Wednesday, Aug 17, 2022
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pakistan is trying to get kashmir through terrorism aljwnt

कश्मीर के साथ पाकिस्तान का 'जुनून' जारी है

  • Updated on 5/8/2020

जम्मू -कश्मीर को केंद्रीय शासित प्रदेश घोषित तथा अनुच्छेद-370 को समाप्त करने के बाद घाटी में फिर से अशांति और हिंसा के दिन लौट रहे हैं। हिजबुल मुजाहिद्दीन और अंसार गजवत उल ङ्क्षहद (ए.जी.एच.) के प्रमुखों की हत्या के साथ पिछले 10 दिनों के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। भारत के लिए हिजबुल प्रमुख और घाटी के सबसे अधिक वांछित आतंकवादी रियाज अहमद नायकू की हत्या ने पाकिस्तान समॢथत आतंकवादी संगठन को एक अस्थायी झटका दिया है। वह हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों और फल व्यापारियों की हत्या सहित कई हालिया आतंकवादी गतिविधियों के पीछे शामिल था। वह पुलिस अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के अपहरण के लिए भी जिम्मेदार था।

मगर देश को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ी। जब इसने कर्नल आशुतोष शर्मा और मेजर अनुज सूद के अलावा सब-इंस्पैक्टर सगीर अहमद पठान, नायक राजेश कुमार और लांस नायक दिनेश सिंह को भी खो दिया। लगभग एक महीना पहले सेना को एक और बड़ा झटका लगा था। जब कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के पास एक मुठभेड़ में 5 विशिष्ट विशेष बल के कमांडो को शहादत मिली थी। इसी लड़ाई में पांच आतंकी भी मारे गए थे।

ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान को यह एक उचित समय मिल गया है, जबकि भारत का ध्यान कोरोना वायरस प्रकोप को नियंत्रण करने में लगा हुआ है, वहीं पाक समॢथत आतंकवादी संगठन फिर से सिर उठा रहे हैं। भारतीय सुरक्षा बलों ने भी पिछले एक महीने के दौरान कम से कम 30 आतंकियों को मार कर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। 2019 के दौरान मारे गए 152 आतंकियों की तुलना में इस वर्ष के शुरू होने के दौरान से अब तक 64 आतंकी मार गिराए हैं।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया में जब सभी देश कोरोना वायरस महामारी का सामना कर रहे हैं, कश्मीर के साथ पाकिस्तान का जुनून जारी है। सार्क नेताओं की एक ऑनलाइन बैठक के दौरान पूरी दुनिया को उस समय निराशा हुई, जब पाकिस्तान के मंत्री ने कश्मीर के मुद्दे पर हंगामा किया। घाटी में अनुच्छेद-370 को हटाना तथा राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद आतंकवादियों को स्तब्ध कर दिया है। संचार चैनलों में की गई गंभीर कटौतियों ने अफवाहों और उत्तेजक गतिविधियों को फैलाने से रोकने में प्रमुख भूमिका निभाई है। इसने पथराव की घटनाओं को भी सुखा दिया है, जो सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से दिए गए संदेशों द्वारा भड़काई गई थीं।

समाज के सभी वर्गों ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित हालिया राजनीतिक गतिविधियों के लिए सामंजस्य स्थापित किया है। कफ्र्यू की लम्बी अवधि और संचार के अन्य साधनों की पहुंच में कमी ने उन्हें कुछ समय के लिए थका दिया है लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि उन्होंने नए जमीनी यथार्थ को समेट लिया है। जाहिर तौर पर पाकिस्तान और उनके द्वारा समॢथत आतंकवादी संगठनों द्वारा रणनीति में बदलाव किया जा रहा है। कश्मीर में हाल ही में 2 आतंकवादी संगठन सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार प्रतिरोध मोर्चा पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तोयबा तथा तहरीक-ए-मिल्लत-ए-इस्लामी की शाखा है।

चूंकि सोशल मीडिया के माध्यम से फैली अशांति पर अंकुश लगाया गया है, नई रणनीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य निॢदष्ट लक्ष्यों पर हमले भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों को इस नई चुनौती से लडऩे के लिए अपने पंजों पर बने रहना होगा। ऐसी सभी गतिविधियों को सख्ती के साथ कुचलना होगा। सुरक्षा बलों को अपना हौसला बनाए रखना होगा। सरकार को भी सूझबूझ रखते हुए सक्रिय रूप से साधारण लोगों तक पहुंचना होगा।

- विपिन पब्बी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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