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किसान कल्याण के नए मापदंड बनाते मोदी

  • Updated on 9/23/2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रही है। किसानों को लुभाने वाली घोषणाओं की बजाय प्रधानमंत्री मोदी का जोर कृ षि क्षेत्र को समृद्ध और किसानों को सशक्त बनाने पर रहा है। किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर यह सरकार चल रही है और इस दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। 

इन्हीं प्रयासों की कड़ी में कृषि सुधार से संबंधित तीन विधेयक सदन में लाए गए, जिनमें से 2 विधेयक विपक्ष के अनुचित एवं अताॢकक विरोध के बावजूद दोनों सदनों में पारित होकर अब कानून बन चुके हैं। ‘कृ षि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण)’ एवं ‘कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन’ नामक ये दोनों विधेयक किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती देने तथा कृ षि क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करने वाले हैं।

जनसंख्या नियंत्रण कानून’ का आना आवश्यक क्यों

पहला विधेयक देश के अन्नदाता को बिचौलियों के चंगुल से आजादी देने के साथ-साथ उसे अपनी उपज को इच्छानुसार मूल्य पर बेचने की स्वतंत्रता प्रदान करेगा। इस विधेयक सेपहले हमारे किसानों का बाजार सिर्फ स्थानीय मंडी तक सीमित था, उनके खरीदार सीमित थे, बुनियादी ढांचे की कमी थी और मूल्यों में पारदॢशता नहीं थी। इन बाधाओं के कारण उन्हें अधिक परिवहन लागत, लम्बी कतारों, नीलामी में विलम्ब और स्थानीय माफिया की मार झेलनी पड़ती थी। इस विधेयक के आने के बाद उन्हें इन बंधनों से छुटकारा मिलेगा जिससे राष्ट्रीय बाजार में अवसर मिलने के साथ- साथ बिचौलियों से मुक्ति भी मिलेगी। अब किसानों का ‘एक देश एक बाजार’ का सपना पूरा होगा और उन्हें स्वतंत्रता के 72 वर्षों बाद सच्चे मायनों में बिचौलियों से आजादी मिलेगी। 

दूसरा विधेयक बुवाई के समय ही बाजार से संपर्क  प्रदान करता है जिससे किसान को उत्पादन और मूल्य दोनों से जुड़े जोखिमों से राहत मिलेगी। इसके तहत हमारे किसान कृ षि आधारित उद्योगों, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों आदि के साथ अनुबंधित कृ षि कर सकेंगे। 

पी.एम. मोदी स्वतंत्र भारत के सबसे ‘परिवर्तनकारी’ नेता

अनुबंधित किसानों को ऋ ण की सुविधा, तकनीकी सहायता, बीज की उपलब्धता, फसल बीमा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस विधेयक से कृषि क्षेत्र में भारी आर्थिक निवेश की सम्भावना है जिससे कि अभी तक वह पूर्ण रूप से वंचित था। 

एम.एस.पी. लगातार बढ़ा रही है मोदी सरकार
विपक्षी दल यह कह कर भ्रम फैला रहे हैं कि इन विधेयकों द्वारा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) को समाप्त करने जा रही है, जबकि वास्तव में इस प्रकार का कोई प्रावधान इन कानूनों में नहीं है। हमारी सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया जा चुका है कि इन कानूनों के आने से एम.एस.पी. पर कोई फर्क  नहीं पड़ेगा। वह व्यवस्था यथावत बनी रहेगी, परन्तु अब किसानों के पास एम.एस.पी. के अतिरिक्त भी अपनी उपज बेचने के कई विकल्प होंगे। विपक्षी दल भूल जाते हैं कि स्वामीनाथन आयोग की जिन सिफारिशों को कांग्रेस की सरकार ने 2006 में ठंडे बस्ते में डाल दिया था, उन्हें मोदी सरकार ने पूरा करने का काम किया है। मोदी सरकार एम.एस.पी. में लगातार वृद्धि कर रही है, जिसकी एक बानगी कल ही देखने को मिली है। 

इसके अनुसार, अब 2014 की तुलना में गेहूं की एम.एस.पी. 41 प्रतिशत, धान की 43 प्रतिशत, मसूर की 73 प्रतिशत, उड़द की 40 प्रतिशत, मूंग की 60 प्रतिशत, अरहर की 40 प्रतिशत, सरसों की 52 प्रतिशत, चने की 65 प्रतिशत और मूंगफली की 32 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। यही नहीं, 2014 की तुलना में गेहूं और धान खरीद की मात्रा में भी क्रमश: 73 प्रतिशत और 114 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2009-14 तक किसानों से मात्र 1.52 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी गई, वहीं मोदी सरकार ने 2014-19 में 76.85 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी। यह 4962 प्रतिशत का फर्क  उनके ढोंग और मोदी जी के समर्पण को साफ दर्शाता है। अत: स्पष्ट होता है कि  एम.एस.पी. का रोना रोने वाले राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल समेत दूसरे विपक्षी नेता न केवल एम.एस.पी. पर भ्रम फैला रहे हैं बल्कि किसानों के विकास के मार्ग में रोड़ा भी बन रहे हैं।

