Sunday, Jan 19, 2020
people who consider helmets as a burden are playing with their lives

हेलमेट को बोझ समझने वाले लोग कर रहे हैं अपनी जिंदगी से खिलवाड़

  • Updated on 9/27/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के बावजूद लोग सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के प्रति लापरवाह देखे जाते हैं। विशेष रूप से मोटरसाइकिल पर सवारी के समय हेलमेट लगाना अनिवार्य है परंतु बाइक सवार इस नियम का पालन नहीं करते जो दुर्घटना की स्थिति में सिर पर लगने वाली चोटों से होने वाली मौतों का बड़ा कारण है। बिना हैल्मेट दोपहिया वाहन चलाने से होने वाली मौतों के राज्य सरकारों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में ऐसे लगभग 43,600 दोपहिया वाहन चालकों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई है।
 
यह संख्या इससे एक वर्ष पूर्व 2017 में हुई 35,975 मौतों से 21 प्रतिशत अधिक है जबकि इसी अवधि में 15,360 पीछे बैठी सवारियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

हालांकि गुजरात और झारखंड सरकारों ने दोपहिया वाहनों के पीछे बैठी सवारियों को हेलमेट पहनने से छूट दी है परंतु मौतों के उक्त आंकड़़ों को देखते हुए तो यही समझ में आता है कि यह छूट देना उचित नहीं है। 

बेशक कुछ स्थानों पर दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कुछ प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई हैं और कुछ पैट्रोल पम्पों पर बिना हेलमेट लगाए दोपहिया चालकों को पैट्रोल नहीं दिया जाता परंतु इतना ही काफी नहीं है।
 
जब तक लोग बिना हेलमेट दोपहिया चलाने के खतरे नहीं समझेंगे और पुलिस प्रशासन इस बारे सख्ती नहीं बरतेगा तब तक हेलमेट न पहनने पर दुर्घटना की स्थिति में सिर पर चोट लगने से मौतें होती ही रहेंगी क्योंकि हमारे देश में जब तक सख्ती न बरती जाए तब तक कोई काम नहीं होता।     

-विजय कुमार

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