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पद्म सम्मान की हकदार है निर्भया की मां 

  • Updated on 3/21/2020

यह एक नई सुबह है। मगर ये सुबह बहुत पहले आ जानी चाहिए थी। देश शुक्रवार को सुबह एक नए तरीके से जागा है। निर्भया मामले के चारों दोषियों को सुबह 5:30 बजे फांसी हो चुकी थी। मगर इस सुबह को लाने के लिए निर्भया की मां को सात साल तक कानूनी लड़ाई लडऩी पड़ी। वह अथक जूझती रहीं। वह न सिर्फ निर्भया के हत्यारों के खिलाफ लड़ीं बल्कि समाज की उस मानसिकता से भी जमकर जूझीं, जो बेटियों की आजादी को बर्दाश्त नहीं करती, जो सदियों से समाज की ठेकेदार बनी हुई है। जो जघन्य हत्या और बलात्कार के आरोपियों के लिए कानून के चोर दरवाजों को खोलना-बंद करना सिखाती है ताकि ताकि सजा ज्यादा से ज्यादा दिन टल सके। अगर ऐसा नहीं होता तो चारों दरिंदों को फांसी बहुत पहले हो चुकी होती। 

इन हालात को पूरे देश ने देखा। ऐसे में जिस धैर्य से एक मां ने बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ी है, वह बिना थके लगातार जूझती रही। अपने आंसुओं को खुद ही पोंछते हुए जैसे वह हर बार उठ खड़ी हुईं। बिना थके। यह जज्बा पूरे समाज के लिए मिसाल है। देश में वह सरकार से पद्म पुरस्कार की असली हकदार हैं। वही नहीं उनकी वकील का भी सम्मान किया जाना चाहिए। सरकार के अलावा समाज को भी उनका सम्मान करना चाहिए। आखिरकार उन्होंने अपनी बेटी ही नहीं, पूरे समाज की लड़ाई लड़ी है।
इस समय हमारा देश दो मोर्चों पर जूझ रहा है। एक कोरोना जैसी महामारी है, जिससे हम थोड़ी सतर्कता से बच 
-अकु श्रीवास्तव

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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