Sunday, Oct 17, 2021
-->
kargil war showed the world the real face of pakistan musrnt

कारगिल युद्ध ने दुनिया को पाकिस्तान का असली चेहरा दिखा दिया

  • Updated on 7/26/2021

जो एक बार गलती करे वह इंसान, 
दो बार गलती करे वह शैतान। 
जो बार-बार गलती करे वह पाकिस्तान,
हर गलती को जो माफ करे वह हिंदुस्तान॥

लिखित पंक्तियां भारत पाकिस्तान रिश्तों पर बिल्कुल सही बैठती हैं। 1947 के विभाजन के बाद से ही पाकिस्तान भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ  है। 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान सेना के 93,000 सैनिकों का आत्मसमर्पण कराकर ऐतिहासिक विजय हासिल की। इसके फलस्वरूप पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया जिसमें एक पूर्वी पाकिस्तान (बंगलादेश) बना। तब से लेकर काफी समय तक पाकिस्तान भारत के साथ छद्म युद्ध करता रहा है। 90 के दशक में दोनों पड़ोसी देश परमाणु संपन्न हो गए जो दुनिया के लिए एक चिंता का विषय था।

भारत- पाकिस्तान में रिश्ते ठीक करने और शांति बनाए रखने के लिए भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने 11 सदस्यों के समूह के साथ 21 फरवरी, 1999 को पाकिस्तान के लाहौर गए, जहां दोनों देशों के जननायकों ने लाहौर करार पर हस्ताक्षर कर भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों को दृढ़ करने की इच्छा व्यक्त की। मार्च 1999 को पाकिस्तान सेना के जनरल परवेज मुशर्रफ और आई.एस.आई. चीफ इकतार अहमद भट्ट ने इस समझौते को नकार कर भारत के कारगिल जिले में घुसपैठ कर ‘ऑपरेशन बद्र’ आरंभ किया।

15 मई, 1999 को भारतीय सेना ने कैप्टन सौरव कालिया के नेतृत्व में पांच-पांच फौजियों की टुकडिय़ां बनाईं, जिसको घुसपैठियों की जांच एवं जिले की पैट्रोलिंग के लिए भेजा, परन्तु घुसपैठ करके बैठे दुश्मन ने अचानक पैट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर दिया जिससे वे सभी शहीद हो गए। घुसपैठियों ने 19 मई, 1999 को कारगिल जिले पर हमला किया, जिसका मुख्य निशाना भारतीय सेना का शस्त्रागार था। इस हमले के बाद भारतीय सेना को एक ही दिन में 125 करोड़ का नुक्सान हुआ। 

पाकिस्तानी सेना ने कारगिल जिले में भारतीय सेना की 140 पोस्टों पर नाजायज कब्जा किया और करीब 2500 जवान तैनात किए। भारतीय सेना ने 19 मई, 1999 को ऑपरेशन विजय की शुरूआत की। 20 मई को भारतीय सेना की गोरखा रैजीमैंट, राजपूत रैजीमैंट और 18 ग्रेनेडियर्स को कारगिल जिले के द्रास सैक्टर भेजा गया। द्रास सैक्टर में तोलोलिन प्वाइंट, प्वाइंट 4590, प्वाइंट 5140, प्वाइंट 5410 नामक पहाडिय़ों पर भारतीय तिरंगा लहराने के बाद कारगिल की शान कही जाने वाली टाइगर हिल चोटी पर चढ़ाई कर दी। 

कारगिल का ताज कही जाने वाली टाइगर हिल 18,000 फुट की ऊंचाई पर है, जहां भारतीय सेना ने कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में 22 मई को तीन विभिन्न स्थानों से धावा बोला। इस हमले से पाकिस्तान सेना को काफी क्षति पहुंची, परन्तु कैप्टन विक्रम बत्रा वीरगति को प्राप्त हुए। टाइगर हिल पर भारतीय सेना की ओर से अंतिम प्रहार 3 जुलाई, 1999 को शाम 5.15 बजे जवानों ने बोफोर्स तोपों के साथ किया। इस घातक हमले से भयभीत होकर पाक सेना भारतीय जमीन को छोड़कर भाग गई।

भारतीय नौसेना के पूर्वी एवं पश्चिमी नेवल कमांडर्स ने 25 मई, 1999 को ‘ऑपरेशन तलवार’ की शुरूआत की। हमले  का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के उन तटों को खत्म करना था, जिनसे वह व्यापार एवं तेल का आदान प्रदान करता था। युद्ध के समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ के अनुसार, भारतीय नौसेना के हमले के बाद पाकिस्तान के पास सिर्फ 6 दिन की सामग्री एवं गोला-बारूद ही बचा था। कारगिल युद्ध में और ऊंचाई पर छुपकर बैठे पाकिस्तान को खत्म करने के लिए भारतीय थलसेना की सहायता के लिए भारतीय वायुसेना ने 26 मई, 1999 को सफेद सागर नामक ऑपरेशन चलाया। 
युद्ध को निर्णायक दिशा भारतीय वायुसेना के विमान मिराज-2000 ने दी। गाइडिड मिसाइलों के सामने पाकिस्तानी सेना टिक नहीं सकी और भारतीय पोस्टों को छोड़कर भाग निकली, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय थलसेना ने सम्पूर्ण कारगिल जिले पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेनाओं द्वारा कारगिल युद्ध में सम्पूर्ण विजय 26 जुलाई को घोषित की गई। तब से लेकर यह दिन ‘कारगिल विजय दिवस’ के नाम से जाना और मनाया जाता है। 

कारगिल युद्ध के समय सारा राष्ट्र एकजुट होकर भारतीय सेनाओं के साथ खड़ा हो गया। युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच होता है लेकिन इसका परिणाम सारे देश और देशवासियों को भुगतना पड़ता है। कारगिल युद्ध के पश्चात पाकिस्तान का असली चेहरा और उसकी आतंकी गतिविधियों का समस्त संसार के सामने भंडाफोड़ हुआ, जिसका फायदा भारत को हुआ। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कश्मीर मुद्दे के सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
मैं उन सभी शूरवीर योद्धाओं और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहना चाहता हूं- हमारा तिरंगा इसलिए नहीं लहरा रहा क्योंकि हवा चल रही है, बल्कि वह शहीद हुए जवानों की आखिरी सांस से लहरा रहा है।  

रजत भाटिया

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.