Sunday, Oct 02, 2022
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Blog: फरार आतंकियों के मारे जाने पर गंदी राजनीति क्यों?

  • Updated on 11/1/2016
  • Author : National Desk

भोपाल सेंट्रल जेल से सोमवार तड़के #SIMI के आठ आतंकवादी फरार हो गए लेकिन मध्यप्रदेश की पुलिस और जनता की सतर्कता व मुस्तैदी के कारण उनके भावी मंसूबे सफल नहीं हुए तथा उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा। सिमी के इन आठ आतंकवादियों में से पांच पहले भी खंडवा जेल से फरार हुए थे लेकिन उन्हें बाद में धर दबोचा गया। उन्होंने इस बार फिर दुस्साहस किया परंतु ज्यादा दूर भागने के पहले ही मारे गए। इस मसले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है।

Navodayatimesऐसे मामलों पर राजनीतिक छींटाकशी दुर्भाग्यपूर्ण होती है और वह राष्ट्रीय हित में भी नहीं है परंतु हमारे देश में राष्ट्रहित की राजनीति कम, वोट बैंक की राजनीति ज्यादा होती है। यह सिलसिला तो चलता रहेगा और इस बात पर चर्चा करना बेमानी है कि राजनेता कभी सुधरेंगे भी या नहीं। यहां इस बात पर भी चर्चा नहीं होनी चाहिए कि मुठभेड़ फर्जी थी या असली।

असली मुद्दा यह है कि आतंकियों ने एक सिपाही की जान ले ली और फरार हो गए। अगर वे पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते तो देश के किसी भी हिस्से में बड़ी आतंकी साजिश रचने में जुट जाते। मारे गए आतंकी वह युवक थे, जो कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर गलत राह पर चल पड़े। और अपने ही देश के दुश्मन बन गए।

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इसका खामियाजा उन्हें जान देकर भुगतना पड़ा। इनमें से पांच पहले भी खंडवा जेल से फरार हुए थे। इससे पता चलता है कि वे कितने खतरनाक और चालाक थे। जब भी पुलिस के हाथों कोई आतंकवादी या अपराधी मारा जाता है, मानवाधिकार संगठन सक्रिय हो जाते हैं।

सिमी के आठ आतंकियों की मौत पर भी मानवाधिकारों को ढाल बनाकर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं। जिन राष्ट्र विरोधियों ने कभी मानवाधिकारों का सम्मान नहीं किया, मासूमों के खून से हमेशा अपने हाथ रंगे, उनके लिए मानवाधिकार के नाम पर आंसू बहाना भी किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है।

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फरार होने से पहले इन आतंकियों ने बड़ी निर्ममता से जेल के एक प्रहरी की जान ले ली। उसका गला रेत दिया गया, ऐसे में उनके मानवाधिकारों की वकालत क्यों की जानी चाहिए। बहरहाल, इन आतंकवादियों का फरार होना इस बात का साफ सबूत है कि मध्यप्रदेश की जेलें पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने जेल अधीक्षक समेत कुछ जेल कर्मियों को निलंबित कर जांच तो शुरू कर दी है लेकिन खंडवा जेल की घटना से शायद सबक नहीं सीखा गया। खंडवा जेल से 2013 में आतंकियों के फरार होने के बाद तो राज्य की जेलों में अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था कर दी जानी चाहिए थी। वैसा हुआ नहीं और भोपाल सेंट्रल जेल से आतंकी फरार हो गए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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