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Modi government relief package is good for small scale business aljwnt

छोटे उद्योग-कारोबार में 'नई जान' फूंकने का नया पैकेज

  • Updated on 5/15/2020

यकीनन कोविड-19 के महासंकट के बीच देश के कोने-कोने में ढहते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एम.एस.एम.ई.) को बचाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा 13 मई को घोषित व्यापक आॢथक पैकेज में सबसे अधिक राहतों की घोषणा की गई है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान के तहत नए आर्थिक पैकेज में एम.एस.एम.ई. क्षेत्र के लिए कुल 3 लाख 70 हजार करोड़ रु. के अभूतपूर्व राहतकारी प्रावधान घोषित किए गए हैं जिनमें से इस क्षेत्र की इकाइयों को 3 लाख करोड़ रु. का गारंटी मुक्त कर्ज दिया जाना सबसे प्रमुख प्रावधान है।

उल्लेखनीय है कि नए राहत पैकेज के तहत केंद्र सरकार किसी भी विदेशी आपूॢतकत्र्ता से 200 करोड़ रुपए से कम मूल्य की वस्तु एवं सेवाओं की खरीद नहीं करेगी। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों की वस्तुओं व सेवाओं की नई मांग पैदा की जा सकेगी। इसी तरह सरकार की ओर से निर्माण परियोजना को पूरा करने और पंजीकरण की समयावधि को 6 महीने आगे बढ़ाए जाने से दबावग्रस्त डिवैल्परों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि विभिन्न कारणों से एम.एस.एम.ई. के कई कर्ज एन.पी.ए. हो गए थे। एेसे में उनके पास नकदी जुटाने का कोई रास्ता नहीं बचा था। बैंक एम.एस.एम.ई. को कर्ज नहीं दे रहे थे। अब नए पैकेज के तहत एन.पी.ए. हुए एम.एस.एम.ई. को भी नया कर्ज प्राप्त हो सकेगा।

निश्चित रूप से एम.एस.एम.ई. के लिए घोषित राहत पैकेज देश के करीब 6.30 करोड़ एम.एस.एम.ई. उद्यमियों को उनका कारोबार कई गुना तक बढ़ाने में मदद कर सकता है। इस पैकेज में जहां एक ओर एम.एस.एम.ई. के लिए नई पूंजी की व्यवस्था की गई है, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र में निवेश की सीमा भी चार गुना बढ़ा दी गई है। चूंकि एम.एस.एम.ई. की ओर से करीब 12 करोड़ लोगों को रोजगार दिया जाता है। ऐसे में निश्चित रूप से नए पैकेज से इस क्षेत्र में रोजगार चुनौतियां बहुत कुछ कम की जा सकेंगी। चूंकि सरकार के द्वारा एम.एस.एम.ई. की परिभाषा भी बदली गई है, अतएव इस क्षेत्र को बदली हुई नई परिभाषा का भी लाभ मिलेगा। पहले एम.एस.एम.ई. की परिभाषा निवेश की गई रकम के आधार पर की जाती थी। अब निवेश की रकम के साथ उनके टर्नओवर के आधार पर उनका वर्गीकरण किया है। मैन्युफैक्चरिंग और सॢवस एम.एस.एम.ई. के बीच का फर्क खत्म कर दिया गया है।

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि नए आॢथक पैकेज के तहत लोकल के लिए वोकल होने की जो संकल्पना की गई है, उससे स्थानीय एवं स्वदेशी  उद्योगों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा वोकल फोर लोकल अभियान से मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। ज्ञातव्य है कि भारत की श्रमशक्ति का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत में श्रम लागत चीन की तुलना में सस्ती है। भारत के पास तकनीकी और पेशेवर प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। भारत के पास 35 साल से कम उम्र की दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या है। दुनिया में सबसे अधिक अंग्रेजी बोलने वाले भी भारत में ही हैं, ये सब विशेषताएं नए आॢथक पैकेज की ताकत के साथ भारत को औद्योगिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने की डगर पर आगे बढ़ाएंगी।

