Tuesday, Sep 22, 2020

Live Updates: Unlock 4- Day 22

Last Updated: Tue Sep 22 2020 08:25 AM

corona virus

Total Cases

5,560,105

Recovered

4,494,720

Deaths

88,965

  • INDIA7,843,243
  • MAHARASTRA1,208,642
  • ANDHRA PRADESH631,749
  • TAMIL NADU547,337
  • KARNATAKA526,876
  • UTTAR PRADESH358,893
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • NEW DELHI246,711
  • WEST BENGAL225,137
  • ODISHA184,122
  • BIHAR180,788
  • TELANGANA172,608
  • ASSAM156,680
  • KERALA131,027
  • GUJARAT124,767
  • RAJASTHAN116,881
  • HARYANA111,257
  • MADHYA PRADESH103,065
  • PUNJAB97,689
  • CHANDIGARH70,777
  • JHARKHAND69,860
  • JAMMU & KASHMIR62,533
  • CHHATTISGARH52,932
  • UTTARAKHAND27,211
  • GOA26,783
  • TRIPURA21,504
  • PUDUCHERRY18,536
  • HIMACHAL PRADESH9,229
  • MANIPUR7,470
  • NAGALAND4,636
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS3,426
  • MEGHALAYA3,296
  • LADAKH3,177
  • DADRA AND NAGAR HAVELI2,658
  • SIKKIM1,989
  • DAMAN AND DIU1,381
  • MIZORAM1,333
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
law in up aljwnt

यू.पी. में कानून ‘सत्ता’ का, ‘सत्ता’ के लिए और ‘सत्ता’ द्वारा

  • Updated on 9/12/2020

देश के सबसे सख्त कानून का नाम है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एन.एस.ए.)। इस कानून के सेक्शन 13 के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को साल भर तक एहतियातन निरुद्ध कर जेल में रख सकती है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की नगरी वाले राज्य उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में इस साल 19 अगस्त तक जिन 139 लोगों को इसमें निरुद्ध किया गया था उनमें 76 यानी आधे से ज्यादा के खिलाफ गौहत्या को आधार माना गया है। 

बहरहाल देश के 29 राज्यों में से आठ में गौकशी प्रतिबंधी नहीं है यानी वहां इस कृत्य पर राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा नहीं होता। उत्तर प्रदेश की सरकार इस कानून के तहत 13 अन्य लोगों को, जो नागरिकता कानून का विरोध कर रहे थे, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए इस दौरान जेल में डाल देती है। गौहत्या के आरोपियों को सख्त धाराओं में निरुद्ध करना यहीं नहीं रुकता। 

करीब 4200 अन्य लोग इसी आरोप में गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट में भी ‘भीतर’ किए जाते हैं। ध्यान रहे कि गोरखपुर मैडीकल कॉलेज के डॉक्टर कफील को भी एन.एस.ए. में ही जेल में ठूंसा गया लेकिन पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने सरकार की मंशा पर उंगली उठाते हुए रिहा कर दिया। 

संविधान के ‘मूलभूत ढांचे’ का महत्व 

अब तस्वीर का दूसरा रूप देखें। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव जिले के विधायक पर बलात्कार और पीड़िता के पिता की हत्या का जुर्म सिद्ध हो चुका है। सी.बी.आई. ने पिछले फरवरी में इस मामले में विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने में कोताही बरतने के जिम्मेदार जिला-अफसरों के खिलाफ प्रदेश सरकार से एक्शन लेने की अनुशंसा की। सरकार ने पूछा ‘अधिकारियों के नाम बताएं’। इस अगस्त के दूसरे सप्ताह में एजैंसी ने तत्कालीन जिला मैजिस्ट्रेट और एस.पी. सहित एक अन्य पुलिस अधिकारी का नाम भेजा लेकिन ये सभी अधिकारी डी.एम. और एस.पी. के रूप में फिलवक्त तैनात हैं। कानून का नजरिया यहां बदल जाता है क्योंकि बकौल सी.बी.आई., अफसरों ने सत्ताधारी दल के विधायक पर ‘नजर-ए-इनायत’ की थी। 

