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‘डिजिटल अर्थव्यवस्था’ की नई चमकीली आर्थिक अहमियत

  • Updated on 6/12/2020

यकीनन कोविड-19 के बीच देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था छलांगें लगाकर आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रही है। जहां देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण परम्परागत रूप से किए जा रहे आॢथक क्रियाकलापों में लगने वाले समय, धन और श्रम की बचत होते हुए दिखाई दे रही है, वहीं देश के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था की तीन चमकीली आर्थिक अहमियत दिखाई दे रही है। एक, डिजिटल टैक्स भारत की आमदनी का नया और सतत बढऩे वाले स्रोत के रूप में उभर रहा है। दो, डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए मौके बढ़ रहे हैं और तीन, डिजिटल लेन-देन के बहुआयामी लाभ बढ़ते जा रहे हैं। 

गौरतलब है कि भारत के द्वारा वैश्विक डिजिटल कम्पनियों पर लगाए गए नए डिजिटल टैक्स की देश की आमदनी में प्रभावी भूमिका बनते हुए दिखाई दे रही है। ज्ञातव्य है कि भारत में दो करोड़ रुपए से अधिक का वाॢषक कारोबार करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों के द्वारा किए जाने वाले व्यापार एवं सेवाओं पर दो फीसदी डिजिटल कर लगाना सुनिश्चित किया गया है। 

वस्तुत: डिजिटल कर विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा भारत में अर्जित की जा रही आय पर लगाया गया है। इस कर के दायरे में भारत में काम करने वाली दुनिया के सभी देशों की ई-कॉमर्स करने वाली कंपनियां शामिल हैं। देश के आयकर विभाग ने 24 से अधिक गैर भारतीय ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर डिजिटल टैक्स की पहली किस्त के भुगतान हेतु कानूनी दायरों का सूचना पत्र जारी कर दिया है। इस पर अमरीका की डिजिटल कंपनियों एमेजॉन, फेसबुक और गूगल आदि ने आपत्ति लेते हुए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय से इसकी शिकायत की है। कहा गया है कि उन्हें बड़ी राशि डिजिटल टैक्स के रूप में देनी होगी, जो उपयुक्त नहीं है ।  

नि:संदेह डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढऩे से बड़ी संख्या में रोजगार के मौके भारत की नई पीढ़ी की मुट्ठियों में आने का चमकीला परिदृश्य तेजी से आगे बढ़ा है। विश्व प्रसिद्ध मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीच्यूट के द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट ‘डिजिटल इंडिया: टैक्नोलॉजी टू ट्रांसफॉर्म ए कनैक्टेड नेशन’ में कहा गया है कि जहां भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था में वर्ष 2025 तक करीब 6 से 6.5 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होंगे वहीं डिजिटलीकरण की वजह से संकट में आई करीब 4 से 4.5 करोड़ परम्परागत नौकरियां समाप्त हो जाएंगी। फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण से करीब 2 करोड़ से अधिक नई नौकरियां निर्मित होते हुए दिखाई देंगी। 

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के तहत डिजिटल लेन-देन के तेजी से बढऩे से लेन-देन में सरलता और भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था की डगर आगे बढ़ रही है। उद्योग संगठन एसोचैम और पी.डब्ल्यू.सी. की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 तक देश में डिजिटल भुगतान में वाॢषक 20 फीसदी से अधिक की बढ़ौतरी हो सकती है। इस अवधि में चीन में डिजिटल लेन-देन में 18.5 प्रतिशत और अमरीका में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। वर्ष 2019 के अंत तक भारत में डिजिटल लेन-देन करीब 64.8 अरब डॉलर रहा है, यह वर्ष 2023 तक दोगुना से अधिक बढ़कर करीब 135.2 अरब डॉलर पर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में भारत डिजिटल लेन-देन में बढ़ौतरी के मामले में चीन और अमरीका को पछाड़ देगा। 

वस्तुत: कोविड-19 के बीच जिस तरह देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी उसके  कई कारण हैं। खासतौर से देशभर में डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने, करीब 35 करोड़ जनधन खातों में लाभाॢथयों को डायरैक्ट बैनीफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) से भुगतान, बैंकों में डिजिटल लेन-देन, करदाताओं के द्वारा टैक्स के डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन खरीदारी के कारण देश के शहरों में ही नहीं, गांवों में भी डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है। देश में इंटरनैट के तेजी से बढ़ते हुए उपयोगकत्र्ताओं, सस्ती दरों पर डाटा उपलब्ध होने तथा लोगों की क्रय शक्ति के अनुसार मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल चीजों की कीमतें कम होने से लोगों में इंटरनैट के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ी है।
निश्चित रूप से कोविड-19 के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था के तहत भारत में ई-कॉमर्स बाजार की डगर चमकीली बन गई है। हाल ही में विश्व प्रसिद्ध ग्लोबल डाटा एजैंसी स्टेटिस्टा के द्वारा लॉकडाऊन और कोविड-19 के बाद जिंदगी में आने वाले बदलाव के बारे में जारी की गई वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक 46 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वे अब खरीदारी के लिए भीड़भाड़ में नहीं जाएंगे। 

वे ई-कॉमर्स के माध्यम से घर बैठे उपभोक्ता वस्तुएं प्राप्त करना चाहेंगे। ऐसे में कोविड-19 के बीच भारत में खुदरा कारोबार (रिटेल ट्रेड) के ई-कॉमर्स बाजार की चमकीली संभावनाओं को मुट्ठियों में करने के लिए दुनियाभर की बड़ी-बड़ी ऑनलाइन कंपनियों के साथ-साथ भारत के व्यापारिक संगठनों के द्वारा भी स्थानीय किराना दुकानों व कारोबारियों को ऑनलाइन जोड़ने के प्रयास की नई रणनीति बनाई जा रही है।

इस परिप्रेक्ष्य में यहां हाल ही में विश्व प्रसिद्ध बर्नस्टीन रिसर्च की रिपोर्ट उल्लेखनीय है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनाकाल में लोगों ने तेजी से डिजिटल का रुख किया है और यह बदलाव स्थाई होने जा रहा है। बर्नस्टीन के मुताबिक जियो-फेसबुक का प्लेटफॉर्म अप्रोच भारत में कॉमर्स, पेमेंट और कंटैंट से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण सॢवसेज का इकोसिस्टम बना रहा है। इससे साल 2025 तक करीब 151 लाख करोड़ रुपए का बाजार खड़ा हो सकता है।

चूंकि कोविड-19 के बाद डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रगति का आधार होगी, अतएव हमें देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की कमियों को दूर करके इसे और अधिक कारगर व उपयोगी बनाना होगा। हम उम्मीद करें कोविड-19 की चुनौतियों के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था के लाभों को मुट्ठियों में करने के लिए सरकार एक ओर नई पीढ़ी को डिजिटल अर्थव्यवस्था में नई रोजगार योग्यताओं से पल्लवित पुष्पित करने की रणनीति बनाएगी, वहीं दूसरी ओर सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुराइयों से उद्योग-कारोबार और उपभोक्ताओं को बचाने की नई रणनीति की डगर पर भी आगे बढ़ेगी। 

हम उम्मीद करें कि जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे भारत में डिजिटल टैक्स से आमदनी बढ़ेगी, रोजगार के मौके बढ़ेंगे, आॢथक क्रियाकलापों में पारदॢशता आएगी और भारत के विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी।

- डॉ. जयंतीलाल भंडारी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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