Wednesday, Oct 27, 2021
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चीन को उल्टा पड़ने लगा भारत के खिलाफ पाकिस्तान पर लगाया दांव

  • Updated on 7/17/2021

पाकिस्तान के उत्तरी इलाके में हुए एक बम धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें में 9 चीनी नागरिक थे। यह धमाका एक बस में हुआ था। इस बस में कुल 40 इंजीनियर सवार थे, जिनमें 30 चीनी इंजीनियर भी शामिल थे। यह बस इन सभी इंजीनियरों को लेकर खैबर पख्तूनख्वा के ऊपरी कोहिस्तान जा रही थी, जहां चीन की मदद से बन रहे दासू हाइड्रो पावर प्रोजैक्ट पर काम चल रहा है। इसके पहले चरण का खर्च भारतीय मुद्रा में करीब 35,000 करोड़ रुपए है।

चीन ने पाकिस्तान से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। धमाका इतना जबरदस्त था कि बस नाले में जा गिरी। इसे लेकर जहां पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं चीन भी अपने नागरिकों पर हुए बम हमले से खासा चिंतित है।

यह घटना तालिबान प्रभावित खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुई है, जहां पर तालिबानियों का कहर छाया रहता है। इसके अलावा भी पाकिस्तान में कई दूसरी तंजीमें सक्रिय रहती हैं। बलूचिस्तान का इलाका भी सुरक्षित नहीं है। वहां पर अक्सर बलूचिस्तान लिबरेशन फोर्स का संघर्ष पाकिस्तान की सेना के साथ चलता रहता है। इसके अलावा भी पाकिस्तान में तहरीके तालिबान और पाकिस्तान तालिबान पर वहां के स्थानीय  प्रशासन का शक जा रहा है। 

पाकिस्तान में वैसे तो आतंकवादी हिंसा को अंजाम देते रहते हैं लेकिन यह धमाका ऐसे समय हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले अमरीका ने अफगानिस्तान से खुद को पूरी तरह हटा लेने की घोषणा की है। इसके तुरन्त बाद तालिबान ने वहां ताबड़-तोड़ 85 फीसदी इलाके पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके साथ ही पाकिस्तान तालिबान, अफगान तालिबान और अल-कायदा एक बार फिर सक्रिय हो उठे हैं। अमरीका के अफगानिस्तान से हटने की घोषणा के बाद पाकिस्तान के लोगों में खुशी की लहर दौड़ रही थी, उन्होंने सोशल मीडिया पर कहना शुरू कर दिया था कि हम खुश हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान लौट आया है और इसी खुशी में पाकिस्तानियों ने तालिबान को खुद का गार्जियन तक बता दिया था।

चीन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल इस प्रोजैक्ट को जारी रखना है। चीन ने अपनी बैल्ट एंड रोड परियोजना के तहत अरब सागर में रास्ता खोजने के लिए अपने उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग स्वायत्त प्रांत के काशगर से ग्वादर तक एक सड़क परियोजना की शुरूआत की है, जिस पर 65 अरब अमरीकी डालर का खर्च आएगा। इस परियोजना से चीन अपनी फैक्ट्रियों में तैयार माल को कम समय में उत्तरी, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका, मध्य एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में पहुंचाना चाहता है लेकिन अब चीन को लगने लगा है कि उसकी यह परियोजना कभी पूरी होगी भी या नहीं क्योंकि पूरा पाकिस्तान इस समय अस्थिर चल रहा है।

पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर अब तक जो नीतियां रही हैं, वे अब उसे ही नुक्सान पहुंचा रही हैं। पाकिस्तान ने तालिबान को दो भागों में बांट दिया है, अच्छा तालिबान और बुरा तालिबान, यानी जो पाकिस्तान के पक्ष में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे वह अच्छा तालिबान और अच्छे तालिबान को पाकिस्तान अपनी जरूरत के हिसाब से अफगानिस्तान और भारत के खिलाफ इस्तेमाल भी कर सकता है। वहीं जो उसके विरोध में रहे वह बुरा तालिबान लेकिन इस वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश दोनों को भारी नुक्सान उठाना पड़ा है। 

चीन ने पाकिस्तान में निवेश करने से पहले वहां की स्थिति की छानबीन नहीं की क्योंकि चीन तो पाकिस्तान के बहाने भारत को घेरने की फिराक में था लेकिन अब लगता है कि यह दांव चीन को उल्टा पड़ गया।

इस परियोजना के लिए पाकिस्तान ने सिर्फ चीन से ही कर्ज नहीं लिया, बल्कि विश्व बैंक से भी 70 करोड़ डालर का कर्ज लिया है और सारा पैसा चीन की निर्माण कम्पनी गेजोबा ग्रुप को दे देता हैं। गेजोबा ग्रुप इस समय पाकिस्तान में कई परियोजनाएं पूरी कर रहा है और हजारों की संख्या में चीनी इंजीनियर पाकिस्तान में काम कर रहे हैं और कुछ चीन में रह कर पाकिस्तान के लिए काम कर रहे हैं। 

ऐसे में जब पाकिस्तान इनकी सुरक्षा नहीं कर पाएगा तो फिर चीन के साथ पाकिस्तान का साथ छूटते देर नहीं लगेगी। भले ही चीन में लोकतंत्र नहीं है और वहां के लोग चीनी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते लेकिन चीनी सरकार यह नहीं चाहेगी कि उसके आदमी बेमौत मारे जाएं।

पाकिस्तान ने अपने अहाते में जो सांप भारत के लिए पाले थे वे अब पाकिस्तान को ही डंस रहे हैं। एफ.ए.टी.एफ. की ग्रे लिस्ट में पहले से ही पाकिस्तान का नाम है और उसके ऊपर विदेशी कर्ज के साथ उसकी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था ने पहले ही विदेशी निवेशकों को दूर कर दिया है। 

ऐसे में अगर चीन ने भी साथ छोड़ दिया तो फिर पाकिस्तान कहां जाएगा क्योंकि चीन भले ही पाकिस्तान से यह कहे कि वह उसका सच्चा दोस्त है लेकिन सही बात तो यह है कि चीन कभी किसी देश के साथ घाटे का सौदा नहीं करता।

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