Tuesday, Sep 28, 2021
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सरकार एक लापरवाह इकाई बन गई है

  • Updated on 6/27/2021

कुछ करोड़पतियों को छोड़ कर महामारी ने सभी को प्रभावित किया है। लॉकडाऊन के लगने और उसके बाद उसे हटाने की घटनाओं ने उत्पादन, आबंटन तथा वस्तुओं तथा सेवाओं की आपूर्ति को गंभीर रूप से अस्त-व्यस्त किया है। लोगों ने रोजगार खोया है, प्रत्येक परिवार फिर चाहे वह मध्यम, निम्न या फिर गरीब, या वंचित हो, उसने किसी न किसी तरीके से झेला है। इस पूरे खतरनाक चरण के दौरान मैंने कृषि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ईज.) तथा सॢवस सैक्टर की किस्मत को बदलते देखा है क्योंकि उनके बीच श्रमिक बल का बहुत बड़ा हिस्सा काम में लगा है। 

एम.एस.एम.ई. पर फोकस
मेरा यह आलेख एम.एस.एम.ईज. पर केन्द्रित है। समाचार पत्रों ने एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के बयान को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की। उसने कहा, ‘‘एम.एस.एम.ईज. तथा अति लघु उद्योग बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अप्रैल तथा मई में एम.एस.एम.ईज. से एन.पी.ए. का अतिरिक्त 60 प्रतिशत आता है। पहले की तुलना में यह करीब दोगुना है।’’ रिटेलर्ज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आर.ए.आई.) ने इन्वैसिं्टग डॉट कॉम से कहा कि देश में बिक्री मई 2021 में मई 2019 की तुलना में 79 प्रतिशत तक गिरी है। 

मैंने इस रिपोर्ट पर जारी तथ्यों को  एक विस्तृत टैलीफोन सर्वे के माध्यम से जांचना चाहा। मैंने जवाहर (तिरुचिरापल्ली रिजनल इंजीनियरिंग कालेज-साइंस एंड टैक्नोलॉजी पार्क) तथा उनकी टीम की सेवाओं को सूचीबद्ध किया। उन्होंने एम.एस.एम.ई. एसोसिएशन तथा उद्यम से पूरे तमिलनाडु राज्य में से एम.एस.एम.ईज. के नामों से आंकड़े एकत्रित किए।
इसके लिए उन्होंने 12 सवाल किए। इस पर 2029 प्रतिक्रियाएं भेजी गर्ईं। आर.आई.ए. के सीनियर बैंकर द्वारा दी गई रिपोर्ट की तुलना में निष्कर्ष बेहद बदत्तर पाए गए। ये आंकड़े वित्त मंत्री तथा प्रमुख आॢथक सलाहकार के कार्यालयों से मिले आंकड़ों से भी काफी भिन्न थे। मुझे इन 12 सवालों पर दी गई प्रतिक्रियाओं का उल्लेख यहां करना है : 

1. 2029 में से 1900 उत्तरदाताओं (94 प्रतिशत) ने कहा कि  2020-21 में उनकी सेल टर्नओवर 2019-20 की तुलना में कम हुई है।

2. सेल टर्नओवर में 25 प्रतिशत की कमी हुई (441 उत्तरदाता), 26 से 50 प्रतिशत (375 उत्तरदाताओं के अनुसार) तथा 50 प्रतिशत से ज्यादा  (787 उत्तरदाताओं के अनुसार) सेल टर्नओवर में कमी पाई है। 291 एम.एस.एम.ईज. तो पूरी तरह से बंद हो गए।

3. जैसी कि आशा की जा सकती थी 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं को 2020-21 में घाटा पड़ा। 

4. 90 प्रतिशत मामलों में यह घाटा 10 लाख से ज्यादा था।

5. इस घाटे को पूरा करने के लिए अपने ही फंडों का निवेश किया गया (400 उत्तरदाता),  परिस पत्तियां बेच रहे हैं (285 उत्तरदाता) या फिर बैंकों या एन.बी.एफ.सी. से उधार मांग रहे हैं (694 उत्तरदाता) या फिर अन्य स्रोतों से धन मांगा गया (631 उत्तरदाताओं के अनुसार)।

