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प्रतिकूलता से निपटना और उसके आगे देखना ही 'नेतृत्व'

  • Updated on 5/18/2020

किसी देश पर कोई संकट आता है तो वह उसके शीर्ष नेतृत्व को एक से अधिक तरीकों से परखता है। सबसे पहले तो जब कोई संकट आता है तो उसके  प्रति तत्काल प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड-19 के खतरे को बहुत पहले भांप लेने  के साथ-साथ सतर्क, निर्णायक कदम उठाने से देश में इस वायरस के प्रसार को धीमा करने में मदद मिली और भारत को कई अन्य देशों से अलग भी खड़ा किया। अब तो प्रधानमंत्री द्वारा की गई देश को महत्वपूर्ण क्षति से बचाने की त्वरित कार्रवाई को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।

कहा जाता है कि विपत्ति के दौरान ही लोगों का असली चरित्र सामने आता है। यही बात नेतृत्व पर भी समान रूप से लागू होती है। सामान्य काल में नेतृत्व प्रदान करना भले ही चुनौती न हो मगर कठिनाई के समय ही वह बाकी से अलग होकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करता है। दुनिया भर में कोविड-19 महामारी नेतृत्व की परीक्षा ले रही है। इस परीक्षा में भारत और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल वायरस के खिलाफ एक उत्साही लड़ाई लड़ रहा है, बल्कि संकट के बाद की कोविड दुनिया को भी देख रहा है और इसके लिए खुद को सावधानीपूर्वक तैयार कर रहा है ताकि वह अपना सर्वश्रेष्ठ कदम आगे रख सके।

आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट आह्वान और उसके बाद पांच दिनों की अवधि में कई एेतिहासिक कदम उठाए गए हैं जिन्हें भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद रखा जाएगा। आसन्न संकट से नहीं घबराने के प्रेरक संदेश के साथ ही वैश्विक आपूॢत शृंखलाओं के पुनर्गठन में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहने के संदेश ने हर भारतीय को उत्साह से भर दिया है।

भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रत्येक क्षेत्र की कहानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गहन सुधार देखा जा सकता है। भारत के विकास के पहिए गरीब, रेहड़ी-फड़ी वालों (स्ट्रीट वैंडर्स) और प्रवासी मजदूरों के लिए कई उपायों की घोषणा की गई है। एक राष्ट्र एक राशन कार्ड से लेकर सभी प्रवासियों को मुफ्त खाद्यान्न, मामूली ऋण लेने वाले मुद्रा लाभाॢथयों के लिए ब्याज में छूट से लेकर स्ट्रीट वैंडर्स के लिए प्रारंभिक कार्यशील पूंजी की सुविधा देने, मनरेगा आबंटन को बढ़ावा देने से लेकर स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को सशक्त बनाने तक के उपाय कर के आॢथक पैकेज ने उन लोगों को मजबूत बनाने पर जोर दिया है जो कोविड-19 के आॢथक परिणामों से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र भारत के विकास के पहियों में से एक है जो विशेष रूप से इस क्षेत्र की रोजगार की गहन प्राप्ति के कारण महत्वपूर्ण है। रियायती ब्याज दरों पर इन उद्यमों को 3 लाख करोड़ रुपए की क्रैडिट गारंटी, बिना किसी कोलेटरल के अपने आप दिया जाना इन उद्यमों को एक अतिरिक्त खुराक के रूप में है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की परिभाषा में आमूल-चूल विस्तार यह सुनिश्चित करता है कि ऐसी कंपनियां अपने विशिष्ट लाभों को खोने के डर से निरुत्साहित न हों। इन उद्यमों के लिए संदेश है-बड़ा सोचो और बढ़ो।

कई कृषि विशेषज्ञों ने हाल के कृषि सुधार उपायों को स्वतंत्रता आंदोलन के समान माना है। अभी कृषि विपणन माडल एेसा था कि जो उपभोक्ताआें और किसानों दोनों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था जबकि बिचौलियों की पौ बारह थी। आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव से किसानों को अपनी उपज जिसे भी वे चाहें को बेचने की स्वतंत्रता मिली है, फार्म-गेट बुनियादी ढांचे में 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश और खेती और उद्योग को एक साथ लाने के लिए दिए गए समर्थन से कृषि को वास्तव में किसानोन्मुख बनाया गया है।

याद रखें कि उपरोक्त दो क्षेत्र - कृषि और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम -भारत में दो सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्र हैं। इन दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार देश के लिए बहुत अनुकूल है। दूसरी ओर, कोयला, खनन, रक्षा, विमानन और अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सार्वभौमिक सुधारों ने सरकार के सुधारवादी रुझान को दर्शाया है। आर.बी.आई. द्वारा इस साल के शुरूआत में किए गए भारी तरलता उपायों और 20 लाख करोड़ रुपए के आॢथक पैकेज ने भारत के कोविड बाद के विकास की राह प्रशस्त की है।

इस तरह के प्रभावशाली कदमों के बावजूद, कुछ नकारात्मक, कुछ टिप्पणीकार वर्ग और कुछ अन्य राजनीतिक दलों के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया है। सबसे पहले तो वे दावा करते हैं कि सरकार ने लोगों के हाथों में पैसा नहीं रखा है। शायद इन लोगों की याददाश्त थोड़ी कम है। सरकार द्वारा घोषित सबसे पहला राहत पैकेज गरीबों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का 1.7 लाख करोड़ रुपए का था। यू.पी.ए. युग के विपरीत यह सिर्फ एक घोषणा नहीं रहा। अब तक 39 करोड़ से अधिक लाभाॢथयों को लगभग 35,000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मिल भी चुकी है। इसमें 8 करोड़ से अधिक किसान शामिल हैं जिन्होंने अपने खातों में 2,000 रुपए प्राप्त किए और 20 करोड़ से अधिक जन धन खाताधारी महिलाओं ने सहायता की पहली और दूसरी किस्त प्राप्त की है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ गरीबों को राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा कानून के तहत कवर किया जाता है, जिन्हें प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज और प्रति परिवार 1 किलो दाल दी जाती है। ये बिना किसी लीकेज के सीधे लोगों तक पहुंच रहे हैं।

यह सही तरीके से सही फैसले लेने की बात भी है। यू.पी.ए. की तथाकथित ऋण माफी को हर कोई याद करता है जो किसानों तक किसी भी महत्वपूर्ण तरीके से नहीं पहुंची बल्कि उसने अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। जबकि यहां मोदी सरकार सीधे लोगों तक पहुंच रही है और जांच-परख कर उपाय कर रही है। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने वाले राज्यों की उधार सीमा को बढ़ाना भी है। यह राज्यों के लिए अतिरिक्त 4 लाख करोड़ रुपए सुनिश्चित करता है।

सच्चा नेतृत्व संस्थागत सुधार को प्रेरित करने और प्रोत्साहित करने के बारे में होता है। परिवर्तनकारी नेतृत्व वह है जो न केवल तात्कालिक चुनौती से जूझता है बल्कि देश को पहले से अधिक मजबूत बनाने के लिए तैयार करता है। इतिहास ने दिखाया है कि इस तरह के वैश्विक संकट के बाद विश्व व्यवस्था बदल गई है। भारत सौभाग्यशाली है कि इस समय प्रधानमंत्री मोदी उसका नेतृत्व कर रहे हैं। जैसा कि पिछले सप्ताह के कार्यों ने दर्शाया है कि वे अवसर को पूरी तरह से समझते हैं।

- प्रकाश जावड़ेकर (केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, सूचना और प्रसारण, और भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्री)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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