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अब आप सब ‘जान’ चुके होंगे

  • Updated on 6/3/2020

आप कोरोना, लॉकडाऊन, गिरती हुई अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी और कुछ बहुत ही तकलीफदेह तस्वीरों के कारण शायद नोटिस नहीं कर पाए थे परंतु अब आप जान चुके होंगे। उस पत्र को पढ़ने के बाद जो हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के पिछले एक साल के रिपोर्ट कार्ड के साथ आपको अपने पार्टी लैटर हैड पर भेजा।

इसमें उन्होंने धारा 370, अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले, तीन तलाक और नागरिकता कानून बदलने का जिक्र तो किया ही है, साथ ही 9 करोड़ 50 लाख किसानों के खाते में 72000 करोड़ रुपए डालने को भी अपनी उपलब्धियों में गिनाया है और 20 लाख करोड़ रुपए के कोरोना पैकेज को भी। इस लम्बी फेहरिस्त में बहुत-सी और उपलब्धियों का जिक्र है, और कुछ भविष्य में पूरी की जाने वाली योजनाओं का भी।

आप सोच सकते हैं कि प्रधानमंत्री यही पत्र सरकारी लैटर हैड पर भी छाप कर भेज सकते थे, पर अब वैसे क्या फर्क पड़ता है, मोदी, भारत, भाजपा और सरकार में, जब संदेश, हरकारे और माध्यम में कोई फर्क नहीं रह गया हो। इस चिट्ठी के साथ ही साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने ढोल-नगाड़े लेकर हैप्पी बर्थडे मनाना शुरू कर दिया है और घर-घर डिजीटल तरीकों से मोदी जी का संदेश पहुंचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। सारे सर्वेक्षण मोदी जी की एप्रूवल रेटिंग्स को रिकार्ड ऊंचाई पर बता रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने एक अखबार में इस शीर्षक ‘अनडूइंग 6 डिकेड्स इन 6 इयर्स’ (अर्थात मोदी के छह साल पिछले छह दशकों पर भारी हैं) से लेख में लिखा है कि कैसे मोदी ने इन छह सालों में भारत को आत्मनिर्भर बना दिया है, हालांकि प्रधानमंत्री अपने भाषण में भारत को आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाने की बात कर रहे थे। 

इससे क्या कि पाकिस्तान से आया हुआ कबूतर भी पकड़ लिया जाता है और चीन की तरफ से आए सैनिकों पर हमारा कई दिनों तक ध्यान ही नहीं जाता। इससे क्या कि चीन के सैनिक लद्दाख में घुस आए हैं, और बकौल डोनाल्ड ट्रम्प-प्रधानमंत्री मोदी अच्छे मूड में नहीं हैं। कुछ अप्रिय सी तस्वीरें और वीडियो आए हैं पर इससे क्या कि 2014 से पहले दोनों- नरेन्द्र मोदी और अमित शाह चीन के खि़लाफ़ कड़ी कार्रवाई न करने के लिए मनमोहन सिंह को कमजोर बता रहे थे। इससे क्या कि ‘कड़ी निंदा’ को संस्थागत शब्दावली में बदलने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसे अवधारणा का अंतर बताकर टाल-मटोल कर रहे हैं। इससे क्या कि दुनिया के सबसे कड़क लॉकडाऊन और सबसे ढीली टैस्टिंग के बाद भी भारत में कोरोना संक्रमण के मामले रोज नए रिकार्ड छू रहे हैं। इससे क्या कि ऐसी बेरोजगारी की दर भारत ने कभी नहीं देखी। इससे क्या हर तीन में से एक छोटा व्यवसाय खत्म हो गया है। इससे क्या कि देश का सॉलीसिटर जनरल देश के सुप्रीमकोर्ट में न सिर्फ झूठ बोलकर, व्हाट्सएप फॉरवर्ड को सच बताकर और पत्रकारों को गिद्ध बताकर चले आते हों। भले ही भाजपा के एक नेता राम माधव भाजपा के दूसरे नेता कपिल मिश्रा की बी.बी.सी. के इंटरव्यू में निंदा कर आते हों।

इससे क्या कि इस सरकार से असहमति जताने वाले बहुत से नौजवान और समाजसेवी इन दिनों हवालात में हैं और कश्मीर में अभी भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। इससे क्या कि राहुल गांधी दुनिया भर के तथाकथित जानकार लोगों से भारतीय मुश्किलों का समाधान अंग्रेजी में पूछते फिर रहे हों। 

इससे भी क्या कि रेटिंग एजैंसी मूडी ने भारत का ग्रेड इतना नीचे कर दिया है कि उसके नीचे सिर्फ जंक (कबाड़) ही है। इससे क्या कि जो हाईकोर्ट अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को एक दिन कालकोठरी कह रहा था, अगले दिन वही प्रशस्तिगान और पुष्प वर्षा करने लगा। इससे क्या कि सोनू सूद द्वारा जुटाई बसें देश के कोने-कोने में जा रही हों, और प्रियंका गांधी की बसें कई दिनों तक यूपी बॉर्डर पर रोक कर रखी गईं। इससे भी क्या कि गूगल मैप और पटरियां होने के बावजूद बीसियों रेलगाड़ियां अपनी दिशा, लक्ष्य और मार्ग तीनों से भटक गईं।

आप सोच सकते हैं कि मोदी जी अगर प्रधानमंत्री पद पर न होते, भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार में न होती, तो उस प्रधानमंत्री, उस सरकार, उस पार्टी का क्या हाल किया जाता। जैसे 130 करोड़ लोगों के देश में एक ढंग की फुटबाल टीम, एक बेहतरीन ओलिम्पिक टीम, स्थानीय नोबेल पुरस्कार विजेताओं की थोड़ी कमी है, वैसे ही विपक्ष की भी कमी है। एक के बाद एक फुल टॉस बॉल आ रही है और कोई छक्का मारने वाला नहीं है। जो मार सकता था, वह विपक्ष में नहीं है।

- निधीश त्यागी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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