चीन के ‘आक्रामक रवैये’ से परेशान है पूरी दुनिया

छोटे किसान भी ले सकेंगे कैश क्रॉप का फायदा
कई राज्यों में बड़े किसान कार्पोरेट के साथ मिल कर कैश क्रॉप का लाभ ले रहे थे परन्तु अब यह लाभ छोटे किसान भी ले सकेंगे। परन्तु, जिन विपक्षी दलों ने हमेशा किसानों का वोट लेकर उन्हें अंधकार और गरीबी में रखा आज उन्हें यह बदलाव अच्छा नहीं लग रहा, इसलिए वे लोग सड़क से संसद तक इसका विरोध करने में लगे हैं। इन विधेयकों के पारित होने के दौरान राज्यसभा में उनका जो आचरण रहा वह लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा को शर्मसार करने वाला था। ये वही लोग हैं जिनके शासनकाल में किसानों के हालात बद से बदतर होते गए, वे बिचौलियों और साहूकारों द्वारा शोषित होते रहे और देश के आर्थिक विकास का उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। परन्तु जब आज मोदी जी उन्हें वह अधिकार दे रहे हैं जो उन्हें 70 वर्ष पूर्व मिलने चाहिए थे तो इन नेताओं के पेट में दर्द हो रहा है।

फसल बीमा से किसानों को मिला सुरक्षा कवच
मोदी सरकार ने फसल बीमा जैसी योजना से किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान किया है, जिसके अंतर्गत बीमित किसानों की संख्या 6.66 करोड़ से बढ़कर 13.26 करोड़ हो गई है। मोदी सरकार ने किसानों को सीधी सहायता देने में भी कोई कसर नहीं रखी है, जिसके उदाहरण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री किसान पैंशन योजना हैं। अब तक 10.21 करोड़ से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है और इसके तहत 94 हजार करोड़ से अधिक धनराशि सीधे उनके खाते में जमा की गई है। वहीं पैंशन योजना से अब तक 19.9 लाख किसान जुड़ चुके हैं।

100 साल बाद फिर आई महामारी

विपक्षी दलों ने किसानों के नाम पर की राजनीति
कई विपक्षी दलों ने वर्षों तक विशुद्ध रूप से किसानों के नाम पर राजनीति की है और किसानों के वोट तो लिए परन्तु उनके हित में कभी भी कोई कारगर प्रयास नहीं किया। मोदी सरकार ने शास्त्री जी के ‘जय जवान और जय किसान’ नारे को आगे ले जाते हुए पिछले 6 वर्षों में दर्जनों ऐसे काम किए हैं, जिनसे हमारा किसान तेजी से खुशहाली के मार्ग पर अग्रसर है। 
मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के कृ षि बजट में 35.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, 16.38 करोड़ किसानों को सायल हैल्थ कार्ड दिया गया, माइक्रो इरीगेशन में 39.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, कृ षि यंत्रीकरण का बजट 1248 गुना किया गया, कृषि ऋण 57 प्रतिशत अधिक दिया गया और कृ षि ऋ ण में दी जाने वाली छूट में निवेश 150 प्रतिशत बढ़ा है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इस सरकार के कार्यकाल के सिर्फ  6 वर्षों में खाद्यान्न का उत्पादन 7.29 प्रतिशत, बागवानी उत्पादन 12.4 प्रतिशत और दलहन उत्पादन 20.65 प्रतिशत बढ़ा है।

एस. जय शंकर के तीन बोझ

कृषि आधारित एग्रो इंडस्ट्री लगने का रास्ता खुलेगा
कृ षि क्षेत्र में निजी निवेश आने से यहां स्टोरेज, परिवहन तथा कृ षि आधारित एग्रो इंडस्ट्री लगने का रास्ता खुलेगा, जिसका सीधा लाभ देश के किसानों को मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप किसान कैश क्रॉप्स और एग्रो इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार खेती करके अपनी आमदनी असीमित रूप से बढ़ा सकेंगे। 

यहां यह बताना आवश्यक है कि यह अधिनियम किसान के मालिकाना हक और खेती के अधिकार को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखेगा। किसान को किसी भी समय इस करार से बिना किसी पैनल्टी के निकलने की आजादी होगी और जमीन की बिक्री, लीज और गिरवी रखना पूर्ण रूप से निषिद्ध है।

यू.पी. में कानून ‘सत्ता’ का, ‘सत्ता’ के लिए और ‘सत्ता’ द्वारा

किसानों को चीन से भी बचाया
 मोदी सरकार ने ‘आरसेप’ से बाहर आकर देश के किसानों को चीन के नकारात्मक प्रभाव से भी बचाया। अभी हाल में ही सरकार ने एक लाख करोड़ रुपए की कृ षि मूलभूत संरचना निधि के अंतर्गत वित्तपोषण की एक नई केंद्रीय क्षेत्रक स्कीम शुरू की है। यह स्कीम किसानों, प्राथमिक कृ षि सहकारी समितियों, किसान उत्पाद संगठनों, कृ षि उद्यमियों आदि को सामुदायिक कृ षि परिसंपत्तियों और फसलोपरांत कृ षि मूलभूत संरचना के निर्माण में सहायता प्रदान करेगी। 
सरदार पटेल ने कभी कहा था, इस धरती पर अगर किसी को सीना तानकर चलने का अधिकार है, तो वह धरती से धन-धान्य पैदा करने वाले किसान को ही है। आज मुझे यह कहते हुए गर्व की अनुभूति होती है कि नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने किसानों को यह अधिकार देने का काम किया है। मुझे विश्वास है कि किसानों के कल्याण के लिए उठाए जा रहे इन कदमों का सुपरिणाम शीघ्र ही देश के समक्ष आएगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए हो रहे प्रयासों में हमारे अन्नदाता किसानों की बराबर की भूमिका होगी।

- अमित शाह (गृहमंत्री)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

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