों पर विपदा की घड़ी आ गई है। कोरोना वायरस सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी है। लॉकडाऊन को और 19 दिन बढ़ाने के निर्णय ने थोड़ा अचंभित जरूर किया है जिससे ऐसे वंचित तथा गरीब लोगों ने अपना धैर्य खो दिया है। मुम्बई, सूरत, विजयवाड़ा तथा पुणे जैसे स्थानों में बेचैनी व्याप्त हो गई है। ज्यादातर प्रवासी इसे अपनी किस्मत मान रहे हैं। हालांकि वे लोग अपने घरों की वापसी के लिए कशमकश कर रहे हैं।

समाज के ऐसे तबके के कुछ लोगों ने साक्षात्कार के दौरान कहा कि उनके पास खाने को अपर्याप्त खाना है तथा उनको ठहराने के भी उचित इंतजाम नहीं किए गए। ज्यादातर लोगों को गांवों में अपने पारिवारिक सदस्यों की ङ्क्षचता सता रही है। वास्तविक तौर पर यह बेहद ङ्क्षचताजनक बात है जिस पर सरकार को ध्यान देना होगा फिर चाहे केन्द्र या राज्य सरकार हो। सरकारों द्वारा पहले कदम के तहत यह यकीनी बनाया जाए कि सभी गरीब तथा जरूरतमंद लोगों के पास पर्याप्त राशन हो फिर चाहे उनके पास राशन कार्ड हो या न हो। ये लोग चाहे गरीबों की श्रेणी में आएं या न आएं सरकार को उनकी देखभाल करनी होगी। सभी नागरिकों के पास पर्याप्त राशन तथा कुछ जीविका भत्ते भी हों।

हमारे गोदाम चावल तथा गेहूं के स्टाक से भरे पड़े हैं। वास्तव में देश का खाद्यान्न लीकेज के चलते बर्बाद हो रहा है या फिर चूहों तथा अन्य पक्षियों द्वारा खाया जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार के पास 71 मिलियन मीट्रिक टन का खाद्यान्न स्टॉक है जबकि राष्ट्र को 22 मिलियन मीट्रिक टन स्टॉक की दरकार है। इसके अतिरिक्त रबी फसल भी तैयार है। पंजाब, हरियाणा तथा इसके साथ लगते राज्यों के किसानों की मेहनत के चलते अब खाद्य पदार्थों की कोई कमी नहीं है। वे दिन लद गए जब खाद्यान्न की कमी हुआ करती थी।

एक फूड विशेषज्ञ ने टी.वी. पर एक बहस के दौरान कहा कि यदि सरकार सभी ऐसे गरीबों को भी नि:शुल्क राशन बांट दे जोकि बिना राशन कार्ड के हों तो भी निकाले जाने वाला खाद्यान्न 20 मिलियन मीट्रिक टन ही होगा। इस समय सरकार सभी सरप्लस स्टॉक को खोल दे और फ्री राशन बांटने के लिए उदार दिखाई दे। हालांकि किसान फसल की कटाई करने तथा उसके बाद उसको बेचने जैसे संकट को झेल रहे हैं। किसानों को भी पर्याप्त सहूलियतें उपलब्ध करवानी चाहिएं तथा उन्हें वर्तमान संकट से निपटने के लिए उदार लोन दिया जाना चाहिए।

जब खाद्यान्न के विशाल भंडारण को लेकर केन्द्रीय फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्री रामविलास पासवान सवालों से घिर गए तब उन्होंने इससे पल्ला झाड़ते हुए गरीबों की मुश्किलों को कम करने के लिए कोई भी प्रतिबद्धता नहीं जताई।

हालांकि सरकार को निश्चित तौर पर गरीबों तथा फंसे हुए प्रवासियों की जरूरतों को पूरा करना होगा। हमें भी आगे बढ़ कर अपने देश वासियों की मदद करनी चाहिए। सरकारी एजैंसियां कुछ चुङ्क्षनदा क्षेत्रों में अच्छा कार्य कर रही हैं तथा स्थानीय नागरिकों की सहायता भी कर रही हैं। इसके साथ-साथ सामाजिक तथा कल्याण संगठन व धार्मिक संगठन जरूरतमंदों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं- विपिन पब्बी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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