निश्चित रूप से नए आॢथक पैकेज से छोटे उद्योग कारोबार को ऋण मिलने और उनकी मुश्किलें कम होने से अब वे शीघ्रतापूर्वक काम करना शुरू कर देंगे। इससे देश के श्रमिक वर्ग को फिर से रोजगार प्राप्त होने लगेगा। वस्तुत: इस क्षेत्र में कोविड-19 के कारण नौकरी और रोजगार बचाना बड़ी चुनौती बन गई है। खासतौर से देश के करीब 45 करोड़ के वर्क फोर्स में से 90 फीसदी श्रमिकों और कर्मचारियों की रोजगार मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवासी श्रमिकों को फिर से बसाने की चुनौती है। देश के कोने-कोने में पैदल, ट्रकों और ट्रेनों से लाखों श्रमिक शहर छोड़कर अपने-अपने गांवों में जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन प्रवासी श्रमिकों को राहत पहुंचाने के लिए पी.एम. केयर्स फंड से 1000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

निश्चित रूप से देश को आत्मनिर्भर बनाने में नए आॢथक पैकेज के   साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले पांच-छह वर्षों में जिन आॢथक और औद्योगिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाया है, अब उनका भी पूरा लाभ मिलेगा। ज्ञातव्य है कि मोदी सरकार ने वाणिज्य-व्यापार के क्षेत्र में सुधार किए हैं, निर्यात बढ़ाने तथा करों एवं ब्याज दरों में बदलाव जैसे अनेक क्षेत्रों में रणनीतिक कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का जोरदार काम भी किया है। 
उत्पादकों और श्रमिकों के हितों को देखते हुए श्रम कानूनों में संशोधन किए गए हैं। निवेश और विनिवेश के नियमों में परिवर्तन भी किए गए हैं और विगत सितंबर 2019 में कार्पोरेट कर में भारी कमी की गई है। इन परिवर्तनों के लाभों के साथ अब जब नए व्यापक आॢथक पैकेज के लाभ जुड़ जाएंगे तो निश्चित रूप से देश की औद्योगिक और आॢथक तस्वीर बदलती हुई दिखाई दे सकेगी।

निश्चित रूप से एक ओर आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत छोटे उद्योग-कारोबार के लिए दिए गए नए आॢथक पैकेज से उद्योग गतिशील हो सकेंगे। वहीं दूसरी ओर इस समय देश के कई राज्यों के द्वारा बड़े पैमाने पर जिस तरह श्रम सुधारों को आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे भी उद्योग-कारोबार में उत्पादन और रोजगार बढ़ेगा। हाल ही में देश में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, असम, महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा की राज्य सरकारों ने श्रम सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले किए हैं।

इन विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा किए जा रहे श्रम सुधारों के तहत कई बातें एक जैसी दिखाई दे रही हैं। जिसमें नई स्थापित होने वाली इकाइयों को श्रम कानूनों के अनुपालन में काफी छूट दी गई है। कारखाने का लाइसैंस लेने की शर्तों में भी ढील दी गई है। कारखाना अधिनियम 1948 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अधिकांश प्रावधान भी इन फर्मों पर लागू नहीं होंगे। चीन से बाहर निकल रही कंपनियों को अपने-अपने राज्य में आकॢषत करने के मद्देनजर विभिन्न राज्यों ने विदेशी पूंजी संबंधी अधिकांश श्रम कानूनों को सरल कर दिया है। उत्पादन बढ़ाने के लिए कई राज्यों ने उत्पादन इकाइयों में काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 कर दिया है। लेकिन प्रमुख श्रम सुधारों के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि नए श्रम कानूनों के परिप्रेक्ष्य में कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं दोनों वर्गों के बीच उपयुक्त तालमेल बनाए रखा जाना होगा। 
हम उम्मीद करें कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा घोषित नए भारत निर्माण के तहत 13 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छोटे-उद्योग कारोबार में नई जान फूंकने के लिए जो अभूतपूर्व घोषणाएं की हैं वे देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए संजीवनी का काम करेगी। इससे इस समय देश की ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था गतिशील होगी और देश आत्मनिर्भरता की नई डगर पर आगे बढ़ेगा।

- डॉ. जयंतीलाल भंडारी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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