Sunday, Oct 17, 2021
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does modi ji think that casteism is over? musrnt

क्या मोदी जी को लगता है कि जातिवाद खत्म हो गया

  • Updated on 7/16/2021

प्रशासन की वैस्टमिंस्टर प्रणाली में एक प्रधानमंत्री के पास अपनी मंत्रिपरिषद चुनने के पूर्ण अधिकार होते हैं। वह एक या अधिक मंत्रियों को जब जरूरी चाहे हटा भी सकता है तथा जब आवश्यक समझे एक या अधिक मंत्रियों को उसमें शामिल भी कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कुछ आलोचना तथा बहुत-सी टिप्पणियां की जा रही हैं। उन्होंने उनकी संख्या को लगभग 80 तक बढ़ा दिया है, कानून द्वारा दी गई अधिकतम इजाजत।  मेरे अनुसार इसकी मुख्य विशेषता यह है कि उन्होंने हमारी व्यापक जनसंख्या के बहुत से वर्गों को खुश करने के लिए सभी जातियों तथा यहां तक कि कई उपजातियों को भी इसमें प्रतिनिधित्व दिया है। 

अनुसूचित जातियों को 12, अनसूचित जनजातियों को 8 स्थान दिए गए हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। दरअसल एक बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक समाज में ऐसा ही होना चाहिए जहां इतनी अधिक जातियां, भाषाएं तथा रस्मो रिवाज हैं। 
कुछ आलोचकों का कहना है कि मोदी जी ने 2014 तथा 2019 के चुनावों के बाद डींग मारी थी कि जातिवाद मर गया है और मतदाताओं ने उसे दफन कर दिया है। उन्होंने संभवत: ऐसा होने की इच्छा जताई होगी अथवा सपना लिया होगा कि ऐसा हुआ है।

कड़वी सच्चाई यह है कि जातिवाद हमारी प्राचीन धरती से निकट भविष्य में जाएगा नहीं। यह बहुत गहरे समाया हुआ है। 
मेरी अपनी गोवा की ईसाइयत को ही लें। इसके पूर्वजों का लगभग 400 वर्ष या उससे भी अधिक पहले पुर्तगालियों ने ङ्क्षहदुओं से धर्मांतरण किया था। कुछ लोगों ने आशा की थी कि धर्मांतरण के बाद जातिवादी व्यवस्था खत्म हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, यह आज भी प्रचलन में है, विशेषकर विवाह-शादियों में।

यह सच है कि मोदी जी ने कहा था कि 2014 तथा 2019 में उनकी विजय के साथ ही जातिवाद दफन हो गया है। मगर उन्होंने यह भी कहा था कि नोटबंदी के साथ काला धन भी समाप्त हो जाएगा। मगर मैं चाहूंगा कि इन त्रुटिपूर्ण गणनाओं को नजरअंदाज कर दिया जाए। 

मुझे कोई संदेह नहीं कि उन्होंने कड़ी मेहनत की, उन्होंने हमेशा की तरह दिन में 18 घंटों तक काम किया और वास्तव में हर बार महसूस किया कि जीत उनकी है। उन्हें उन गलत गणनाओं को स्वीकार करना चाहिए। यदि उन्होंने ऐसा किया होता तो उनकी विश्वसनीयता इतनी खराब नहीं होती जैसी कि अब है। 

जब उन्होंने विभिन्न जातियों को अपने मंत्रिमंडल में स्थान दिया तो मोदी जी निश्चित तौर पर जागरूक होंगे कि कार्यकुशलता को नुक्सान पहुंचेगा। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालय ऐसे नए चेहरों को देकर इसका निराकरण किया जिनकी क्षमताओं पर काफी लम्बे समय से नजर रखी जा रही थी। उनके गृह राज्य गुजरात से एक कम ज्ञात राजनीतिज्ञ ने स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर डा. हर्षवद्र्धन का स्थान लिया। यह एक जानबूझ कर खेला गया जुआ है मगर मुझे विश्वास है कि मोदी जी को अपने लोगों बारे पता है। 

मनसुख मांडविया एक रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के जूनियर मंत्री थे जिसके तहत उन्होंने फार्मास्यूटिकल उद्योग, आवश्यक दवाओं के मूल्यांकन आदि में हिस्सा लिया। उनके कार्य ने ही उनको ऊंची जिम्मेदारियों के लिए पुरस्कृत किया। संभवत: मोदी जी ने आगामी 5 महीनों के दौरान वैक्सीन की अधिक आपूॢत के लिए व्यवस्था की है जो एक ऐसी चीज है जिसे उन्होंने अभी तक अपने पास रखा था। 

रवि शंकर प्रसाद अपने नेता तथा उनकी नीतियों के एक मुखर समर्थक थे तो उन्हें क्यों पदच्युत किया गया? मैं केवल अनुमान लगा सकता हूं कि वह जरूरत से अधिक टकराव वाले थे। उनके इस रवैये ने जजों की नियुक्तियों के मामले में कई रुकावटें खड़ी कीं तथा जब उन्होंने स्थानीय ट्विटर बासिज की बांह मरोड़ी तो उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक ध्यान आकर्षित किया। मोदी जी संभवत: एक कार्यशील संतुलन चाहते थे जो उपलब्ध करवाने में प्रसाद असमर्थ थे। हो सकता है मैं गलत होऊं जिसके लिए मैं माफी चाहता हूं।

एक पूर्व नौकरशाह को 3 पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी सौंपी गई है- सूचना तथा प्रसारण, सूचना तकनीक तथा महत्वपूर्ण रेल मंत्रालय। अश्विनी वैष्णव ओडिशा काडर के एक आई.ए.एस. अधिकारी थे। उनके ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी डाली गई है। उन्हें इन महत्वपूर्ण मंत्रालयों के लिए अलग-अलग पर्याप्त समय निकालना होगा।

नारायण राणे, जो मेरे अपने राज्य महाराष्ट्र से हैं, को आखिरकार तीन पार्टियां बदलने के बाद कुछ महत्व मिला जो कई वर्षों से लगभग अज्ञातवास में रह रहे थे। स्वाभाविक तौर पर उनमें सहनशीलता का गुण है। मुझे नहीं पता कि इससे भाजपा को क्या फायदा होगा, शायद एक या दो लोकसभा सीटें। राणे खुद अंतिम बार अपनी सीट हार चुके हैं। उनके दो बेटों ने दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जिनमें से केवल एक जीत सका।

मोदी जी जैसे चतुर राजनीतिज्ञ ने सहकारिता विभाग की स्थापना की तथा इसकी जिम्मेदारी अपने विश्वसनीय योद्धा को सौंपी। इस अप्रत्याशित कदम का क्या उद्देश्य है? भारत का गृह मंत्री, जो मंत्रिमंडल में नंबर 2 का पद है और एक पूर्णकालिक है, सहकारिता के साथ क्या करेगा? उनकी बहुत- सी एजैंसियां तथा वित्त मंत्री के आयकर तथा प्रवत्र्तन निदेशालय जैसे विभाग सहकारी बंैकों तथा चीनी निर्माताओं द्वारा की जाने वाली गलतियों से निपटने के लिए काफी हैं। अत: अमित शाह को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई? हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे।
जूलियो रिबैरो (पूर्व डी.जी.पी. पंजाब व पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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