6. एक सवाल जिसके तहत यह पूछा गया कि 1 अप्रैल 2021 से क्या आपके कारोबार तथा इकाईयां कार्य कर रही हैं तो 1935 उत्तरदाताओं में से 852 ने (44 प्रतिशत) ‘नो’ कहा। अन्यों में से मात्र 195 (10 प्रतिशत) ने कहा कि वे पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं।

बड़े पैमाने पर नौकरियों का नुक्सान 

7. 2020-21 में (महामारी काल) 26 प्रतिशत उत्तरदाताओं (इस सवाल का जवाब देने वाले 1266 ने) ने वेतन तथा मजदूरियों में कट लगाया गया, 33 प्रतिशत ने पूरी तरह से नौकरियों से निकाल दिया, 23 प्रतिशत ने कर्मचारियों की छंटनी की तथा 18 प्रतिशत ने ऊपर बताई गई बातों को किया।
 

8. रोजगार के नतीजे उ मीद के मुताबिक थे। जिन 1783 लोगों ने प्रतिक्रिया दी उनमें से 1200 (66 प्रतिशत) ने 2022-21 में कुछ लोगों को काम पर रखा। यह 2019-20 की तुलना में कम था। लगभग किसी ने भी ज्यादा लोगों को रोजगार नहीं दिया। 

9. एम.एस.एम.ईज. में से अति सूक्ष्म तथा लघु कारोबारियों ने 20 या उससे कम लोगों को रोजगार पर लगाया। 1134 उत्तरदाताओं में से 64 प्रतिशत ने (2020-21 में जिन्होंने कुछ कर्मचारियों को रखा) के अनुसार 5 नौकरियांं तक खोई गई तथा अन्य 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 6 से 10 लोगों ने नौकरियां खोईं। मान लें कि औसतन 5 नौकरियों का घाटा पड़ा। इसे अब लाखों एम.एस.एम.ईज. के साथ गुणा कर दें तो आपके पास एक बेरोजगारी की वास्तविकता का निष्पक्ष आकलन हो जाएगा जिसने देश को घेर रखा है।

10. 2021-22 में क्या रोजगार की स्थिति बेहतर हुई है? 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं (1253) ने रिपोर्ट दी कि सभी या कुछ कर्मचारियों को पुन: रोजगार पर रखा। 50 प्रतिशत ने कहा कि रोजगार पर कोई भी व्यक्ति नहीं लौटा।

11. 2020-21 में जो 1510 उद्यम बंद हो गए उनमें से 470 (31 प्रतिशत) पुन: नहीं खोले गए तथा 828 (55 प्रतिशत) ने आंशिक तौर पर अपना काम खोला। मात्र 2012 (14 प्रतिशत) पूरी तरह से दोबारा खोले गए। 

अब तक जो 1349 इकाईयां बंद पड़ी हैं उनमें से 800 (59 प्रतिशत) दोबारा खुलने के लिए आशावादी थे। दूसरी तरफ 72 (5 प्रतिशत) ने उल्लेख किया कि उन्होंने स्थायी तौर पर अपने उद्यम बंद कर दिए।  अन्य 477 उद्यम दोबारा खुलने के प्रति आश्वस्त नहीं थे या फिर वे छोटे स्केल पर रोजगार  खोलने पर विचार करेंगे। यदि आप इन आंकड़ों का गहराई से आकलन करोगे तो आप पाओगे कि सूचनाओं के ढेर हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट टीआरई सीएसटीईपी डॉट कॉम या फिर डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू. कोविड-19सीएसओ रिलीफ डॉट कॉम पर इसके विस्तृत सर्वे के नतीजे आप पढ़ सकते हैं। यह स्पष्ट है कि एम.एस.एम.ईज. को अपने पैरों पर खड़े करने के लिए सरकार ने व्यावहारिक रूप से कुछ भी नहीं किया। उनका व्यवसाय धराशायी हुआ तो सरकार देखती रही। उनके लिए तो यह सब आत्मनिर्वाण की तरह है।

-पी चिदंबरम

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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