कानून कब काम करेगा यह देखना सत्तावर्ग का अपना ‘कैलकुलेशन’ होता है। और इस कैलकुलेशन का निष्कर्ष क्या है यह अफसरों को ‘बगैर कहे’ समझ में आ जाता है। तभी तो भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में कांवडिय़ों पर हैलीकाप्टर से फूल बरसाए जाते हैं और एक जिले का एस.पी. इतना आत्मविभोर हो जाता है कि एक कांवडि़ए के स्वयं पांव धोकर फोटो मुख्यमंत्री को प्रेषित कर देता है। लेकिन नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में डाक्टर कफील का भाषण इतना नागवार गुजरता है कि एन.एस.ए. तामील हो जाता है। इस कैलकुलेशन का एक और उदाहरण देखें। 

एक महज पांच साल की आई.पी.एस. सेवा का युवा अफसर एक व्यापारी को धमकाता है कि छ: लाख रुपया महीना नहीं दोगे तो जिले के अनेक थानों में मुकद्दमा कायम होगा। व्यापारी 2 माह के बाद कोरोना संकट की वजह से ‘माहवारी’ नहीं दे पाता और एक वीडियो जारी करता है कि अगर वह मारा गया तो जिम्मेदारी इस अधिकारी की होगी क्योंकि यह धमकी दे रहा है। वाकई उसे गोली मारी जाती है तब सत्तावर्ग को ‘इमेज’ की चिंता होती है। अधिकारी को निलंबित कर उस पर मुकद्दमा कायम होता है। यहां पर कानून सख्त था क्योंकि इससे कोई नकारात्मक संदेश नहीं जा रहा था लेकिन उन्नाव के अधिकारियों पर भी एक बलात्कारी और हत्यारे विधायक को बचाने का चार्ज सी.बी.आई. द्वारा स्थापित किया गया था लेकिन वहां कानून का नजरिया बदला क्योंकि सत्ता-पक्ष को कई कारणों से ‘एक्शन लेना’ ‘पॉलिटिकली करैक्ट’ कदम नहीं होता। 

‘इंडिया फर्स्ट’ और ‘नेशन फर्स्ट’ शब्दों का अर्थ क्या है

यह है यू.पी. की पुलिस !
इसी राज्य के अमरोहा जिले में आठ माह पहले एक 20 वर्षीय लड़की के ‘ऑनर किङ्क्षलग’ के मामले में पुलिस ने साक्ष्य के रूप में खून से सने कपड़े, चप्पल और हत्या में प्रयुक्त एक देशी पिस्तौल बरामद कर उसके पिता, भाई और एक रिश्तेदार को पिछले सात माह से जेल में बंद कर रखा है। चार्जशीट में परिजनों द्वारा लड़की को गोली मार कर लाश नदी में बहाने का अपराध दर्ज है। इस लड़की ने दो दिन पहले अपने घर पहुंच कर जब बताया कि वह अपने ब्वायफ्रैंड के साथ रह रही थी तो थानेदार व आई.ओ. को निलंबित किया गया। 

अब जिला कप्तान जेल में बंद रिश्तेदारों को छुड़ाने का वायदा कर रहा है। जाहिर है पुलिस ने फर्जी खून से सने कपड़े और पिस्तौल ही नहीं बरामद किए बल्कि इन तीनों रिश्तेदारों को मारपीट कर कबूलनामा भी लिखवाया। देश की अदालत साक्ष्य देखती है और मुमकिन है उन्हें सजा भी हो जाती। हमें यह भी नहीं मालूम कि देश भर में कितने मामलों में ऐसा होता रहा है। अपराध-न्यायशास्त्र का सिद्धांत है ‘भले ही तमाम दोषी छूट जाएं लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए’। 

उत्तर भारत के तमाम राज्यों में कोर्ट से सजा की दर दस प्रतिशत से कम है जबकि बेहतर प्रशासनिक क्षमता वाले केरल जैसे राज्य में यह दर 89 प्रतिशत है। यानी उत्तर भारत में पुलिस कमजोर अभियोजन के जरिए दोषियों को छोडऩे में भरोसा रखती है। वर्तमान मामले से यह भी लगता है कि इन राज्यों की पुलिस ने अपना कौशल दोषियों को छोड़ने में हीं नहीं, निर्दोषों को फंसाने में भी बेहतर किया है। अपराध-न्याय व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव समाज में बढ़ते असंतोष का एक बड़ा कारण है। बदलाव इस हद तक होना चाहिए कि सत्ता-पक्ष कानून को अपनी चेरी न बना सके और उसका इस्तेमाल जनहित की जगह जन-प्रताड़ना में न होने लगे।

-एन.के. सिंह

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.