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यदि हम ‘अमरीका के दोस्त’ हैं तो ‘हमें उसे यकीन दिलाना होगा’

  • Updated on 11/9/2020

चेन्नई से संबंधित एक अमरीकी ने इस सप्ताह पुन: चुनाव जीता। उनका नाम प्रॉमिला जयपाल (Pramila Jayapal) है तथा वह कांग्रेस प्रगतिशील गुट की प्रमुख हैं। कुछ माह पूर्व भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर(S. Jaishankar)  ने अमरीका के विदेशी मामलों की कमेटी के साथ बैठक को रद्द किया था। इस कमेटी में इसके रिपब्लिकन चेयरमैन तथा डैमोक्रेटिक सदस्य थे। जयशंकर ने उनसे मिलने से मना कर दिया क्योंकि उस ग्रुप में प्रॉमिला जयपाल भी शामिल थीं जिन्होंने एक प्रस्ताव को आगे बढ़ा कर मांग की कि भारत कश्मीर में संचार से संबंधित ब्लैकआऊट को समाप्त करे। जयशंकर ने अमरीका को बताया कि वे उनसे तभी मिलेंगे यदि वह इस समूह से जयपाल को हटा दे। बेशक अमरीकियों ने जयशंकर के प्रस्ताव को नकार दिया। 

जयशंकर को हम लोगों द्वारा भुगतान किया जाता है ताकि वह विदेश में भारत के पक्ष की रक्षा करें। मगर उन्होंने इस बैठक को करना मुनासिब नहीं समझा क्योंकि इसमें कुछ परेशानी वाली बातचीत हो सकती थी या फिर वह आमना-सामना करने से डरते रहे होंगे। जयशंकर के इस बात से दौडऩे का पता जब अमरीकी मीडिया को चला तो कैलिफोर्निया की सीनेटर कमला हैरिस ने एक ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘‘किसी भी विदेशी सरकार के लिए कांग्रेस को यह बताना कि कौन से सदस्यों को बैठक में आमंत्रित किया जाए, यह सब गलत है।’’ 

‘क्या पाकिस्तान कश्मीर चाहता है या नहीं’

जयशंकर ने सोचा होगा कि वह बैठक से भागने को बर्दाश्त कर लेंगे क्योंकि अमरीकी प्रशासन का नेतृत्व रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रम्प कर रहे थे जोकि मानव अधिकारों के बारे में जरा भी ख्याल नहीं रखते। दिसम्बर 2019 में जो जयशंकर ने किया वह आगे करना मुनासिब न होगा। भाजपा ने बहुत ज्यादा निवेश किया है जो उससे पहले किसी सरकार ने नहीं किया। भाजपा अमरीकी चुनावों में ट्रम्प को दोबारा चुने जाने की कोशिश में थी। एक समूह जिसका नाम ‘ओवरसीज फ्रैंड्ज ऑफ द बी.जे.पी.’  है और इसने अपने आपको आधिकारिक तौर पर अमरीका में बतौर विदेशी एजैंट पंजीकृत करवा रखा है। इस बात का जब खुलासा हुआ तो पार्टी ने इन भारतीय अमरीकियों को यह निर्देश दिया कि वे लोग डोनाल्ड ट्रम्प की अपनी निजी क्षमता के तहत सहायता करें। मगर भाजपा का नाम कहीं भी न आए। मगर यह तो स्पष्ट था कि वे सभी भाजपा समर्थक थे। 

पिछले वर्ष सितम्बर माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद ही अमरीका में भारतीयों को हाऊडी मोदी रैली के दौरान ट्रम्प के लिए वोट करने को कहा था। इसके समर्थन में हम एक लाइन की व्याख्या कर सकते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि, ‘‘अब की बार ट्रम्प सरकार।’’ अब क्या हुआ? ट्रम्प तो अपनी सत्ता खो चुके हैं। इस लापरवाही के चलते अब भाजपा पीछे की ओर खिसक रही है। राम माधव ने एक समाचार पत्र में शनिवार को एक हैडलाइन के तहत कहा कि ‘‘अमरीका-भारत संबंध द्विदलीय तथा सशक्त पैरों के ऊपर खड़े हैं।’’ माधव ने कहा, ‘‘भारत में कुछ लोग मानते हैं कि बाइडेन-हैरिस की जोड़ी अमरीकी-भारतीय रिश्तों के लिए एक बुरी खबर होगी।’’ 

यहां पर कोई भी सवाल पैदा नहीं होता कि अमरीका और भारत के बीच संबंध और गहरे होंगे और यहां पर दो राष्ट्रों के बीच एक सभ्यता का रिश्ता है। ऐसा समय नहीं है। प्रॉमिला जयपाल तथा कमला हैरिस मुद्दों को लेने के लिए नहीं रुकेगी क्योंकि पूर्व में पक्षपातपूर्ण भाजपा अब द्विदलीय समर्थन की गुजारिश कर रही है। अमरीका में घटनाएं उन नेताओं के हाथ मजबूत करती हैं जो भारत के ठीक होने की कामना करते हैं। भारत इन बातों को अभी नकार सकता था क्योंकि ट्रम्प का प्रशासन चल रहा था। यदि आप सोचते हैं कि हम अमरीका के दोस्त हैं तब हमें उसे यकीन दिलाना होगा कि उनका निष्कर्ष गलत है।

-आकार पटेल

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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