Thursday, Sep 23, 2021
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सिर्फ सलाह नहीं, कोरोना से लड़ने में सहयोग दें

  • Updated on 5/28/2021

जब कोई रोग महामारी (Coronavirus) का रूप ले लेता है तो उसका सामना करने के लिए जिस प्रकार एक रोगी अपने व्यक्तिगत या पारिवारिक स्तर पर संघर्ष करता है, उसी प्रकार महामारी से सारे समाज को एकजुट होकर सामूहिक रूप से संघर्ष करना पड़ता है। महामारी के दौर में जिस प्रकार सरकार को एक आपातकालीन दायित्व निभाना पड़ता है, लगभग उसी प्रकार समाज के सभी छोटे-बड़े गैर सरकारी संगठनों के कंधों पर भी एक बड़ा दायित्व आ जाता है। महामारी के दौर में यदि सरकारी योजनाओं के साथ सभी गैर-सरकारी संगठन और देश का प्रत्येक नागरिक एक स्वर और एक तरंग की तरह कार्य करे तो बड़ी से बड़ी महामारी को भी जल्द से जल्द हराया जा सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के विचारों के आधार पर भारत सरकार ने नागरिकों को कोरोना ग्रस्त होने से बचाने के लिए कई प्रोटोकॉल घोषित किए हैं जैसे मास्क लगाना, सामाजिक दूरी, यथासम्भव घर पर रहना, भीड़भाड़ से बचना, नियमित हाथ धोना तथा सबसे प्रमुख अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्युनिटी को दुरुस्त रखना।

देश के लिए ‘युद्ध काल’ है यह संकट काल

एक व्यक्ति के कोरोनाग्रस्त होने पर पूरा परिवार तनाव में आ जाता है। ऐसे समय में उन्हें उचित और पर्याप्त चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। समाज में जब कोई एक रोग महामारी का रूप ले लेता है तो स्वाभाविक रूप से चिकित्सा सहायता के नाम पर औषधियों तथा अन्य उपकरणों आदि की भी कमी सामने आने लगती है। महामारी का अर्थ है कि अचानक बहुत बड़े स्तर पर समस्या का पैदा होना। इस परिस्थिति में केवल सरकार इतने बड़े स्तर पर उपकरण उपलब्ध कराने के भरसक प्रयास कर रही है।

एक तरफ दवाइयां उपलब्ध कराना, हर छोटे-छोटे क्षेत्र के स्तर पर वैक्सीनेशन केन्द्र स्थापित करना एवं सम्पूर्ण देश में वैक्सीन पहुंचाना आदि बहुत व्यापक कार्य हैं, परन्तु दूसरी तरफ हमारे देश की राजनीति हर कदम पर एक आपूत्तिकर्ता समूह से अधिक कोई दायित्व निभाती हुई दिखाई नहीं देती। जब वैक्सीन बन कर तैयार हो रही थी तो उसके बारे में हमारे विपक्षी मित्र यह दुष्प्रचार कर रहे थे कि यह भाजपा का टीका है। जब वैक्सीन बनकर तैयार हो गई तो स्वाभाविक रूप से उसके उत्पादन के अनुपात में ही धीरे-धीरे लोगों को वर्गानुसार ही वैक्सीनेशन किया जाना था। इस पर विपक्षी दलों ने वैक्सीन की कमी का दुष्प्रचार प्रारम्भ कर दिया। 

न्यायालय और चिकित्सालय जीवन रक्षा के असली केंद्र 

विपक्षी दलों से संबंधित सामान्य कार्यकर्ताओं से लेकर राष्ट्रीय नेताओं तक सभी वैक्सीन लगवा भी रहे हैं और फिर भी वैक्सीन की कमियां निकालने से बाज नहीं आ रहे। कोरोना के बाद नया स्टे्रन, अब ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस की चुनौतियों का सामना करना सरल कार्य नहीं। 

हमारे देश के सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इस दौर में अपनी भरपूर सहानुभूति और उदारता का परिचय दिया है। देश के कोने-कोने में स्थापित मन्दिरों, गुरुद्वारों और यहां तक कि मस्जिदों एवं चर्चों से भी मास्क, सैनेटाइजर, भोजन के पैकेट तथा दवाइयां आदि बांटने के अनेकों समाचार हमने देखे एवं सुने हैं। ऋषिकेश के एक सुप्रसिद्ध परमार्थ निकेतन आश्रम से पता लगा कि इस आश्रम में पिछले वर्ष से ही लगभग 100 बिस्तरों वाला कोरोना अस्पताल स्थानीय प्रशासन के सहयोग से कोरोनाग्रस्त लोगों को समॢपत किया गया था। छोटी-मोटी सहायता सामग्री का वितरण तो यहां का लगातार नियम है, परन्तु गत सप्ताह ही पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने 25 ऑक्सीजन कंसंटे्रटर कोरोना रोगियों के लिए समर्पित किए। एक कंसंटे्रटर लगभग एक लाख रुपए कीमत का है और इस आश्रम की सहायता से लगभग दो सप्ताह के भीतर 100 कंसंटे्रटर मंगवा कर जनता के लिए समॢपत किए जा रहे हैं। यह वास्तविक सहायता का एक अनूठा उदाहरण है।    

आज देश के प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि वह सोशल मीडिया पर भिन्न-भिन्न प्रकार के विचार सलाह के रूप में देने के स्थान पर अपनी सहायता का उदाहरण प्रस्तुत करें। इस प्रकार लोगों के सहायता प्रयासों को देखकर भगवान भी सहायता करने के लिए विवश हो जाते हैं। 

- अविनाश राय खन्ना (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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