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'कोरोना काल, किसान और सरकार'

  • Updated on 5/21/2020

भारत समेत पूरी दुनिया आज जब कोविड-19 महामारी के दौर से गुजर रही है और अपनी सुरक्षा के लिए लोग घरों में दुबके हुए हैं, ऐसे में किसान खेतों में फसल काटने में लगे रहे। इस संकट काल में अगर आज लोगों को भोजन नसीब हो रहा है तो इसके पीछे किसानों का यही परिश्रम और त्याग सबसे अहम है। देश में 24 मार्च को जब लॉकडाउन की घोषणा की हुई, वह रबी की फसल की कटाई का वक्त था।

हालात ऐसे थे कि सब की तरह किसान भी अगर घरों में बैठा रह जाता तो फसल पूरी बर्बाद हो जाती और आगे देश में खाद्यान्न संकट बढ़ जाता। लेकिन लॉकडाउन के बीच किसानों ने कोरोना से बचाव के सभी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए न केवल फसल की कटाई की, बल्कि उसकी मड़ाई और सुरक्षित भंडारण का काम कुशलता के साथ पूरा किया। अभी भी वे अपना कार्य सतत कर रहे हैं। खरीफ की फसल की बुवाई के लिए वे अनवरत अपने काम में लगे हुए हैं। 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लगातार किसानों को हर संभव मदद कर रही है। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने कृषि गतिविधियों को प्रभावित नहीं होने दिया। सरकार ने कस्टम हायरिंग केन्द्रों (सी.एच.सी.) के माध्यम से कृषि मशीनरी की उपलब्धता, कम्बाइन हार्वेस्टर जैसी कटाई और बुआई से संबंधित मशीनों और अन्य कृषि उपकरणों की राज्य के बाहर और भीतर आवाजाही सुनिश्चित की।

कृषि मशीनरी, इसके स्पेयर पार्ट्स और मुरम्मत करने वाली (इसकी आपूॢत शृंखला सहित) दुकानों को खुली रखने की अनुमति दी, जिससे निश्चित रूप से किसानों को मदद मिली है। मंत्रालय ने लॉकडाऊन के दौरान राज्यों के साथ भी बैठकें कीं और किसानों और सभी हितधारकों को समय पर लाभ प्रदान करने के लिए हरसंभव कदम उठाए गए।

प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा की है और 20 लाख करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी ने मजदूरों और किसानों के लिए  अनेक योजनाओं की जानकारी प्रैस कांफ्रैंस के माध्यम से दी है, मैं इन सभी उपायों-योजनाआें का स्वागत करता हूं। यह सवाल कि किसानों का कर्ज माफ करने की बजाय सरकार उन्हें ऋण लेने पर जोर दे रही है, उचित नहीं। कर्ज माफी कभी किसी समस्या का हल नहीं हो सकता है। जहां तक लोन चुकाने में राहत का सवाल है तो केंद्र की मोदी सरकार इस संबंध में संवेदनशील है।

सरकार ने किसानों को तमाम राहतें दी हैं। एग्री-गोल्ड लोन और अन्य कृषि खातों को किसान क्रैडिट कार्ड (के.सी.सी.) खाते में बदलने की नियत तिथि 31 मार्च से बढ़ा कर अब 31 मई 2020 कर दी गई है। इसके अलावा बैंकों द्वारा कृषकों को दिए गए 7 फीसदी वाॢषक की दर से प्रति किसान 3 लाख रुपए तक अल्पकालीन कृषि ऋण के लिए बैंकों को 2 फीसदी ब्याज अनुदान (आई.एस.) और 31 मई 2020 तक या वास्तविक पुनर्भुगतान की तारीख जो भी पहले हो, ऋणों के पुनर्भुगतान की विस्तारित अवधि के लिए किसानों को 3 फीसदी शीघ्र चुकौती प्रोत्साहन (पी.आर.आई.) प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। ये एेसे ऋण हैं जो 1 मार्च 2020 और 31 मई 2020 के बीच देय हो गए हैं या हो जाएंगे।

कृषि मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाऊन अवधि में राज्यों के साथ अनेक बैठकें की हैं। सरकार ने खेत स्तर पर किसानों और कृषि गतिविधियों की सहायता के लिए कई उपाय किए हैं तथा देशभर में किसानों एवं अन्य सभी संबंधित लोगों को समय पर सहायता की है। इससे निश्चित रूप से विशेषकर फसल कटाई एवं बुवाई सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्यों-संघ शासित क्षेत्रों के समन्वय से आपूॢत चैन को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिली है। 

सरकार ने किसानों को ई-नाम प्लेटफार्म उपलब्ध कराया है। इस डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए देश की एक हजार के करीब मंडियों को जोड़ दिया गया है, जिसके  जरिए किसान अपनी उपज देश की किसी भी मंडी में बेच सकता है और उसका भुगतान सीधे उसके खाते में पहुंचने की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को उत्पादों को अपने खेतों के पास लाभकारी मूल्यों पर बेचने में सुविधा हुई और खरीद केंद्रों पर भीड़ भी कम करने में मदद मिली है। सरकार ने किसान हितैषी मोबाइल एप किसान रथ लांच किया गया है। इसके माध्यम से प्राथमिक परिवहन में फार्म से मंडियों, एफ.पी.आे. केंद्र, ग्राम हाट, रेलवे स्टेशन और गोदामों तक आवाजाही सुगम होगी। वहीं, राज्य के भीतर व बाहर की मंडियों, प्रसंस्करण इकाइयों, रेलवे स्टेशन, वेयर हाऊस और थोक विक्रेता तक ढुलाई हो रही है।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पी.एम.-के.एस.वाई.) इसमें 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर पात्र छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिमाह 3,000 रुपए की न्यूनतम पैंशन का प्रावधान किया गया है। 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में दाखिल होने की पात्रता के साथ एक स्वैच्छिक और अंशदायी प्रावधान है। इसमें किसानों द्वारा मासिक अंशदान 55 से 200 रुपए है, वहीं केंद्र सरकार द्वारा बराबर धनराशि का योगदान दिया जा रहा है

अभी तक 20 लाख से ज्यादा किसान इस योजना में पंजीकृत हो चुके हैं। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पी.एम.-एफ.बी.वाई.) में वर्ष 2019-20 के दौरान 5$ 80 करोड़ किसानों के द्वारा फसल बीमा कराया गया। वर्ष 2019-20 में गैर ऋणी किसानों के 2$ 08 करोड़ संख्या का कवरेज किया गया तथा बीमित ऋणी किसानों की संख्या 3$ 71 करोड़ रही। 12 राज्यों के लाभभोगी किसानों को 2,424 करोड़ रुपए के बीमा दावों का भुगतान किया गया है। 

सभी पीएम-किसान लाभाॢथयों को कवर करने के लिए वित्तीय सेवाएं विभाग के साथ मिलकर मंत्रालय द्वारा किसान क्रैडिट कार्ड (के.सी.सी.) सैचुरेशन अभियान चलाया गया है। अभी तक लगभग 85 लाख आवेदन पत्र प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से 18$ 26 लाख आवेदन पत्रों को 17,800 करोड़ रुपए की ऋण राशि स्वीकृत की गई है। लॉकडाऊन अवधि के दौरान 5,326$ 7 करोड़ रुपए का कुल भुगतान किया गया।

- नरेंद्र सिंह तोमर (केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं पंचायत मंत्री, भाजपा)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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